अल-सल्वादोर के कम्युनिस्ट क्रांतिकारी कवि रोके दाल्तोन की छह कविताएं 1. जिस दिन गरीब लोग कानून बनायेंगे कानून बनते ही...
Read moreDetails1 श्रीलंका-जन विद्रोह एक विस्फोट की तरह है दुनिया भर की केन्द्रीय असैम्बलियों के लिए और बहरों को सुनाने के...
Read moreDetailsउठी हुई अंगुली : गिरफ्तार पत्रकार रुपेश कुमार सिंह शब्दों के बिस्फोट से ही जन्मा था ब्रह्मांड लाखों वर्षों से...
Read moreDetailsबैंक के कैस काउंटर से ही पीछे लग जाते हैं जेबकतरे सभ्यताओं के विकास क्रम में भी यही हुआ है...
Read moreDetailsये मलिन बस्ती ये मलिन बस्ती यहां पर हड्डियों के आदमी हैं पीर का स्थायी डेरा आह का है ये...
Read moreDetailsमैंने देखा साथियों को हत्यारों की जै मनाते मेरा घर नीलाम हुआ और डाक बोलने आये अपने ही दोस्त पहले...
Read moreDetailsआज कल राजा क्या खाता है ? मैंने राजा के रसोइए से पूछा. वैसे तो राजा की रेसिपी गुप्त होती...
Read moreDetailsमां तो मां ही होती है लेकिन एक दिन मां की एक पुरानी सहेली ने हमसे यूं ही कहा तुम्हारी...
Read moreDetailsधरती पर कुछ साम्राज्य थे जिनका राष्ट्रों पर अवैध कब्जा था. राष्ट्र लड़ रहे थे साम्राज्यवादियों के खिलाफ. राष्ट्र में...
Read moreDetailsअब बंद भी करो, बजाना झुनझुना, अपने वादों, अपनी बातों का, कब तक समझाऊं मन को, कबतक बहलाऊं दिल को,...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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