Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हिन्दुत्व की आड़ में देश में फैलता आतंकवाद

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 19, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

हिन्दुत्व की आड़ में देश में फैलता आतंकवाद

हामिद अली खान – भाई, जिनकी रंगों में झूठ का खून दौड़ रहा हो, उनके बारे में क्या कहिए. उनके अनेक रूप हैं कि जनता उन्हें पहचानने में भूल करती है. कहते हैं राष्ट्रवादी, लेकिन उनके गुरु हैं इटली के मुसोलिनी और जर्मनी के एडोल्फ हिटलर. स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर बदनाम किया लेकिन निकला कुछ नहीं. चार साल तक कोई काम नहीं किया, बल्कि उससे पहले के कामों को अपना काम बता कर वाहवाही लूटी. देश में नफ़रत की फसल उगा कर सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर दिया. इनकी हरकतों का संज्ञान लेकर अमेरिका की खुफिया एजेंसी सी.आई.ए. ने विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित किया. धर्म की आड़ में साम्प्रदायिकता का जहर बराबर घोला जा रहा है.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

अंजली मिश्रा – गौरी लंकेश महिला पत्रकार की हत्या में शामिल 26 वर्षीय बाघमारे ने कहा कि ”मुझे 2017 में कहा गया कि ‘धर्म बचाने के लिए किसी को मारना होगा’ और मैं तैयार हो गया. मुझे नहीं पता था कि मारना किसे है. अब लगता है महिला को नहीं मारना था.

धर्म के जो लोग ठेकेदार बन कर अनैतिक गतिविधियों में लिप्त हैं, जिनपर जनता अटूट विश्वास करती है. नेता जिनके सामने नतमस्तक है, जो समाज में एक ऊंंचा स्थान रखते और जिन पर महिलाओ ने रेप जैसे गंभीर आरोप लगाए, जिनपर लोगों ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए. क्या ऐसे लोगों से धर्म को बचाने की जरुरत नहीं है ? क्या ऐसे लोगों से धर्म खतरे में नहीं पड़ता ?

एक महिला पत्रकार कि,धर्म की रक्षा के लिए हत्या कर दी गई और धर्म के ठेकेदार बने दाती महाराज जैसे लोग धर्म के नाम पर लोगो को लूट खसोट रहे उनको क्यों छोड़ दिया जाता? धर्म क्या महिलाओ से ही खतरे में आता? धर्म ये भी है कि महिला पर हाथ नहीं उठाया जाता.

रमेश ठाकुर – कफील के भाई को गोली मारने वाला पासवान है. गौरी लंकेश को गोली मारने वाला वाघमारे है. दोनों दलित. तो ये भी बता दो कि बनारस पुल हादसे का मुख्य अपराधी वो ‘अनाम’ व्यक्ति कौन है ?

दरअसल जानबूझकर खून-खराबे जैसे कांड दलितों, पिछड़ों के हाथों करवाए जाते हैं ताकि बाद में उसका नाम उजागर कर लोगों में फूट पैदा किया जा सके. दलित-मुस्लिम के बीच दरार पैदा किया जा सके. जरा सोचिए, बांकियों का नाम क्यों नहीं उजागर किया जाता ?

बुद्धि लाल पाल – हिंदूवादी नेता और श्री राम सेना के संस्थापक प्रमोद मुथालिक ने पिछले साल हमले में मारी गईं पत्रकार गौरी लंकेश की तुलना कुत्ते से की है. प्रमोद ने कहा कि ‘कुछ लोग चाहते थे कि नरेंद्र मोदी गौरी लंकेश की मौत पर प्रतिक्रिया दें, अगर कर्नाटक में कुछ कुत्ते मर जाएं तो मोदी को क्यों प्रतिक्रिया देनी चाहिए.’ अब असहमत लोग, असहमत जनता, असहमत संस्थायें, दल देशद्रोही थे, अब कुत्ते भी हो गये.

