यहां पर कुछ समय बिताऊंगा तुम्हारे साथ काल के इस शिला खंड पर फ़ॉसिल बन कर उभरने तक पिघलता रहूंगा...
Read moreDetailsएक पेड़ है. पेड़ क्या, पेड़ के नाम पर बोन्साई है मगर उसी की लहर आई है. सब उसी के...
Read moreDetailsमेरा यह प्रेम-पत्र... मेरा यह प्रेम-पत्र तुम्हारी खूबसूरत नम आंखों तक पहुंचने से पहले न जाने कितने बिन पानी आंखों...
Read moreDetailsएक दिन हमसे पूछा जाएगा हम क्या कर रहे थे ? एक दिन हमसे पूछा जाएगा हमारी नींद कितनी गहरी...
Read moreDetailsकोई मौसम ऐसा भी आता है कितना भी सहेजें शब्दों में घुन लग जाता है ऊपर से सही सलामत दिखते...
Read moreDetailsमेरे हाथों में पड़ी मेरे कुत्ते की जीन पर खिंचाव बढ़ता जा रहा है मेरे कुत्ते को इस दौड़ में...
Read moreDetailsआईए शहर में मेरे मैं नहीं तो क्या मेरी गलियों में परछाईयां हैं मेरी उस साल की बारिश में धुली...
Read moreDetailsपूरा जेठ तप रहा है लू भी चल रहा है ऐसे समय में कोई भी नही निकलना चाहेगा अपने घर...
Read moreDetailsजिन लोगों ने कश्मीर से 370 खत्म कर दिया आज वे पूर्वोत्तर से 6वीं अनुसूची को खत्म कर देना चाहते...
Read moreDetailsचमत्कारों से घिरा पुरूष चमत्कारों से घिरा पुरूष उन दिनों पुरूष नहीं था महज एक इंसान था बाढ़, तूफान उसे...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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