चिता की अग्नि से सर्द मौसम में गर्मी ले रहे श्वान को पाप-पुण्य (भला-बुरा) स्वच्छता-गंदगी का कोई ख्याल नहीं रहता...
Read moreDetailsसुब्रतो चटर्जी की पांच कविताएं 1. मेरा आना मेरा आना एक बहस का आग़ाज़ था और ये बहस बेमानी नहीं...
Read moreDetails1. बुझी चिमनी बुझी चिमनी की कालिख़ बंट रही है जिसे लेना है अंजुरी भर ले जाओ इकहत्तर लाशों की...
Read moreDetailsमैं हैरान हूं कि औरत ने … (महादेवी वर्मा की कविता) मैं हैरान हूं यह सोचकर, किसी औरत ने क्यों...
Read moreDetailsउर्सुला सुनो उर्सुला हमें जीना ऐसे नहीं ऐसे था! बसाना था अपना एक मकांदो बेतरह! छींट देने थे एक मुट्ठी...
Read moreDetailsआप हिन्दू होकर नास्तिक हो सकते हैं वेद ईश्वर गीता का विरोध कर सकते हैं और नास्तिक होकर भी समाज...
Read moreDetailsऔरतें अक्सर झूठ बोलती हैं, झूठ बोलकर वे सखियों से मिल आती हैं, बेटी की मार्कशीट खोजने का दिखावा करती...
Read moreDetailsहरेक रोज़ हज़ारों मरेंगे हज़ारों चितायें जलेंगी हज़ारों बेघरों को आश्रय देगी श्मशान भूमि जलती हुई चिताओं के पास लेट...
Read moreDetailsकॉमरेड जीसस को लाल सलाम ! जीसस ने बचपन से बहुत आकर्षित किया चरवाहे के घर पैदा हुआ भेड़ें चराता...
Read moreDetailsअन्न पाणी त्याग थोड़ा-थोड़ा मरने से हुक्मरान की संवेदनाएं लौट आएंगी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है मैं हवा में बातें...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.