Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भाजपा अकेली इस देश की राजनीति तय कर रही है और लोगों को जेलों में डाल रही है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 8, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार

जी. एन. साईबाबा दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे. वे दलित हैं. पोलियो के कारण उनके दोनों पांव काम नहीं करते थे. व्हील चेयर पर रहते थे. उन्होंने आदिवासियों की जमीन छीनने और उनके दमन के खिलाफ लिखा, सभा में बोले. सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया और कहा – यह माओवादी समर्थक है और 2017 में उन्हें उम्र कैद की सजा दे दी गई.

उनके पास से कोई हथियार नहीं मिला, कोई सबूत नहीं मिला. कोई गवाह नहीं मिला जो यह साबित करता कि ये माओवादी हैं. निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील पेंडिंग पड़ी है. इस पर कोई फैसला तो क्या सुनवाई तक शुरू नहीं हुई है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

नियम से उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है ताकि मुकदमे का फैसला आने पर उन्हें सजा दी जा सके. उन्हें पैरोल दी जा सकती है लेकिन बार-बार उनकी जमानत और पैरोल की अर्जी ठुकरा दी जाती है.

उन्हें अंडा सेल में रखा गया है. यानी अकेले रखा गया है. चारों तरफ से बारिश का पानी, धूल मच्छर भीतर आता है. ऊपर टीन की छत है और नागपुर का गर्म मौसम. जैसे किसी जंतु को किसी प्रेशर कुकर में रखकर आप चूल्हे के ऊपर रख दे, वैसा हाल होता है. वे घिसट-घिसट कर लैट्रिन जाते हैं और वापस आते हैं. इस सब की वजह से उनका पहले बायां हाथ पैरालाइज हुआ, अब दायां हाथ भी 50% से ज्यादा लकवा ग्रस्त हो चुका है.

वे चम्मच से मुश्किल से खाना खा पाते हैं. हाथ कांपता रहता है. क्या इस देश के किसी दलित संगठन ने इस मामले पर आज तक कोई बयान कोई सार्वजनिक सभा कोई निंदा प्रस्ताव कोई विरोध प्रदर्शन किया है ? आखिर भाजपा दलितों पर अत्याचार करने में क्यों डरे ?जब उसे डराने वाला ही कोई नहीं है.

संजीव भट्ट आईपीएस ऑफिसर हैं. वह जेल में हैं. इस देश के आईपीएस ऑफिसर्स के किसी संगठन ने उसके विरोध में कोई प्रस्ताव भी पारित किया है क्या ? जज लोया की हत्या के खिलाफ भारत के जजों को कोई गुस्सा आया क्या और उन्होंने हत्यारे के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की कोई पहल की क्या ?

सुधा भारद्वाज, सुरेन्द्र गार्डिंग, अरुण फरेरा जैसे वकील जेलों में डाल दिए गए, क्या भारत के बार एसोसिएशन ने इसके खिलाफ कोई निंदा प्रस्ताव भी पारित किया क्या ? पत्रकार सिद्धिक कप्पन हाथरस बलात्कार की रिपोर्टिंग करने जा रहे थे. उनके ऊपर यूएपीए लगा दिया गया. दो साल हो गये सुप्रीम कोर्ट उन्हें जमानत नहीं दे रहा है. देश भर के पत्रकारों के किसी संगठन ने कोई कार्यक्रम इसके खिलाफ आयोजित किया क्या ?

देश में जो विपक्षी पार्टियां हैं, क्या उनको मालूम नहीं है कि यह सारे मुद्दे राजनीतिक मुद्दे हैं और इन पर उनको बोलना चाहिए, कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, विरोध प्रदर्शन करने चाहिए ? क्या चुनाव के समय सिर्फ भाजपा के खिलाफ बोलकर आप खुद को सत्ता में ला पाएंगे ?

भाजपा अकेली इस देश की राजनीति तय कर रही है. वह चाहती है कि सब लोग सिर्फ हिंदू मुसलमान पर बात करें तो सब उसी पर बात करते हैं. अगर इस देश की राजनीतिक पार्टियों के पास इतनी भी समझ नहीं है कि वह वैकल्पिक राजनीतिक चर्चा खड़ी कर सकें जिससे राजनीति बदले तो सत्ता में आने की इनकी क्या योग्यता है ?

