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कहीं खोरी गांव ही तो भविष्य नहीं है देशवासियों का ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 15, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
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कहीं खोरी गांव ही तो भविष्य नहीं है देशवासियों का ?

खोरी गांव जिसमें 10 हजार घर और 1 लाख की आबादी है, उसे आज बिना बताये अचानक से तोडना शुरू कर दिया गया. ये वे लोग हैं, जो कुछ दशक पहले भारत से इंडिया एक उम्मीद से आये थे कि उनका न सही, उनके बच्चों का भविष्य शायद बन जाए.

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ये वे खुशनसीब लोग थे, जो दिल्ली एनसीआर में रोजी रोटी का कोई स्थायी जुगाड़ कर पाने में सफल रहे थे, और इनके साथी असफल मित्र रिश्तेदार इनसे रश्क करते थे कि इन्होंने अपना आशियाना दिल्ली एनसीआर में बना लिया, और उन्हें वापस गांव या किराए पर झुग्गी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

इनमें से कई हजार लोगों ने अपने गांव की छोटी-सी जमीन, पत्नी के गहने आदि बेचकर दो चार लाख का जुगाड़ कर, भू-माफियाओं के हाथ में एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए पैसे रखे थे. ये पैसे कट मनी के रूप में इलाके के सिपाही, दरोगा, लेखपाल, जंगलात वालों और स्थानीय नेता, विधायक के खाते में गए होंगे.

आज इन पर सुप्रीम कोर्ट की नजरें इनायत क्या हुई, इन तमाम लोगों ने मुंह फेर लिया और ज्यादा चीखने चिल्लाने पर वह सब तोड़ा जा रहा है, जिसे देख इनका कलेजा मुंह को आता है. हमारा आपका नहीं, क्योंकि अभी हम इस मार से बचे हुए हैं. नंबर सबका आने वाला है, ये तय है.
बब्बा जी का प्रसाद सबमें बंटेगा, आज सब्र कर कल मिलेगा. लाइन में लग.

अभी तो सरकार के पास विकास के तमाम विकल्प खुले हैं, प्रॉपर्टी टैक्स से लेकर पानी को कॉर्पोरेट को बेच देने तक. आपको असल में ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर हमेशा साथ रखना होगा. अभी तो आप देखते जाओ विकास यात्रा को.

कोई भी इंसान इस तर्क को नहीं समझा सकता कि यही सरकार छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के संरक्षित वनों में कोयला खदान के क्लीयरेंस के लिए अध्यादेश कैसे ले आती है, और वहां के वर्षा वनों को अंधाधुंध तरीके से काट दिया जाता है. आप हैरत में पड़ जायेंगे, जहां ये वन काटे जा रहे हैं, वहीं से इस दिल्ली के दो करोड़ लोगों के घर, ऑफिस में बिजली पहुंचाई जाती है, उनकी कीमत पर.

लेकिन वे लोग जब इन महानगरों में पीड़ित होकर एक टुकड़ा जमीन खरीद लेते हैं, तो उन्हें प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के अपराध में मार पीटकर हमीं सभ्य लोग तमाम सभ्यता के औजारों से उजाड़ देते हैं. न उनके लिए जंगल बचे, न शहरों में आश्रय ? तो क्या एकमात्र उपाय उनके लिए आत्महत्या ही बचा है ?

यही है दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जिसे एक लेखक ने दुनिया का सबसे बड़ा खोखला लोकतंत्र कह दिया है, जिसे आज सारी दुनिया पहचानने लगी है. लेकिन शायद हमीं सबसे बड़े ठस्स किस्म के इन्सान हैं, जिसे ये सब नहीं दिख पा रहा है ?

खोरी गांव आंदोलन का ताजा अपडेट

जनता के संघर्ष के बावजूद कल खोरी में प्रशासन द्वारा लगभग 300 घरों को तोड़ दिया गया. आज फिर भारी संख्या में जनता अपने घरों को बचाने के लिए सुबह से ही इकट्ठा हुई है. अभी सूचना मिली है कि पुलिस इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नितेश, DSU के साथी प्रभाकर और बिगुल के सार्थक को गिरफ्तार कर सूरजकुंड थाने ले गई है. न्यायप्रिय जनता से अपील है कि वो खोरी की जनता के आवासों को बचाने और गिरफ्तार साथियों की रिहाई के लिए हर संभव कोशिश करें.

  • रविन्द्र पटवाल

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