Saturday, September 12, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ ‘हिन्दू-धर्म’ शब्द

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 6, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ हिन्दू धर्म शब्द, ब्राह्मण नहीं हैं इस देश का निवासी. तुलसीदास ने रामचरित मानस मुगलकाल में लिखी, पर मुगलों की बुराई में एक भी चौपाई नही लिखी ? क्यों ? क्या उस समय हिंदू-मुसलमान का मामला नहीं था ? हां, उस समय हिंदू-मुसलमान का मामला नहीं था क्योंकि उस समय हिंदू नाम का कोई धर्म ही नहीं था

तो फिर उस समय कौन-सा धर्म था ?

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

उस समय ब्राह्मण धर्म था और ब्राह्मण मुगलों के साथ मिल-जुल कर, यहां तक कि आपस में रिश्तेदार बनकर भारत पर राज कर रहे थे. उस समय वर्ण व्यवस्था थी. वर्ण व्यवस्था में शुद्र अधिकार से वंचित था. उसे कार्य सिर्फ सेवा भावना से करना था, मतलब सीधे शब्दों में गुलाम था.





तो फिर हिंदू नाम का धर्म कब से आया ? 

ब्राह्मण धर्म का नया नाम हिंदू तब आया जब वयस्क मताधिकार का मामला आया. जब इंग्लैंड में वयस्क मताधिकार का कानून लागू हुआ और इसको भारत में भी लागू करने की बात हुई. इसी पर तिलक ने बोला, “ये तेली-तम्बोली संसद में जा कर तेल बेचेगा क्या ?? इसलिए स्वराज इनका नहीं मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है.”

हिन्दू शब्द का प्रयोग पहली बार 1918 में इस्तेमाल किया गया. तो ब्राह्मण धर्म खतरे में पड गया ? क्यों ? क्योंकि भारत में उस समय अंगरेजों का राज था. वहां वयस्क मताधिकार लागू हुआ तो फिर भारत में तो होना ही था.

ब्राह्मण 3.5% है. अल्पसंख्यक है. राज कैसे करेगा ?

ब्राह्मण धर्म के सारे ग्रन्थ शुद्रों के विरोध में मतलब हक-अधिकार छिनने के लिए, शुद्रों की मानसिकता बनाने के लिए, षड्यंत्र के रूप में आज का ओबीसी ही ब्राह्मण धर्म का शुद्र है. अनुसूचित जाति के लोगों को तो अछूत घोषित कर वर्ण व्यवस्था से बाहर रखा क्योंकि उन्होंने ही युरेशियन आर्यों से सबसे ज्यादा संघर्ष किया था.




अनुसूचित जनजाति के लोग तो जंगलों में थे. उनसे ब्राह्मण धर्म को क्या खतरा ? उनको तो युरेशियन आर्यों के सिंधु घाटी सभ्यता से संघर्ष के समय से ही वन में जाने और रहने को मजबूर कर दिया. उनको वनवासी कह दिया. इसलिए ब्राह्मणों ने षड्यंत्र से हिंदू शब्द का इस्तेमाल किया, जिससे सबको समानता का अहसास हो परन्तु, ब्राह्मणों ने समाज में व्यवस्था ब्राह्मण धर्म की ही रखी. उसमें जातियां रखी. जातियां ब्राह्मण धर्म का प्राण तत्व है, इसके बिना ब्राह्मण का वर्चस्व खत्म है इसलिए उस समय हिंदू-मुसलमान की समस्या नहीं थी. ब्राह्मण धर्म को जिंदा रखने के लिए वर्ण व्यवस्था थी. उसमें शुद्रों को गुलाम रखना था इसलिए तुलसीदास जी ने मुसलमानों के विरोध में नहीं, शुद्रों के विरोध में, गुलाम बनाए रखने के लिए लिखा –

ढोल गवार शुद्र पशु नारी
सकल ताडन के अधिकारी





अब जब मुगल चले गये देश में एससी, एसटी, ओबीसी के लोग ब्राह्मण धर्म के विरोध में, ब्राह्मण धर्म के अन्याय-अत्याचार से दुखी होकर इस्लाम अपना लिया तो ब्राह्मण अगर मुसलमानों के विरोध में जाकर षड्यंत्र नहीं करेगा तो एससी, एसटी, ओबीसी के लोगों को प्रतिक्रिया से हिंदू बना कर बहुसंख्यक लोगों का हिंदू के नाम पर ध्रुवीकरण करके, अल्पसंख्यक ब्राह्मण बहुसंख्यक बनकर राज कैसे करेगा ? इसलिए आज हिंदू-मुसलमान की समस्या देश में खडी की गई.

तथाकथित हिंदू (एससी, एसटी, ओबीसी), मुसलमान से लडे, तथाकथित हिंदू (एससी, एसटी, ओबीसी) मरे या मुस्लिम दोनों तरफ मूलनिवासी का मरना तय है. क्या कभी सुना है की किसी दंगे में कोई ब्राह्मण मरा है ? जहर घोलने वाले कभी जहर नहीं पीते हैं. इसलिए, युरेशियन सेफ का सेफ, कोई दर्द नहीं, कोई फर्क नहीं, आराम से टीवी में डिबेट को तैयार.




Read Also –

भाजपा का सारा कुनबा ही निर्लज्ज और हिन्दू संस्कृति विरोधी है
इतिहास से नफरत और नफरत की राजनीति !
आरएसएस और भाजपा का “रावण”
माया से बाहर निकलो और धर्म के लिए वोट करो क्योंकि हिन्दुराज में हिंदुत्व ही खतरे में है … !
ब्राह्मणवाद को इस देश से समाप्त कर डालो !
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Tags: हिन्दू धर्म शब्द
Previous Post

बलात्कार एक सनातनी परम्परा

Next Post

हिन्दुत्व की भागवत कथा और हिन्दुस्तान का सच

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

हिन्दुत्व की भागवत कथा और हिन्दुस्तान का सच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘स्तन क्लॉथ’ : अमानवीय लज्जाजनक प्रथा के खिलाफ आंदोलन

November 22, 2018

रजनी पाम दत्त और फासीवाद

July 31, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.