भाजपा के अलावा बाकी की राजनीतिक पार्टियां चुनाव के समय ही जनता के बीच सक्रिय होती हैं लेकिन भाजपा के सहयोगी संगठन हमेशा सक्रिय रहते हैं. भाजपा ने सैंकड़ों संगठन बनाए हुए हैं. उसके पास हज़ारों सरस्वती शिशु मंदिर हैं. एकल विद्यालय हैं. शबरी विद्यालय हैं. आईएएस, आईपीएस की ट्रेनिंग के लिए संस्थान हैं. उसके पास फौजी ट्रेनिंग देने वाले भी संस्थान हैं.

भारत की किसी भी राजनीतिक पार्टी का एक भी स्कूल देश में चलता है क्या ? सभी पार्टियां तो सत्ता में रह चुकी हैं. आपने क्यों नहीं जनता के बीच ऐसे संस्थान खड़े किए जहां से आप की विचारधारा वाले बच्चे और नौजवान निकलते ?

आज भारत की बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीएसआर फन्ड का 90% से ज्यादा पैसा भाजपा, आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन ले रहे हैं. भाजपा को जिताने के लिए इन संगठनों संस्थानों में लाखों कार्यकर्ता दिन-रात काम कर रहे हैं. यह लोग हिंदू मुस्लिम वाली मानसिकता नफरत फैलाने वाली मानसिकता फैलाने के लिए ही काम करते हैं. और 5 साल बाद भाजपा के लिए चुनाव में जीतने का रास्ता बनाते हैं.

भाजपा का एक पन्ना प्रभारी होता है. नौकरियों से रिटायर्ड लोगों को इस काम में लगाया जाता है. वोटर लिस्ट के एक पन्ने पर जितने मतदाता होते हैं उन सब से वह संपर्क करता है. उनके घर जाता है, चाय पीता है, हिंदू संस्कृति पर कितना खतरा है, मुसलमान कितना बड़ा खतरा है, ऐसी डराने वाली फर्जी बातें करता है और चुनाव के समय भाजपा के लिए वोट डलवाता है.

भाजपा के अलावा किसी पार्टी ने कभी मतदाताओं से बिना चुनाव के संपर्क किया है ? यह विचार जयप्रकाश नारायण ने अपनी किताब में लिखा था, इसे उन्होंने मतदाता मंडल कहा था. बाकी किसी पार्टी ने उस पर अमल नहीं किया, भाजपा ने कर लिया. जिस दिन भाजपा की सरकार बनती है वे अगला चुनाव जीतने की रणनीतियां बनाने उस पर काम करने में लग जाते हैं.

याद कीजिए जब भाजपा विपक्ष में थी तो प्याज का रेट बढ़ने पर, गैस का रेट बढ़ने पर या पेट्रोल का रेट बढ़ने पर किस तरह यह लोग सड़कों पर उतर कर धरने प्रदर्शन करते थे, आज महंगाई बढ़ने पर या किसी भी मुद्दे पर आपको कोई राजनीतिक पार्टी सड़क पर दिखाई देती है क्या ? खाली भाजपा को दोष देने से आप चुनाव नहीं जीत पाएंगे.

रणनीति बनाइये, मेहनत कीजिए, सक्रिय बनिये, सड़क पर उतरिये, जनता के बीच जाइए. हमारी विपक्षी राजनीति की एक दिक्कत यह भी है कि आज ज्यादातर ऐसे नेता है जो वंश परंपरा के कारण अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख बने हुए हैं. जो भी हो इस हालत का नुकसान भारत के आदिवासी, दलित, मुसलमान, गरीब, नौकरी पेशा, मजदूर उठा रहे हैं. इनकी हालत सचमुच बहुत खराब है और इन पीड़ित तबकों को राजनीति बदलने का कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

केंद्र सरकार दिल्ली विधानसभा को समाप्त करने की योजना बना रही है ?

Next Post

सच के आंच पर कूड़े में बदलता ‘कश्मीर फाईल्स’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सच के आंच पर कूड़े में बदलता 'कश्मीर फाईल्स'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

युद्ध और शांति

October 18, 2023

अभिजीत बनर्जी : जनता के कठघरे में अखबारों, न्यूज चैनलों और वेब-मीडिया के पत्रकार

October 16, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.