Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जस्टिस मुरलीधर का तबादला : न्यायपालिका का शव

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 28, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जस्टिस मुरलीधर का तबादला : न्यायपालिका का शव

सरकार ने जस्टिस मुरलीधर को उनकी ईमानदारी का इनाम दे दिया है. कल जिन न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने दिल्ली में दंगों के लिए सरकार और दिल्ली पुलिस को तीखी फटकार लगाई थी, उन्हीं जस्टिस मुरलीधर का बोरिया-बिस्तर अब दिल्ली हाईकोर्ट से उठाकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा दिया गया है. सेंट्रल लॉ मिनिस्ट्री ने कल ही एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके अनुसार ‘संविधान के अर्टिकल 222 के तहत राष्ट्रपति ने प्रधान न्यायाधीश बोबड़े जी से सलाह करते हुए जस्टिस मुरलीधर का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के लिए कर दिया है.’

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

यहां एक बात जान लेने की है कि दिल्ली में CAA-NRC की प्रोटेस्ट के बीच ही जस्टिस मुरलीधर के तबादले की रिकमंडेशन चीफ जस्टिस बोबड़े जी ने 12 फरवरी को ही कर दी थी लेकिन तबसे अबत क केंद्र सरकार ने इसे अमल में लाने के लिए कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया था. जिस दिन से जस्टिस मुरलीधर के तबादले के लिए रिकमेंडेशन दी गई है, तब से ही दिल्ली बार एसोसिएशन कोलेजियम के इस फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति जता रही है. दिल्ली बार एसोशिएशन ने तो इस फैसले के विरुद्ध 20 फरवरी के दिन एक प्रदर्शन भी किया था.

ये वही जस्टिस मुरलीधर हैं जिन्होंने कल ही कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर के भड़काऊ भाषणों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज न करने के कारण, दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी, साथ ही दिल्ली पुलिस को तुरंत ही एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश दिए थे. जस्टिस मुरलीधर ने ये भी कहा था ‘दिल्ली में दोबारा से सन 84 के दंगे नहीं होने देंगे..’.

अब आपके मन में कुछ कुछ स्पष्ट हुआ होगा कि जस्टिस मुरलीधर के दिल्ली में बने रहने से सरकार और सरकार प्रेमी कोलेजियम के सदस्यों को क्यों दिक्कत हो रही थी ? लेकिन इस मामले को और अधिक समझने के लिए जस्टिस मुरलीधर के इतिहास के बारे में भी जान लेना जरूरी है. जस्टिस मुरलीधर वह जज हैं जिन्होंने हाशिमपुरा कांड के अपराधी पी.ए.सी. के एक दर्जन से अधिक जवानों को कड़ी सजा सुनाई थी. इन्हीं जस्टिस मुरलीधर ने सिख दंगों के आरोपी सज्जन कुमार को सजा सुनाई थी. इन्हीं मुरलीधर ने अपनी वकालत के दिनों में भोपाल गैस कांड का मामला भी बिना फीस के लड़ा था. इन्हीं मुरलीधर ने नाज फाउंडेशन के 2009 के मामले में LGBT समुदाय के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि ‘समलैंगिकता अपराध नहीं है.’ वकीलों द्वारा ‘मी लार्ड’ कहने जैसी उपनिवेशी परंपरा को भी अपने मामले में जस्टिस मुरलीधर ने ही खत्म किया था.

स्वभाविक है इतने वोकल, प्रगतिशील जज का दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश में होना, वो भी तब जबकि दिल्ली, सरकार के अत्याचारों का केंद्र बन चुकी हो, सरकार के लिए माथे का दर्द बना हुआ था.

यहां दो एक और तकनीकी बातें हैं जिन्हें जानने के बाद इस मुद्दे पर आपकी समझ थोड़ी और अधिक स्पष्ट हो जाएगी –

1. पहली बात तो जस्टिस मुरलीधर दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठता क्रम में तीसरे नंबर के जज हैं. जब भी इतने बड़े न्यायाधीश का तबादला किसी दूसरे हाईकोर्ट में किया जाता है तो आमतौर पर प्रमोशन करने के साथ ही किया जाता है. मतलब इतने वरिष्ठतम जज को किसी दूसरे हाईकोर्ट में केवल जज बनाकर नहीं भेजा जाता बल्कि नेक्स्ट हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस के रूप में प्रमोट करने के बाद ही भेजा जाता है. जबकि जिस तरह से जस्टिस मुरलीधर का तबादला किया गया है यानी बिना प्रमोशन, बिना किसी खास कारण के तब ऐसे लग रहा है जैसे जस्टिस मुरलीधर को उनके ईमानदार होने की सजा दी गई हो.

2. दूसरी बात कि तबादले से पहले सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने अन्य पक्षकारों से कोई डिस्कसन नहीं किया जैसे- बार एसोसिएशन.

3. तीसरी बात कि खबर ये भी थी कि कल ही जस्टिस मुरलीधर को दिल्ली दंगों की सुनवाई से हटा दिया गया था.

4. चौथी बात कि जब भी सरकार किसी न्यायाधीश के तबादले का नोटिफिकेशन जारी करती है, तो नोटिस पीरियड की तरह ही कम से कम 1 हफ्ते या 10 दिन का वक्त तो देती ही है. लेकिन इस नोटिफिकेशन में किसी भी तारीख का जिक्र नहीं है. इसका अर्थ है कि जस्टिस मुरलीधर का तबादला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, बिना कुछ भी समय दिए.

आप इस पूरे वाकये पर चौकिए या मत चौकिए, लेकिन मैं पहले ही लिख चुका हूं, आपकी न्यायपालिका का शव बहुत पहले ही उठ चुका है, बस उसकी अर्थी आपके सामने आने की देरी है. आप करते रहिए इंतजार.

  • श्याम मीर सिंह

Read Also –

न्यायपालिका की अंतरात्मा ???
‘मेरी मौत हिंदुस्तान की न्यायिक और सियासती व्यवस्था पर एक बदनुमा दाग होगी’ – अफजल गुरु
मीडिया के बाद ‘न्यायपालिका’ का ‘शव’ भी आने के लिए तैयार है

इंसाफ केवल हथियार देती है, न्यायपालिका नहीं
‘अदालत एक ढकोसला है’
पहलू खान की मौत और भारतीय न्यायपालिका के ‘न्याय’ से सबक

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Tags: जस्टिस मुरलीधर
Previous Post

भीड़ हमेशा साहस से बहुत डरती है

Next Post

दिल्ली चुनाव का संदेश : लोक-सापेक्ष तंत्र ही धर्म-सापेक्ष तंत्र को परास्त कर सकता है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

दिल्ली चुनाव का संदेश : लोक-सापेक्ष तंत्र ही धर्म-सापेक्ष तंत्र को परास्त कर सकता है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आदिवासी जनकवि विनोद शंकर की चार कविताएं : क्रान्ति

January 26, 2024

ब्राह्मणवादी दुष्ट संघियों का दुष्प्रचार और महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक

January 15, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.