Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अच्छा हुआ वशिष्ठ बाबू चले गए

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 15, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अच्छा हुआ वशिष्ठ बाबू चले गए

अच्छा हुआ वशिष्ठ बाबू चले गए. वे रह कर भी क्या करते ? जिस देश और प्रदेश के लिए वे अमेरिका की शान ओ शौकत और नासा जैसी प्रतिष्ठित संस्थान की नौकरी छोड़कर आये थे, उस देश और प्रदेश ने उन्हें बहुत पहले छोड़ दिया था. जिस वशिष्ठ नारायण सिंह को अमेरिका के विद्वत समाज ने तलहथी पर बैठा कर रखा था, उसकी हमने कदर नहीं की. भले ही उन्होंने आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती दी हो, उनका दिमाग कम्प्यूटर को भी मात देने वाला क्यों न रह हो, विश्व के सबसे बड़े गणितज्ञ क्यों न रहे हों, हमें उससे क्या ?

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

नेताओं के जयकारे लगाना और बेईमान-शैतान के पीछे भागना जिस समाज की नियति हो, जहां हत्यारे और घोटालेबाजों के स्मारक बने हों, सरकारी संरक्षण में चलनेवाले बालिका गृहों में यौनाचार होता हो, सामूहिक नकल और सेटिंग से बच्चे टॉप करते हों, वहां डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह जैसे जीनियस की जरूरत ही क्या है ? उन्हें तो हमने जीते जी ही मार डाला था! न सरकार ने सुध लेने की जरूरत समझी न समाज को उनकी याद आई. हां, उनके मरने के बाद श्रद्धांजलि देनेवालों की बाढ़ आ गई है. दिल्ली से पटना तक शोक की बयार चलती दिख रही है.

वह तो भला हो न्यूज चैनलों का जिनके शोर मचाने पर सरकार को दायित्व बोध हुआ. देर से ही सही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजकीय सम्मान से वशिष्ठ बाबू के अंतिम संस्कार की घोषणा की और उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया. लेकिन नामी-गिरामी डॉक्टरों वाले पटना मेडिकल कालेज अस्पताल (PMCH) ने उन्हें अपमानित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. अपने चिर-परिचित अंदाज में इस महान गणितज्ञ के शव को बाहर सड़क पर ला छोड़ा. यह अस्पताल अपने इसी तरह के अमानवीय और क्रूर व्यवहार के लिए जाना जाता है. खबर दिखाए जाने के बाद एम्बुलेंस से लेकर सम्मान देने तक कि व्यवस्था हुई लेकिन तबतक पूरे देश में हमारी थू-थू हो चुकी थी. सच पूछिए तो हम इसी थू-थू के पात्र हैं.

नायकों की हम उपेक्षा करते हैं और खलनायकों के पीछे भागते हैं. यही हमारा चरित्र बन गया है. ऐसे समाज में जीवित रहकर भी वशिष्ठ बाबू क्या करते ?

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह, एक नजर में

  • 2 अप्रैल 1946 : जन्म.
  • 1958 : नेतरहाट की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान.
  • 1963 : हायर सेकेंड्री की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान.
  • 1964 : इनके लिए पटना विश्वविद्यालय का कानून बदला. सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला. बी.एस-सी.आनर्स में सर्वोच्च स्थान.
  • 8 सितंबर 1965 : बर्कले विश्वविद्यालय में आमंत्रण दाखिला.
  • 1966 : नासा में.
  • 1967 : कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का निदेशक.
  • 1969 : द पीस आफ स्पेस थ्योरी विषयक तहलका मचा देने वाला शोध पत्र (पी.एच-डी.) दाखिल.
  • बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें “जीनियसों का जीनियस” कहा.
  • 1971 : भारत वापस.
  • 1972-73: आइआइटी कानपुर में प्राध्यापक, टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च (ट्रांबे) तथा स्टैटिक्स इंस्टीट्यूट के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन.
  • 8 जुलाई 1973 : शादी.
  • जनवरी 1974 : विक्षिप्त, रांची के मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती.
  • 1978: सरकारी इलाज शुरू.
  • जून 1980 : सरकार द्वारा इलाज का पैसा बंद.
  • 1982 : डेविड अस्पताल में बंधक.
  • नौ अगस्त 1989 : गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता.
  • 7 फरवरी 1993 : डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर फेंके गए जूठन में खाना तलाशते मिले.
  • तब से रुक-रुक कर होती इलाज की सरकारी/प्राइवेट नौटंकी.
  • अक्टूबर 2019 : पीएमसीएच के आईसीयू में (ठीक होकर घर लौटे).
  • 14 नवंबर 2019 : निधन.

– रियाज वामी

Read Also –

मुफ्तखोर-अय्यास पूर्व-जनप्रतिनिधियों से कराहता भारत
वैज्ञानिक शोध : भारतीय मूर्ख होते हैं ?
कायरता और कुशिक्षा के बीच पनपते धार्मिक मूर्ख
युवा पीढ़ी को मानसिक गुलाम बनाने की संघी मोदी की साजिश बनाम अरविन्द केजरीवाल की उच्चस्तरीय शिक्षा नीति

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

नेहरु के जन्मदिन पर : भगत सिंह और नेहरु

Next Post

कुत्ते की मौत मर गये महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

कुत्ते की मौत मर गये महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

उड़ीसा में वेदांता के खिलाफ आंदोलन : पर्यावरण और सामाजिक न्याय की लड़ाई

December 11, 2024

शेखचिल्ली गपोड़ियों के विश्वगुरु !

November 4, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.