Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

देश तबाह होता है तो होता रहे, हमारी बला से !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 22, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

देश तबाह होता है तो होता रहे, हमारी बला से !

गुरूचरण सिंह

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

हमारी बला से. देश तबाह होता है तो होता रहे, हमारी बला से !
अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ गई है, हमारी बला से !
पांच साल में चार करोड़ लोगों का रोज़गार छिन गया है, हमारी बला से !
तीन करोड़ लोग रोज भूखे या अधभरे पेट के साथ सोते हैं तो सोते रहें न, हमारी बला से !
हमारा घर परिवार तो ठीक से चल रहा है न !!
थोड़ी मुश्किल जरूर है, मुसलमानों को सबक तो सिखाया जा ही रहा है न !!

ऐसी ही बातें सुनने को मिलती हैं हमें अपने आस पास. खास कर उन इलाकों में जहां पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान) से विस्थापित हुए लोग बसे हुए हैं. जिन रिफ्यूजी कालोनियों में केवल एक कमरा रसोई ही बना कर दी गई थी काम चलाने के लिए, वे सभी घर सरकारी जमीन पर पैर पसारते पसारते 20-25 कमरों की इकाई में बन चुके हैं, पंचमंजली इमारतों में तब्दील हो चुके हैं, कुछ बेच दिए, कुछ किराए पर दिए जाते हैं. यही रिफ्यूजी कालोनियां अब दिल्ली के पॉश इलाके बन चुके हैं, एक-एक घर के सामने कम से कम दो-दो गाडियां पार्क होती हैं और बाकी कारें तीन चौथाई सड़क को घेर कर खड़ी रहती हैं.

इनके साथ-साथ सरकार के और भी जो अंधभक्त हैं, जरा ध्यान से देखिएगा उन्हें और उनकी जीवन शैली को. लगभग सभी लोग आपको काला बाजारी करने वाले, चीन आदि से स्मगल किया समान बेचने वाले, घर में दुकान बना कर समान बेचने वाले, अनाज समेत बाकी चीजों मे मिलावट कर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले, कर्मचारियों को रिश्वत दे बिजली पानी की चोरी करने वाले, जुआड़ी, निकम्में, गुण्डागर्दी, पुलिस की मुखबिरी करने वाले, हमेशा ट्रैफिक में उल्टी लेन में चलकर सिपाही पर धौंस जमाने वाले, सरकारी ठेके लेने वाले और न जाने कितने ही तरह के गलत काम करने वाले मिल जाएंगे. चूंकि गलत काम किए बिना इनका चलता ही नहीं है, इसलिए ऐसे लोग डर के साए में ही जिंदा रहने को अभिशप्त हैं और यही वजह है कि सरकार के साथ खड़े रहना उनकी मज़बूरी है.

कल दूसरी किसी सरकार के आ जाने पर उसके साथ भी ये लोग अपना यही किरदार निभाते हुए मिल जाएंगे. आपको अच्छा लगे या नहीं, सच तो यही है कि हमारे मध्यवर्ग का यही स्वरूप है. पूरी तरह से वैयक्तिक सोच है उसकी, आर्थिक कामयाबी को सीढ़ी बना कर सामाजिक हैसियत पाना ही उसका एकमात्र लक्ष्य है. इसी मकसद को छिपाए रखने के अपने ही तर्क और औचित्य गढ़ लिए हैं उसने – अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता !! ‘अपना काम’ बनाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं ये लोग !

खैर,अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने वर्ष 2019 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटा कर 4.8% कर दिया है. IMF ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच का सालाना शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए यह बताया है.

अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार ने सीएमआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए अपने एक लेख में खुलासा किया है कि इन पांच साल के दौरान कर्मचारियों की संख्या 45 करोड़ से घट कर 40 करोड़ रह गई है लेकिन कर्मचारियों की संख्या घटना तो असल में एक लक्षण भर है, लगातार बद से बदतर होती अर्थव्यवस्था का, समुद्र में तैरते बर्फ के पहाड़ का दिखने वाला हिस्सा भर है यह तो.

ये आंकड़े तो केवल छ: फीसदी क्षेत्र के आंकड़े हैं जो संगठित है. 96% असंगठित क्षेत्र तो कभी नजर आता ही नहीं जब तक आप खुद भुक्तभोगी न हों. यही क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, पहले नोटबंदी से, फिर जीएसटी से और फिर लगातार सरकारी कैंची की जद में आती सार्वजनिक कम्पनियों से, उनके लिए काम करते लघु व कुटीर उद्योगों के बंद होने से.

केवल 63 लोगों के कारोबार का आकार देश के बजट से भी ज्यादा है, लोगों को इलाज दवाई नहीं मिल रही, शिक्षा तो बस कुलीन वर्ग और सरकारी माल को अपना समझ कर लूटते मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए ही आरक्षित हो गई है लेकिन हमें क्या ? हमें तो हिंदू-मुसलमान का कीर्तन करना है, मंदिर-मस्जिद बनाने हैं !

Read Also –

प्रोफेसर एसएआर गिलानी : बहुत जरूरी है कि उन्हें याद रखा जाए
‘मेरी मौत हिंदुस्तान की न्यायिक और सियासती व्यवस्था पर एक बदनुमा दाग होगी’ – अफजल गुरु
सारागढ़ी, कोरेगांव और राष्ट्रीयता
रोहित वेमुला का आख़िरी पत्र : ‘मेरा जन्म एक भयंकर हादसा था’
NRC-CAA : ब्राह्मण विदेशी हैं ?
देशद्रोह बनाम देशप्रेम 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

नागरिकता कानून : समर्थन और विरोध

Next Post

दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

यातायात नियमों के नाम पर सरकार का तुगलकी फरमान

January 3, 2018

मोदी जी, मेहरबानी करके अब आप हट जाइये – अरुंधति रॉय

May 7, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.