ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

बाजे वाला

रणभेरी की गूंज करीब सुनाई दे रही थी. राज्य की जनता में भय का माहौल था. लोग ईश्वर से अपने...

अपनी ही अवाम के साथ इतनी घातक-घिनौना षड्यंत्र एक गद्दार ही कर सकता है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रचार करते हुए केन्द्र की मोदी सरकार ने गांव-गांव में श्मशान...

क्या हैं किताबें ?

कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ एक डच उपन्यासकार के उपन्यास की डेढ़ दो करोड़ की आबादी वाले नदरलैण्ड...

नए उभरते ‘कारपोरेट भारत’ के प्रति सोच बदलने का वक्त आ गया है

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना आडंबर और पाखंड को अपने जीवन मूल्यों में शामिल कर चुका शहरी मध्यवर्ग...

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