Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

नए नोट छापने से रिजर्व बैंक का इन्कार यानी बड़े संकट में अर्थव्यवस्था

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 7, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

नए नोट छापने से रिजर्व बैंक का इन्कार यानी बड़े संकट में अर्थव्यवस्था

देश की अर्थव्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था विकट संकट की स्थिति का सामना कर सकती है. आजतक ने एक रिपोर्ट की है. रिजर्व बैंक ने सरकार से और अधिक नोट छापने की मना कर दी है. इसका मतलब है मार्केट में पहले से ही अत्यधिक नोट सप्लाई हो चुके हैं. वर्तमान संख्या से और अधिक संख्या में नोट छपेंगे तो भारतीय मुद्रा की मार्केट वैल्यू बुरी तरह से गिर सकती है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

कुछ दिन पहले वियतनाम में भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ा था. वहां भी सरकारी मुद्रा की वैल्यू इतनी बुरी तरह से गिरी थी कि एक टाइम का खाना खाने के लिए भी, जेब भरके नोट चाहिए होते थे. वियतनाम अभी भी मुद्रा संकट से जूझ रहा है. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी में तो भी ऐसी स्थिति आई थी कि सूटकेस बराबर नोट के बदले भी एक टाइम का खाना नहीं मिलता था.

सरकारी घाटे की भरपाई जब अधिक नोट छापकर की जाती है तो मार्केट में नोट की संख्या अधिक बढ़ जाती है. इससे रुपए की कीमत भयंकर रूप से गिरती है. अर्थव्यवस्था में ऐसी स्थिति को हाइपर इंफ्लेशन कहते हैं. हाइपर इन्फ्लेशन की स्थिति में रुपए की कीमत इतनी भी गिर सकती है कि 20 हजार रुपए के बदले में एक रोटी भी न मिलेगी.

आप इस पर हंस सकते हैं, लेकिन मामूली-सी इकोनॉमिक्स पढ़े लोगों को भी पता है कि सरकारी घाटे की भरपाई कभी, नए नोट छापकर नहीं करनी चाहिए. किया जा सकता है लेकिन ऐसा केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही करना चाहिए. इससे पहले सरकार को मार्किट से पैसे लेने चाहिए, जैसे गवर्नमेंट सिक्युरिटी बगैरह से. इसमें क्या होता है कि सरकार जनता से सरकारी बांड के जरिए उधार लेती है. जो पैसा ऑलरेडी मार्किट में जनता के पास होता है, उसी का उपयोग सरकारी घाटे की भरपाई के लिए किया जाता है. इस विकल्प में नए नोट नहीं छापने होते.

न अधिक नोट छपेंगे, न नोटों की वैल्यू कम होगी. इसके अलावा सरकार अपनी संपत्ति बेचकर भी सरकारी राजस्व की भरपाई कर सकती है. जिस रफ्तार से सरकार एलआईसी, एयर इंडिया, रेलवे बगैरह को प्राइवेट हाथों में बेच रही है. उससे पता चल रहा है सरकार ऑलरेडी इस विकल्प पर काम कर चुकी है. ये न अधिक कारगर साबित हुआ है, और न ही ये एक सस्टनेबल सॉल्यूशन है.

कुछ दिन पहले सरकार ने RBI से 1.76 लाख करोड़ रुपए लाभांश के ऐंठे हैं. इससे पहले भी सरकार आरबीआई से अधिक लाभांश के लिए झगड़ चुकी है. दबाव में पूर्व गवर्नर ने इस्तीफा तक दे दिया था. साफ है सरकार, सरकारी घाटे को पूरा करने के अंतिम विकल्प यानी नए नोट छापने पर काम करना चाहती थी, जिससे फिलहाल रिजर्व बैंक ने इनकार कर दिया है यानी अर्थव्यवस्था शीघ्र ही बड़े संकट में आ सकती है.

    • श्याम मीरा सिंह

Read Also –

सांस्कृतिक ऐतिहासिक बजट ??
गांधी जी का देसी अर्थशास्त्र
भयावह आर्थिक संकट के बीच CAA-NRC की जद्दोजहद
देश को 15-20 साल पीछे ले गई मोदी सरकार

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

स्कूलों को बंद करती केन्द्र की सरकार

Next Post

दिल्ली विधानसभा चुनाव : अपने और अपने बच्चों के भविष्य खातिर भाजपा-कांग्रेस का बहिष्कार करें

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

दिल्ली विधानसभा चुनाव : अपने और अपने बच्चों के भविष्य खातिर भाजपा-कांग्रेस का बहिष्कार करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हमको नन्दू राष्ट्र बनाना है…

May 13, 2022

इजरायल ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया, हर्जाना तो भरना ही होगा !

June 20, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.