Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

केन्द्र सरकार के फासीवादी दुश्प्रचार और षड्यंत्र

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 18, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

केन्द्र सरकार के फासीवादी दुश्प्रचार और षड्यंत्र

आज की विषम परिस्थतियों से हम सब वाकिफ हैं. अघोषित आपातकाल के दौर में लूट-छूट, भोग और शोषण पर टिकी सत्ता आम जनता के हर तबके-मजदूरों, किसानों, छात्र-युवाओं, लेखकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं, संस्कृतिकर्मियों, दलितों, अल्पसंख्यकों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, मानवाधिकारवादियों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं पर सुनियोजित और संस्थाबद्ध हमले कर रही है. घोर प्रतिक्रियावादी, ब्राह्मणवादी, फासीवादी मोदी सरकार के सत्ता में आते ही सरकार द्वारा साम्राज्यवादियों-पूंजीपतियों की जी-हुजूरी व आमजन के अधिकारों पर हमले में अचानक तेजी आयी है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण की जो प्रक्रिया चल रही है, उससे आम जन बेहाल है. उसके लोकतांत्रिक शक्तियों पर नंगा नाच जारी है. तर्क और वैज्ञानिक चेतना की धार को कुंद करने की कोशिशें तेज हो गयी हैं. देश में गजब का लोकतंत्र चल रहा है – आलोचना करिये तो पुलिस केस, सवाल करिये तो सीबीआई रेड, विरोध करिये तो गोली. स्थिति इतनी भयावह हो गयी है कि जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ रहे, विस्थापन का दंश झेल रहे, गरीबी की अंतहीन सीमा पर खड़े पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों के लिए सरकार की नई आर्थिक नीतियां उन्हें खत्म करने का पैगाम साबित हो रही हैं. आज अल्पसंख्यकों को विकास के ठोस अवरोधक की तरह, किसानों को उतावले समूह की तरह तथा दलितों को राष्ट्रहित के लिए हिंसक की तरह पेश किया जा रहा है.

6 जून, 2018 की सुबह 6 बजे के आसपास नागपुर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष तथा लम्बे समय से महिला और दलित अधिकारों पर काम करनेवाली प्रोú सोमा सेन, कई अरसों से मानवाधिकारों के बहाली की लड़ाई लड़ रहे इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीपुल्स लॉयर के महासचिव एडवोकेट सुरेन्द्र गडलिंग, मराठी पत्रिका विद्रोही के संपादक तथा जाति-उन्मूलन से सम्बन्धित आन्दोलन रिपब्लिकन पैंथर के संस्थापक सुधीर ढावले, मानवाधिकार कार्यकर्त्ता तथा राजनैतिक कैदियों की रिहाई समिति (सी.आर.पी.पी.) के सचिव रोना विल्सन तथा गढ़चिरौली में खनन क्षेत्रें में ग्राम सभा के साथ कार्यरत् विस्थापन विरोधी कार्यकर्ता तथा प्राइम मिनिस्टर्स रूरल डेवलपमेंट फेलो रह चुके महेन्द्र राउत को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा नागपुर, पुणे और दिल्ली में अलग-अलग जगहों से गिरफ्रतार किया गया. यह गिरफ्रतारी कोरोगांव में हुए प्रदर्शन के नाम पर की गयी है.

महेश राउत राज्य तथा कॉरपोरेट्स द्वारा जमीन हथियाने, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ स्थानीय समितियों के साथ आदिवासी हकों के लिए लड़ रहे थे. एडवोकेट गडलिंग ऐसी ही लड़ाईयों को कोर्ट में लड़ रहे थे. ये ऐसी बहुत-सी दलितों तथा आदिवासियों का कोर्ट में प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिन्हें झूठे आरोपों तथा कठोर कानूनों के अन्तर्गत आरोपी बनाकर गिरफ्रतार किया गया है. इसी तरह प्रो. सोमा सेन भी राज्य द्वारा किये जा रहे दमन विरोधी मानवाधिकार आन्दोलनों से गहन रूप से जुड़ी रही है. शिक्षक तथा कार्यकर्त्ता दोनों ही भूमिकाओं में वे जिन्दगी की कड़वी सच्चाईयों को सामने लाती रही हैं. सुधीर ढावले जाने-माने दलित अधिकार कार्यकर्त्ता तथा लेखक हैं तो वहीं रोना विल्सन वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं. वे आफसप्पा, पोटा, यू.ए.पी.ए. जैसे कठोर कानूनों के मुखर विरोधी रहे हैं.