इनकी नजर में 71% जनता जिन्होंने हिंदूवादी लोगों को वोट नहीं दिये हैं तथा असहमति वाले आदमी को यह इस देश का नहीं मानते हैं, उन्हें कुत्ता मानते हैं, आदमी नहीं मानते हैं. यह श्रीराम लोगों की नजर में सामान्य जनता जो जीने का थोड़ा सा भी हक़ मांगे वह कुत्ती है और फिल्म काला की तरह राक्षस है. जो इन श्रीराम से असहमत हैं उन सभी को कुत्ते की तरह मारने की वकालत करते हैं और उन्हें आदमी की श्रेणी में गिनने से इंकार है.

थू ऐसी धार्मिकता को, चाहे वह हिन्दू धर्म में हो, चाहे मुसलमान धर्म में हो, जो इतनी घोर आतंकी हो. यह ढका छुपा नहीं खुल्लम-खुल्ला हत्यायों का बर्बरता का हांका है और एक तरह से गौरी लंकेश की हत्या की जिम्मेदारी लेता हुआ है. उसी के साथ और ऐसा करने के लिये ललकारता हुआ भी है. खुल्लम खुल्ला आतंकवाद है.

सुरेश अवस्थी – जिस प्रकार मध्यकाल में युद्ध के समय सैनिकों को विजित राज्य में लूटपाट और अन्य दुष्कर्मो की खुली छूट होती थी, वैसा ही कुछ हाल आजकल दिख रहा है. 70 वर्षों के कथित संघर्ष के बाद जिनको सत्ता मिली है उन्होंने अपने भक्त सैनिकों को खुला छोड़ दिया है– विपक्षियों पर शाब्दिक और कभी-कभी शारीरिक हमले करने के लिए. भक्त गण आजके वही सैनिक हैं.

विनय ओसवाल – विदेशियों के टुकड़ों पर पलने वाले ‘स्वदेशी’ सबसे ज्यादा डरे हुए, बुजदिल, निकम्मे लोग हैं. झूठ के सहारे अफवाह फैला साजिश करने में माहिर विदेशी ताकतें जो पूरी दुनियांं के देशों में सत्ता हासिल करने या सत्ता में बने रहने की चाहना रखने वाले राजनैतिक पार्टियों को अपनी सेवाएं देती है और राजनैतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए मशहूर है, जैसे सीआईए, मोसाद आदि भारत की ये स्वदेशी नामधारी उन विदेशी खुफिया एजेंसियों की गुलाम है, वो पूरी साजिश का रोडमैप तैयार कर इन स्वदेशियों को देती है. सोनिया को विदेशी-विदेशी बताने की मुहिम उन्हीं विदेशी खुफिया एजेंसियों की बनाई योजना का हिस्सा है.

पूरे विश्व में अधिनायकवादी उभार को इन्हीं विदेशी खुफिया एजेंसियों का आशीर्वाद प्राप्त है. इन “भूमिगत रहस्यमयी एजेंसियों” को “इल्लुमिनाटीज” के नाम से जाना जाता है. नई-नई षड्यंत्रकारी योजनाएं बनाना और प्रशिक्षण देना उनका मुख्य पेशा है. ऐसा माना जाता है, ये चर्चा में है, कि हमारे देश में राष्ट्रवादी शक्तियों के उभार में ऐसी विदेशी शक्तियों का ही हाथ है. सही गलत का पता करना लगभग असंभव है.

– फेसबुक से साभार

Read Also –

जर्मनी में फ़ासीवाद का उभार और भारत के लिए कुछ ज़रूरी सबक़
केन्द्र सरकार के फासीवादी दुश्प्रचार और षड्यंत्र
जनवादी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से उठते सवाल

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

केन्द्र सरकार के फासीवादी दुश्प्रचार और षड्यंत्र

Next Post

दुनिया में सबसे मंहगी भारत की संसदीय व्यवस्था

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

दुनिया में सबसे मंहगी भारत की संसदीय व्यवस्था

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

किसान विरोधी कानून : ज़मीन की कुर्की होगी या नहीं ?

December 30, 2020

नकदी मुक्त लेन-देन के खतरे

January 5, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.