Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सिंधु घाटी बनाम हिन्दू घाटी…और नाककटा दाढ़ीवाला

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 15, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
सिंधु घाटी बनाम हिन्दू घाटी...और नाककटा दाढ़ीवाला
सिंधु घाटी बनाम हिन्दू घाटी…और नाककटा दाढ़ीवाला
मनीष सिंह

तो पहले बताइये कि सिंधु घाटी के अवशेषों को जब आपने बचपन में पढ़ा, तो क्या समझा था ? आपने सवाल भी परीक्षा में हल किया होगा- सिंधु घाटी के शहरों के प्रमुख गुण बताइये.

उत्तर लिखा- यहां अन्न के गोदाम थे, बंदरगाह थे, समकोण पर काटती सड़कें, उनके किनारे दोनों तरफ जल निकासी की नाली, स्नानागार थे, बाजार थे, प्रशासनिक शहर अलग था, सीलें थी, नर्तकियां थी, बैलगाड़ी थी.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

तो क्या सिंधु घाटी सभ्यता बड़े-बड़े गांव की सभ्यता थी ??

शहरीकरण एक सभ्यता का पिनाकल है- सबसे उत्कृष्ट फल. शहर का मलतब आसपास के गांवों का एक केंद्र, जो आसपास के गांव, बस्तियों, दस्तकारों और खेतों की उपज का एक्सचेंज करने वाला इंटरफेस.

शहर में खेत नहीं होते. तब फैक्ट्री नहीं होती थी. सब कुछ आसपास के गांवों से आता. यहां भंडारण होता, बल्किंग और ग्रेडिंग होती. देश विदेश भेजा जाता. याने सिर्फ शहर नहीं, आसपास बडी मात्रा में गांव बसे थे, पूरी व्यवस्था थी. गांव के अवशेष खत्म हो जाते हैं. शहरों के अवशेष रह गए.

सील बताती है कि हुंडी, याने बैंकिंग सिस्टम चलता था. व्यापार पर चुंगी दी जाती याने, सिटी की एक गवरमेंट थी. ऑर्गनाइज्ड शहर बताते हैं कि बसाने वाले आर्किटेक्चर समझते थे. जल जनित रोग और स्वास्थ्य से वाकिफ थे. सामूहिक स्नानागार सोशल मीडिया थे, जहां लोग पानी मे डूबे गपियाते थे. जाहिर है यह निर्माण निजी नहीं होगा, तो सरकार का ध्यान वेलफेयर पर था.

तकरीबन सभी शहरों में ईंटों का आकार एक जैसा है. यानी, कोई सेंट्रल गवरमेंट भी थी. ये जो बंदरगाह थे, वे नदियों के पास थे, याने नहर खोदकर विशाल तालाब और उसके किनारों पर बंदरगाह बनाने की विद्या, तकनीक, फाइनांस और गवर्मेंट मौजूद थे.

इस तरह आधुनिक युग में, आप जो वेलफेयर गवरनेन्स से अपेक्षा करते हैं, वह सब कुछ सिंधु घाटी सभ्यता में दिखता है. तो मान लीजिये दुनिया जब कांसे और पत्थर से जूझ रही थी, भारत में एक पूरा विकसित देश मौजूद था. इसके बाद एकाएक …सब कुछ नष्ट हो जाता है. गायब…!

2

इतिहास फिर से शुरू होता है. एक नया भारत बनता है, जहां सोसायटी प्रिमिटिव स्टेज में जा चुकी है. गौ पूजा, यज्ञ हवन (ऋग्वेद), जादू-टोना (अथर्ववेद) में लौट गई. इनमें जंगल में बसने वाले छोटे-छोटे कबीलों, उनकी बेसिक मिनिमल लाइफ का विवरण मिलता है.

सभ्यता यहां से वह फिर जीरो से शुरू करती है. ग्राम, विश्, जन, जनपद, महाजनपद … कोई एक हजार साल बाद एक ऑर्गनाइज्ड नगर मिलता है. बिम्बिसार का लड़का उदायिन, मगध के करीब नई राजधानी बसाता है – राजगृह

ऐसा क्या हुआ, जो भारत की सभ्यता एकाएक गायब हो जाती है ? जिस जगह पर वह थी, उसी बिंदु पर लौटने में एक हजार साल लगते हैं ?

3

सिंधु घाटी सभ्यता में एक दाढ़ी वाले की तस्वीर मिली है. उसकी नाक कटी हुई है. हो न हो, मुझे लगता है कि इस आदमी ने ही जरूर कुछ गड़बड़ की होगी.

कोई लिखित प्रमाण तो नहीं, मगर इतिहास अगर भविष्य की झलक देता है, तो वर्तमान से भी इतिहास की झलक देखी जा सकती है. आखिर तीन हजार साल बाद भी एक दाढ़ी वाले को हिन्दू सभ्यता का नाश करते देख ही रहे हैं.

तो सिंधु सभ्यता में ऐसा क्यों नहीं हो सकता ? दो हजार साल बाद भारत की खुदाई से बन्द पड़े कारखाने, खाली गोदाम, बेतरतीब विशाल शहर, और ऑक्सीजन के अभाव में मरे लोगों के कंकाल से भरे मन्दिर और राजप्रासाद मिलेंगे, तो उसके साथ एक दाढ़ी वाले की अनगिनत तस्वीरे भी मिलेंगी – मोर को दाना खिलाते हुए…!

तब इतिहासकारों के सामने प्रश्न होगा, ये कौन सी सभ्यता है ?? सिंधु सभ्यता या हिन्दू सभ्यता !!!

Read Also –

राखीगढ़ी : अतीत का वर्तमान को जवाब
1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ ‘हिन्दू-धर्म’ शब्द
ब्राह्मणवादी दुष्ट संघियों का दुष्प्रचार और महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

स्तालिन : ‘डॉकुमेंट इंतज़ार कर सकता है, भूख इंतज़ार नहीं कर सकती.’

Next Post

प्रेम की बायोकेमिस्ट्री और उसका प्रोटोकॉल…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

प्रेम की बायोकेमिस्ट्री और उसका प्रोटोकॉल...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

तीन कृषि कानून : क्या ये कानून सिर्फ किसानों के बारे में है ?

September 12, 2021

गिरफ्तार दलित मानवाधि‍कार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करो

June 9, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.