Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

छल-प्रपंच के आवरण में लिपटी आस्था का चुनावी ब्रह्मास्त्र

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 9, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
1
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

छल-प्रपंच के आवरण में लिपटी आस्था का चुनावी ब्रह्मास्त्र

छल-प्रपंच जनित आस्था को बड़ी खूबसूरत, आकर्षक और लोकलुभावन पैकिंग में लपेटा गया है. अब चुनावी इंद्रप्रस्थ के मैदान में लड़ाई आस्था के ब्रह्मास्त्र से लड़ी जाएगी. भारतीय जन मानस की आस्था भगवान राम के प्रति है, इस बात का सबूत भारतीय दर्शन में अवधारित “कण-कण में राम“ की परिकल्पना से मिलता है. पर छल-प्रपंच की लोकलुभावन पैकिंग में लिपटी आस्था राजनीति, धर्म और समाज के स्थापित ढांचों को गिरा कर धूल-धूसरित कर सकती है, इसका अनुमान तो किसी सत्यनिष्ठ आस्थावान को सपने में भी न रहा होगा.

साम, दाम, दण्ड, भेद के जनक चाणक्य की नीति में छल-प्रपंच का समावेश करने के लिए आस्था को छल-प्रपंच के आवरण में लपेट कर इस्तेमाल करने के प्रयोग की सफलता से राजनेता पस्त तो दिख रहे हैं, पर इसकी काट उनके लिए अभी दूर की कौड़ी ही बनी हुई है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

राजनीति की चाणक्य एकेडमी के शिक्षक जानते हैं कि राष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज पर छः दशकों से ज्यादा समय बाद बादल फाड़ कर निकले बीजेपी के सूर्य को ग्रहण लगाने की सामर्थ्य कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल में नहीं है, इसलिए उनका दुश्मन नम्बर एक वामपंथी नहीं कांग्रेस है.




एकेडमी के शिक्षक यह भी जानते हैं कि पुरुष मनु के शीर्ष पर बैठे ब्राह्मण और संहारक शस्त्रों को धारण करने वाली भुजाओं में सनातनी वैर है (परशुराम और हैहय वंशी क्षत्रिय) और पांव में बिठाए गए शूद्रों के प्रति स्वभाविक ब्राह्मणवादी दृष्टिकोण के चलते वणिक जंघा से संतोष करने तक सीमित रहने के कारण ही बीजेपी को संसद में दो सदस्यों की हैसियत तक गिरा दिया था.

बीजेपी को पूर्ण बहुमत तक पहुंचाने के ताने-बाने बुनने में नौ दशकों से सिर खपा रही चाणक्य एकेडमी को देर से ही सही 2014 आते-आते समझ आ गया कि जिन हथियारों का इस्तेमाल कर गांधी ने देश की सत्ता अंग्रेजों से कांग्रेस को हस्तांतरित करा दी थी; उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल कर देश की सत्ता से कांग्रेस को बेदखल करके उस पर कब्जा किया जा सकता है और उसने वैसा करके दिखा दिया.

गांधी की सीमित आलोचना और डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रति पूर्ण आत्म-समर्पण को एकेडमी ने और उसके निर्देश पर बीजेपी ने अपनी नीति में अंगीकृत कर लिया. अब पिछडा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दे के तथा राष्ट्रीय मुस्लिम मंच को आबाद कर एकेडमी ने अपनी कुरूपता को दूर करने का काम शुरू कर दिया है. ईसाई मिशनरियों के पांव उखाड़ने के उद्देश्य से हनुमान की वंशज जनजातियों यानी वनवासियों-आदिवासियों के बीच, तो वह शुरू से ही काम कर रही थी.




अब तक के विश्लेषण से पाठकों के मन में यह भ्रम पैदा होना स्वाभाविक जान पड़ता है, कि मनुवादी एकेडमी के शिक्षकों की मानसिकता में कोई बड़ा परिवर्तन हो गया है, इसे भी दूर करना जरूरी है. परिवर्तन तो निश्चित हुआ है पर इस परिवर्तन को “छल-प्रपंच“ ही कहना उचित होगा, जिसे सत्ता पाने और फिर बने रहने की तीव्र लालसा के चलते एकेडमी ने अपने सिलेबस में शामिल कर लिया है.

छल-प्रपंच जनित आस्था को बड़ी खूबसूरत, आकर्षक और लोकलुभावन पैकिंग में लपेटा गया है. अब चुनावी इंद्रप्रस्थ के मैदान में लड़ाई आस्था के ब्रह्मास्त्र से लड़ी जाएगी. भारतीय जन मानस की आस्था भगवान राम के प्रति है, इस बात का सबूत भारतीय दर्शन में अवधारित “कण-कण में राम“ की परिकल्पना से मिलता है. पर छल-प्रपंच की लोकलुभावन पैकिंग में लिपटी आस्था राजनीति, धर्म और समाज के स्थापित ढांचों को गिरा कर धूल-धूसरित कर सकती है, इसका अनुमान तो किसी सत्यनिष्ठ आस्थावान को सपने में भी न रहा होगा.

