ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

पत्रकारिता के सिस्टम को राजनीतिक और आर्थिक कारणों से कुचल दिया गया

रविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार पत्रकारिता बिनाका गीतमाला नहीं है. फ़रमाइश की चिट्ठी लिख दी और गीत बज...

बिहार विधानसभा चुनाव : जंगल राज की परिभाषा को संकीर्ण नहीं बनाया जा सकता

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना लगातार 15 वर्षों तक राज करने के बाद भी अगर नीतीश कुमार को...

'लॉकडाउन 'कठोर' था जिसने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया. लॉकडाउन वायरस के संक्रमण के प्रसार को सपाट करने की दृष्टि...

रोज़गार के प्रश्न को भारत के बेरोज़गार युवाओं ने ही ख़त्म कर दिया

रविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार जर्मनी ने बेरोज़गार होने से बचा लिया, अमरीका ने बेरोज़गार होने दिया, भारत...

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