Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कविता कृष्णन भाकपा माले (लिबरेशन) का अवसरवादी पतनशील चेहरा है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 8, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कविता कृष्णन भाकपा माले (लिबरेशन) का अवसरवादी पतनशील चेहरा है ?
कविता कृष्णन भाकपा माले (लिबरेशन) का अवसरवादी पतनशील चेहरा है ?

भाकपा माले (लिबरेशन) की पोलित ब्यूरो सदस्य रहीं कविता कृष्णन ने हाल ही में अपनी पार्टी के सभी महत्वपूर्ण पदों से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि ‘कम्युनिस्ट शासन प्रणाली से मेरी कुछ गंभीर राजनीतिक असहमतियां हैं, पार्टी में रहते हुए उस पर खुलकर अपनी बात रखने में मुझे परेशानी आ रही है.’

हालांकि पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देने से पहले ही (अभी उन्होंने पार्टी की आम सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है) उन्होंने विश्व कम्युनिस्ट आंदोलन के मार्गदर्शक नेता और सिद्धांतकार स्तालिन और तत्कालीन सोवियत समाजवादी शासन प्रणाली को साम्राज्यवादी व सबसे खराब अधिनायकवादी व्यवस्था बताते हुए हमला शुरू कर दिया था.

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उन्होंने स्तालिन को एक साम्राज्यवादी, तानाशाह और यूक्रेन के किसानों का हत्यारा बताया था, जिसके बाद से कम्युनिस्ट क्रांतिकारी हलकों में उनकी तीखी आलोचना हुई थी. बावजूद इसके सीपीआई (एमएल) लिबरेशन की ओर से आधिकारिक तौर पर न तो इसकी निंदा की गई और न ही उन पर कोई कार्रवाई की गई, जिससे मालूम पड़ता है कि पार्टी के भीतर भी भयानक अवसरवाद हावी है.

कविता कृष्णन के वैचारिक-राजनीतिक पतन को सीपीआई माले लिबरेशन के संशोधनवाद से अलग करके नहीं देखा जा सकता. इस पार्टी में कोई सैद्धांतिक दृढ़ता अभी भी शेष बची है, ऐसा कह पाना नादानी होगी क्योंकि क्रांति का एजेंडा इन्होंने कब का छोड़ दिया है.

दरसल रूस-यूक्रेन युद्ध के समय से ही कविता कृष्णन अमेरिकी पाले में खेलने लगी थीं और इस यूद्ध को उकसाने वाली घृणित कार्रवाई करने वाले अमेरिका व नाटो के खिलाफ इन्होंने बोलना उचित नहीं समझा. वर्तमान साम्राज्यवादी रूस के खिलाफ बोलने के बहाने स्तालिन व सोवियत संघ विरोधी अमेरिकी दुष्प्रचार में शामिल हो गईं.

खुद को ‘उदार बुर्जुआ जनतंत्र’ का हिमायती बताते हुए भी वो अभी भी खुद को मार्क्सवादी बता रही हैं जबकि मार्क्स-एंगेल्स ने ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वर्ग विभाजित समाज में कोई राज व्यवस्था अंततः एक वर्ग की तानाशाही होती है, मुखौटा भले ही वो ‘लोकतंत्र’ का लगा ले. बुर्जुआ डेमोक्रेसी भी बुर्जुआ वर्ग की खुली या छुपी तानाशाही ही होती है.

विश्व में बुर्जुआ डेमोक्रेसी और मानवाधिकारों के सबसे बड़े झंडाबरदार अमेरिका के खूनी साम्राज्यवादी हमलों और जनसंहारों से पिछली सदी और इस सदी के दोनों दशक लहूलुहान पड़े हुए हैं. खुद अमेरिका के अंदर भयानक आर्थिक व सामाजिक असमानता व्याप्त है. काले और गोर का भेद व्याप्त है. वहां की पूरी मीडिया चंद पूंजीपतियों के नियंत्रण में है.

बड़े शर्म की बात है कि यह सब जानते हुए भी कविता कृष्णन बुर्जुआ डेमोक्रेसी की वकालत कर रही हैं. ऐसा नहीं है कि मार्क्सवाद-लेनिनवाद की सच्चाई से वो वाकिफ नहीं हैं, यह उनका सचेतन पतन है. यही वजह है कि आज जब कम्युनिस्ट आंदोलन बैकफुट पर है व पूंजी नंगी होकर दुनिया भर में फासीवादी रास्ते अपना रही है वो भी ‘डेमोक्रेसी’ की आड़ लेकर, तब वो उस पर हमला करने की बजाय स्तालिन, माओ और अतीत की कम्युनिस्ट शासन व्यवस्थाओं को अपना निशाना बना रही हैं.

उस स्तालिन को निशाना बना रही हैं जिसके नेतृत्व में आक्रामक व हमलावर फासीवाद के खूनी पंजे से दुनिया को बचाया गया और उसका कब्र खोदा गया. सीपीआई (एमएल) लिबरेशन उनकी आलोचना करने व उन पर कार्रवाई करने की जगह उनके बचाव की मुद्रा में खड़ा है. खैर आने वाले समय में उनका अमेरिका प्रेम व असली चेहरा और खुलेगा.

  • रितेश विद्यार्थी

Read Also –

मार्क्सवादी लबादा ओढ़े लोग अवार्ड की आस में सबसे पहले ‘स्टालिन मुर्दाबाद’ बोलते हैं
क्या आप सोवियत संघ और स्टालिन की निंदा करते हुए फासीवाद के खिलाफ लड़ सकते हैं ?
स्तालिन : साम्राज्यवादी दुष्प्रचार का प्रतिकार
भारत में क्रांति के रास्ते : काॅ. स्टालिन के साथ
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास, 1925-1967
‘मैं आखिरी स्टालिनवादी पीढ़ी से हूं’
संसदीय चुनावों के रणकौशलात्मक इस्तेमाल की आड़ में क्रांतिकारी कार्यों को तिलांजलि दे चुके कम्युनिस्ट संगठनों के संबंध में कुछ बातें
मार्क्सवाद की समस्याएं
फ़ासीवाद और औरतें : फ़ासीवाद के साथ बहस नहीं की जा सकती, उसे तो बस नष्ट किया जाना है
स्टालिन : अफवाह, धारणाएं और सच

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

राष्ट्रीयता बनाम नागरिकता

Next Post

भारत जोड़ो अभियान : राहुल गांधी का कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल यात्रा भारतीय राजनीति को एक नई दिशा देगा ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

भारत जोड़ो अभियान : राहुल गांधी का कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल यात्रा भारतीय राजनीति को एक नई दिशा देगा ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

ज्योतिषियों का पोंगापंथ और शनि का अंधविश्वास

August 24, 2024

कानून में दम तब है जब वह संकल्पवान लोगों से जुड़ कर चलता है

October 13, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.