Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कृषि क़ानूनों में काला क्या है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 11, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कृषि क़ानूनों में काला क्या है ?

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान यूनियन और किसानों से सवाल किया था, कि कृषि क़ानूनों में काला क्या है ? अब उन्हें पूर्व आईपीएस विजय शंकर ने जवाब दिया है. यह तीनों कानून के अनुसार, इन नए कृषि कानूनों मे काला सरकार की नीयत में है. नीयत ही काली है. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में विवाद होने पर, सिविल कोर्ट में वाद दायर करने के न्यायिक अधिकार से किसानों को वंचित रखना, कानून में काला है. किसान न्यायालय जा ही नहीं सकता, इस संबंध में किसी विवाद होने पर. निजी क्षेत्र की मंडी को टैक्स के दायरे से बाहर रखना, कानून में काला है. सरकार खुद तो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदे और निजी मंडियों को, अपनी मनमर्जी से खरीदने की अंकुश विहीन छूट दे दे, यह कानून में काला है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

निजी बाजार या कॉरपोरेट को उपज की मनचाही कीमत तय करने की अनियंत्रित छूट देना, कानून में काला है. किसी को भी जिसके पास पैन कार्ड हो उसे किसानों से फसल खरीदने की छूट देना और उसे ऐसा करने के लिये किसी कानून में न बांधना, कानून में काला है. किसी भी व्यक्ति, कम्पनी, कॉरपोरेट को, असीमित मात्रा मे, असीमित समय तक के लिये जमाखोरी कर के बाजार में मूल्यों की बाजीगरी करने की खुली छूट देना, यह कानून में काला है. जमाखोरी के अपराध को वैध बनाना, कानून में काला है.

जब 5 जून को पूरे देश मे लॉकडाउन लगा था, और तब आपात परिस्थितियों के लिये प्राविधित, संवैधानिक प्राविधान, अध्यादेश का दुरुपयोग करके यह तीनों कानून बना देना, यह सरकार की नीयत के कालापन को बताता है औऱ यह कानून में काला है. 20 सितंबर 2020 को राज्यसभा में हंगामे के बीच कानून को, मतविभाजन की मांग के बावजूद, उपसभापति द्वारा, केवल ध्वनिमत से पास करा देना, यह कानून में काला है. कानून का विधिवत परीक्षण हो, इसलिए इसे नियमानुसार स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाना चाहिए था, पर ऐसा जानबूझकर न करना, कानून में काला है. जमीन राज्य के आधीन होती है और उससे सम्बन्धित कानून राज्य के आधीन होना चहिए. केन्द्र सरकार को जमीन और उस जमीन पर कानून राज्य पर थोपना गैर संवैधानिक है. यह संविधान के विरूद्घ है. यह काला है.

इस कानून के ड्राफ्ट से लेकर इसे लाने की नीयत के पीछे किसानों का हित कहीं है ही नहीं. हित उनका है जो रातोरात महामारी आपदा में अवसर तलाशते हुए बड़े-बड़े सायलो बना कर पूरी कृषि व्यवस्था को अपने कॉरपोरेट में हड़प जाने की नीयत रखते हैं. यह कानून में काला है. यह सूची अभी और लंबी हो सकती है. जो मित्र इस कानूनो को समझ रहे हैं वे इन कानूनो में व्याप्त खामियों को कमेंट बॉक्स में लिख दें. जो मित्र क़ानून की खूबियां बताना चाहें तो उनका भी स्वागत है.

उन्होंने कहा कि कृषिमंत्री और उनके सहयोगी फिर 11 बार बात किस विंदु पर करते रहे जबकि अभी तक उन्हें यही पता नही लग पाया कि कानून में खामियां क्या क्या हैं ? साथ ही वे किन संशोधनो और पूरे कृषि कानून को ही होल्ड पर रखने के लिये राजी हो गए ? यदि इन कानूनों में कुछ भी काला नहीं है तो संशोधन क्यूँ ? यदि इन कानूनों में कुछ भी काला नहीं है तो इन तीनों कानूनों का डेढ़ साल के लिए स्थगन क्यूँ ?

  • अजय असुर

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

मोदी के मगरमच्छी आंसू की नौटंकी

Next Post

‘हम सबके लिए साहस दिखाने का समय आ गया है’ – महुआ मोइत्रा का भाषण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

'हम सबके लिए साहस दिखाने का समय आ गया है' - महुआ मोइत्रा का भाषण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बहस – 1 : राम एक राष्ट्र के ही नहीं पूरी वैश्विक मानव जाति के हैं

August 13, 2020

मार्क्सवाद बनाम उदारवाद : जे. वी. स्तालिन के साथ एच. जी. वेल्स की बातचीत 23 जुलाई 1934

November 29, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.