Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भीड़ हमेशा साहस से बहुत डरती है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 27, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भीड़ हमेशा साहस से बहुत डरती है

प्रेमकांत ने देखा कि मुस्लिम पड़ोसी का घर जल रहा है तो आग में घुस गए. परिवार में 6 लोगों को बाहर निकाल लिया. बूढ़ी मां बच गई थीं. प्रेमकांत फिर से आग में घुस गए, मां को निकाल लाये लेकिन खुद झुलस गए. झुलस गए तो क्या हुआ ? इस घर पर पेट्रोल बम से हमला करने वाले राक्षस तो हार गए न ? वे हमेशा हारेंगे.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

मुस्तफाबाद के एक मोहल्ले में भीड़ हिंदू घरों में घुसने लगी तो आसपास के मुस्लिम युवक आगे खड़े हो गए. बोले मेरी गली में तभी घुस पाओगे जब हमें मार डालो. हमारे रहते हम ये नहीं होने देंगे. भीड़ लौट गई.

भीड़ हमेशा साहस से बहुत डरती है. दंगाई भीड़ बूढ़े कृशकाय गांधी से बहुत डरती थी. दंगाई आज भी बापू से बहुत डरते हैं. सुनील कह रहे हैं कि मेरे ये पड़ोसी न होते तो ये कहानी सुनाने के लिए मैं जिंदा न होता. एक मुहल्ले में मुस्लिमों पर भीड़ हमला करने आई तो दलितों ने कहा भाग जाओ यहां से. यहां कोई हिंदू मुस्लिम नहीं है. पहले मुझसे लड़ना पड़ेगा. भीड़ लौट गई.

एक मोहल्ले से हिंदू परिवार भागने की फिराक में थे. मुस्लिमों को पता चला. सब इकट्ठा होकर आए और बोले, हम वैसे जाहिल नहीं हैं. हम गारंटी देते हैं. आपको कहीं नहीं जाना है. कोई कहीं नहीं गया.

बन्ने खान परिवार के साथ हिंदू मोहल्ले में फंस गए. वहां उनके ताऊ का घर है तो के पड़ोसी हिंदुओं ने सबको घर में करके बाहर से ताला मार दिया. पिछले दरवाजे से खाना-पानी पहुचाते रहे. फिर सब शांत हुआ तो बन्ने के साथ पुलिस आई और सबको वहां से ले गई.

एक युवक ने सोशल मीडिया पर अपील की कि मेरे दोस्त के घर में उसकी मां अकेली है. उसके घर पर अटैक हुआ है. आपसे अपील है कि ऐसा न करें. तीन-चार मुस्लिम युवक गए और उस बुजुर्ग मां को अपने घर ले आए.

जिस मौजपुर में बहुतों का नुकसान हुआ, उसी मौजपुर में अगल-बगल हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों की दुकानें थी. दोनों ने मिलकर मोहल्ले भर को इकट्ठा किया और अपने मोहल्ले में किसी को घुसने तक नहीं दिया. इनकी 50 दुकानें सुरक्षित हैं और मोहल्ले के सभी लोग सुरक्षित हैं.

जिन सिक्खों ने विभाजन से लेकर 84 तक अथाह हिंसा झेली, उनकी तरफ देखिए, हिंदुस्तान पर भरोसा बढ़ जाएगा. कल ही सिखों ने अपने सभी गुरूद्वारों को पीड़ितों के लिए खोल दिया है. वहां सबके जान-माल की सुरक्षा भी होगी, खाना खिलाएंगे, सेवा करेंगे.

मंगलवार को जिस दिन हिंसा बेकाबू थी, मुझे सुबह से करीब दर्जन भर से ज्यादा ऐसी सूचनाएं मिलीं जहां हिंदू और मुसलमानों ने एक दूसरे को बचाया या पनाह दी. मेरे एक बहुत प्यारे दोस्त उसी दिन मिलने आये थे. बेरोजगार हैं. मेरे सामने ही 3-4 कश्मीरी युवकों ने उन्हें फोन किया. उन्होंने भरोसा दिया कि चिंता नहीं है, सब मेट्रो ले लो और लोग मेरे घर आ जाओ.

यह देश वारिस पठानों, कपिल मिश्राओं और ऐसे जाहिलों ने नहीं बनाया है, न इनके दम पर यह चल रहा है. यह देश ऐसे करोड़ों हिंदुस्तानियों के दम पर चल रहा है जिनके बारे में लिखने के लिए भाषाएं कम पड़ रही हैं. इंसानों को बचाने वाली उन हथेलियों पर भरोसा रखिये जो आपके आंसुओं से भीगे चेहरे को पोंछ देती हैं. ये लोग आज मुझे मिल जाएं तो शायद मैं कुछ कह न पाऊं, बस रो दूं, लेकिन मेरा रोम-रोम इनका ऋणी महसूस कर रहा है.

यही वे लोग हैं जो देश बनाते हैं. बहुरुपिया हत्यारे देश नहीं बनाते, वे झूठा नारा लगाते हैं. दंगाइयों से कह दो, यह हिंदुस्तान है और हिंदुस्तान कभी नहीं हारेगा.

  • कृष्णा कांत

Read Also –

राजनीति की दुःखद कॉमेडी
दंगों के बहाने गांधी जी का लेख
‘संविधान से प्यार करते हैं अन्यथा तुम्हारी जुबान खींचने की ताकत है हममें’
दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

ट्रंप का भारत दौरा और दिल्ली में हिंसा

Next Post

जस्टिस मुरलीधर का तबादला : न्यायपालिका का शव

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

जस्टिस मुरलीधर का तबादला : न्यायपालिका का शव

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सुभाष बोस जैसे व्यक्तित्व की शानदार कहानी का सबसे शानदार अंत

January 23, 2025

हिन्दी मीडियम के युवाओं के नाम रविश का पत्र

April 15, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.