स्पष्ट है कि भीमा कोरेगांव एक बहाना है. इन्हें इसलिए गिरफ्रतार किया गया है ताकि इन सामाजिक कार्यकर्ताओं को न्याय की लड़ाई, दमन तथा आदिवासी क्षेत्रें में प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ लड़ने से रोका जा सके.

इस शासन व्यवस्था में कार्यकर्त्ताओं पर हमला नई बात नहीं है. तर्कपूर्ण विचारकों नरेन्द्र दाभोलकर, गोविन्द पनसारे, एम. एम. कलबुर्गी तथा गौरी लंकेश की जघन्य हत्या दक्षिणपंथी हिन्दुत्व समूह के द्वारा दिनदहाड़े कर दी गयी थी. जुनेद, अखलाक तथा पहलू खान जैसे साधारण लोगों को पीट-पीट कर मार डाला गया. झारखण्ड में मजदूर संगठन समिति जैसे पंजीकृत ट्रेड यूनियन को प्रतिबंधित कर दिया गया. अधिकारों के लिए लड़नेवाले समूहों तथा व्यक्तियों को काम करने से रोका गया तथा झूठे आरोपों में फंसाया गया. उत्तर प्रदेश के चन्द्रशेखर आजाद ‘रावण’ तथा झारखण्ड के बच्चा सिंह जैसे जन-नेताओं, तीस्ता सीतलबाड़ जैसे पत्रकारों, शिक्षाविद्, छात्र-कार्यकर्त्ताओं, कार्टूनिस्ट तथा जनता की आवाज को उठानेवालों को कठोर कानूनों के अन्तर्गत गिरफ्रतार किया जा रहा है.

मीडिया ट्रायल, झूठी खबरों की संस्कृति तथा सोशल मीडिया द्वारा अभियान चलाकर जनमानस में उन लोगों के खिलाफ जहर घोला जा रहा है, जो सत्ता के सामने सच बोलने का साहस कर रहे हैं. ऐसा करके बाकी लोगों के दिलों में भी डर बिठाया जा रहा है. तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टारलाईट कॉपर फैक्ट्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे नागरिकों की पुलिस द्वारा हत्या यह साबित करने के लिए काफी है कि राज्य विभिन्न तरीकों से अपने लोगों का दमन करने पर तुली है. भविष्य में भी इनका एकमात्र लक्ष्य होगा-बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट पूंजी को स्थापित करना, जनवादी अधिकारों को पूरी तरह से छीन लेना, विरोध के हर स्तर को निर्ममतापूर्वक कुचल देना, अंधराष्ट्रवाद के सहारे पूरे राष्ट्र को फासीवादी राष्ट्र में बदल देना.

इसलिए अगर हम शोषण-दमन के आधार पर टिकी शासक वर्गों की समग्र आर्थिक-राजनैतिक व्यवस्था के खिलाफ गोलबन्दी के मुहिम से चुक गये तो हिटलर के फासीवादी राष्ट्र के खिलाफ आवाज उठानेवाले विख्यात जर्मन कवि मार्टिन नायमोलर की यह पंक्ति सार्थक सिद्ध होगी –

पहले वे कम्युनिस्टों के लिए आये / और मैं कुछ नहीं बोला – क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था । / तब वे ट्रेड यूनियनवादियों के लिए आये और मैं कुछ नहीं बोला, क्योंकि मैं ट्रेडयूनियनवादी नहीं था / तब वे यहूदियों के लिए आये / और मैं कुछ नहीं बोला / क्योंकि मैं यहूदी नहीं था / तब वे मुझे लेने आये / तो मेरे लिए बोलने वाला कोई नहीं था.

– संजय श्याम

Read Also –

गिरफ्तार दलित मानवाधि‍कार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करो
मोदी हत्या षड्यंत्र में दलित मानवाधिकारवादियों की गिरफ्तारी पर सवाल

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

दिल्ली में अफसरशाही-नौकरशाह काम नहीं कर रहा

Next Post

हिन्दुत्व की आड़ में देश में फैलता आतंकवाद

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिन्दुत्व की आड़ में देश में फैलता आतंकवाद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कार्ल मार्क्स की कविता : जीवन लक्ष्य

June 11, 2023

पेट्रोलियम पदार्थों के दाम : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बनाम दलाल नरेन्द्र मोदी

February 10, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.