राजनीति, धर्म और समाज के स्थापित ढांचे के गिरने से कांग्रेस ही अकेली हैरत में नहीं हैं सभी राजनैतिक पार्टियां हैं. कांग्रेस हैरत और सदमें दोनों में है. सदमें में इसलिए क़ि उसकी स्थिति “रानी से भिखारन“ वाली बन गयी है. अन्य बहुत से दल तो अपने दोने में सत्ता के ठाकुर के प्रसाद की थोड़ी या ज्यादा नुक्ती प्राप्त कर के संतुष्ट हो जाएंगे, पर कांग्रेस ? कांग्रेस जो खुद प्रसाद की नुक्ती बांटती रही है, कैसे खुद को संतुष्ट करे ?




“हरि को भजे सो हरि का होई“ की सनातन भारतीय परंपरा में एकेडमी ने बड़ा परिवर्तन कर दिया है. इस परिवर्तन के अनुसार अब हरि भजन करने से पहले भगवा-ध्वज को प्रणाम करने वालों को ही हरी-दर्शन देंगे; जैसी बाध्यता का अध्याय जोड़ दिया गया है.

भगवा ध्वज को प्रणाम करे बिना, हरी में अपनी आस्था के वशीभूत मन्दिर जाने या किसी प्रकार के अनुष्ठान करने वाले कांग्रेसी नेताओं का उपहास उड़ाने और इसे नौटंकी करार देने और तरह-तरह के बेतुके सवाल उठाने वालों की उन्मादी भीड़ है, जिसे खुद आस्था के सिर-पैर का पता नहीं है, लेकिन वे इस आत्मविश्वास से लबरेज हैं कि उनके उन्मादी कृत्य राज-काज का अंग हैं.

सिक्के के दो पहलुओं की तरह इस चाणक्य एकेडमी के भी दो पहलू, चेहरे, और मुंह है. एक यानी राजनैतिक पहलू, जिसका अति संक्षिप्त वर्णन ऊपर किया गया है. दूसरा पहलू, देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में संचालित सेवा प्रकल्पों की बड़ी संख्या है. इन हजारों प्रकल्पों में विविध कार्यों से जुड़े लाखों कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है, जो गुमनामी में रहकर पूर्ण समर्पण भाव के साथ दी गयी जिम्मेदारी को निभाते रहते हैं.




देश में एक भी राजनैतिक दल ऐसा नहीं जिससे जुड़ी संस्थाएं सेवा के क्षेत्र में इस तरह के प्रकल्प चलाती हों और उन प्रकल्पों से जुड़े कार्यकर्ताओं की संख्या चाणक्य एकेडमी का दशांश ही मुकाबिल हो. कम-से-कम पिछले तीस वर्षों से सक्रिय राजनीति कर रहे दल क्यों इस ओर आंख मीचे रहे ? इसके लिए वे खुद ही जिम्मेदार हैं. यही कारण है, बीजेपी को हराने के लिए किसी भी दल को अपने ऊपर भरोसा नहीं है. सभी खास तौर पर कांग्रेस आमजन का बीजेपी से मोहभंग होने पर आस लगाए बैठी है (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़).

ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी के प्रति आमजन का मोह भंग नहीं हुआ है. निश्चित हुआ है, पर उसकी भरपाई आस्था के छल-प्रपंच से कर लेगी ऐसा उसे भरोसा है.

  • विनय ओसवाल
    वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक

Read Also –

हिन्दुत्व की भागवत कथा और हिन्दुस्तान का सच
अयोध्या भारत की साझी विरासत
कांग्रेस और भाजपा एक सिक्के के दो पहलू




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Tags: विनय ओसवाल
Previous Post

हिन्दुत्व की भागवत कथा और हिन्दुस्तान का सच

Next Post

लुम्पेन की सत्ता का ऑक्टोपस

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

लुम्पेन की सत्ता का ऑक्टोपस

Comments 1

  1. Subroto Chatterjee says:
    8 years ago

    पूँजीवादी क्राईसिस को रेखांकित करता एक सशक्त, तथ्यपरक लेख

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

खुशहाल मध्यवर्ग का विश्वासघात

November 11, 2022

कोराना संकट : विश्व बाजार व्यवस्था पर विमर्श की खुलती खिड़कियां

April 21, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.