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देश मांगें, करोड़ों राम मंदिर क्योंकि नफरत ही इनका धर्म है, घृणा ही इनका देवता है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 15, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
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विष्णु नागर

वैसे तो यह स्पष्ट ही है मगर मेरे भीतर यह बात और भी पुख्ता होती जा रही है कि इस देश के हिंदुओं को एकेश्वरवादी बनाना संघ- भाजपा-मोदी का एक खास एजेंडा है. जो धर्म एकेश्वरवादी हैं उन पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा क्योंकि यह उन धर्मों की, उनकी संस्कृति की अपनी प्रकृति है मगर हिंदू धर्म संयोग से एकेश्वरवादी कभी नहीं रहा. यह उसकी अपनी प्रकृति में नहीं है लेकिन इनका प्रयास यही है. इसकी मूल प्रकृति को बदलना,उसे नष्ट करना इनका लक्ष्य है, ताकि इस देश की धार्मिक बहुसंख्यक आबादी को ज्यादा बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके.

ये भले ही आज कृष्ण और शिव के बहाने भी मुसलमानों पर निशाना साध रहे हैं मगर इनके स्थायी देवता राम हैं इसलिए राम की एक अलग मूर्ति इन्होंने गढ़ी है, जो उनकी मूल कोमल छवि से भिन्न है. इनकी कल्पना में सीता का कोई स्थान नहीं है. ये एक-दूसरे से कभी जै राम जी की या राम राम नहीं करते. जयश्री राम ही इनके राम हैं. जयश्री राम में एक आक्रामकता है, मुसलमानों से नफरत का भाव है, जो जैराम जी या राम राम में नहीं है.

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जय श्री राम का नाम लेकर इन्होंने क्या क्या नहीं किया है और कर रहे हैं. अयोध्या में राम के मंदिर का जितना शोर इन्होंने मचाया है, किसी और मंदिर का नहीं मचाया और भी ढेरों प्रमाण इनके आक्रामक, घृणित एजेंडे के दिये जा सकते हें. इन्होंने आदिवासियों के तमाम देवता नष्ट किए. उनकी स्वायत्तता को धीरे धीरे नष्ट कर उन्हें हिंदू बनाया.

ये जिन्हें अपना घोषित दुश्मन मानते हैं, कोशिश उन्हीं की तरह बनने की है, ताकि उन्हें भी भीतर से नष्ट कर सकें. अपनी तुच्छता उन पर लाद सकें, वही इनका असली ध्येय है. ये सबकुछ नष्ट करने आए हैं. बनाते भी इसलिए हैं कि जो भी कुछ अच्छा है, उसे नष्ट कर सकें. दुश्मन हम सबके ये हैं, कोई और नहीं. इनका कोई धर्म नहीं, इनका कोई देवता नहीं. नफरत ही इनका धर्म है, (राम नहींं) घृणा ही इनका देवता है.

(इसीलिए) सरकारी स्कूल-कालेज जितने खुलने थे, खुल चुके. अब उन्हें बंद और बर्बाद करने का समय आ चुका है. इस दिशा में प्रगति काफी त्वरित है. 2018 से 2019 के बीच ऐसे 51,000 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं. ईश्वर की कृपा रही तो जल्दी ही बाकी सभी बंद हो जाएंगे. शिक्षा का संपूर्ण निजीकरण हो जाएगा. स्कूलों के सभी भवन, खाली जमीन समेत 50 साल की लीज पर अडाणी जी को दे दिए जाएंगे. इनमें से कुछ वे बाबा रामदेव और विश्व हिंदू परिषद को सबलेट कर देंगे. जाहिर है कि वह एक अच्छे दाता की तरह विहिप से कोई किराया नहीं लेंगे मगर उसे किराए की रसीद जारी करते रहेंगे.

अधिकांश सरकारी अस्पताल खुद बीमार और मरणासन्न हैं. शीघ्र ही इनके लिए बजट में शून्य प्रतिशत राशि का प्रावधान किया जानेवाला है. सरकारी पक्ष इस पर मेजें थपथपा कर इस घोषणा का स्वागत करेगा. यह शोक का विषय इसलिए नहीं है कि समय की मांग है कि नये-नये मंदिर बने, जो हैं, उन्हें पोषाहार प्रदान करके अतिशीघ्र हृष्ट पुष्ट बनाया जाए. मंदिर ही अब स्कूल-कालेज माने जाएंगे. घंटी बजाना सबसे बड़ी योग्यता होगी. मंदिर ही अब अस्पताल होंगे.

भक्ति की वरिष्ठता के आधार पर भक्त ही डाक्टर से लेकर सफाईकर्मी तक होंगे. हनुमान चालीसा का पाठ सभी रोगों की रामबाण औषधि होगी. मूर्छा आने पर हिंदू को अजान के समय हनुमान चालीसा का पाठ सुनाकर होश में लाया जाएगा. अगर किसी मुसलिम रोगी का आपरेशन करने के लिए उसे बेहोश करना होगा तो उसे बुलडोजर ध्वनि सुनाई जाएगी. होश में लाने के लिए साथ में जयश्री राम का नारा सुनाया जाएगा. जैसा कि गुरुजी ने बताया है वेद पुराणों में इस विधि का वर्णन विस्तार से किया गया है.

जो होगा, मंदिर में होगा. मंदिर से मेरा आशय राममंदिर से है. एक बड़ा सा राममंदिर अयोध्या में बन ही रहा है, उससे भी डेढ़ गुना बड़ा रामायण मंदिर पूर्वी घंपारण में निर्माणाधीन है. बताया जाता है कि इस जगह वापसी में रामजी की बारात ठहरी थी. वैसे सोचें तो राम जी ने विवाह से पहले और विवाह के बाद भी बहुत से पुण्य कार्य किए होंगे. कुछ का विवरण रामचरित मानस आदि में मिलता है, कुछ का नहीं इसलिए यह आज भी शोध का विषय बना हुआ है. मसलन जब उन्होंने घुटने के बल चलना सीखा था तो वह स्थली विशेष कहां है ?

जब उनकी जन्मस्थली और बारात विश्राम स्थली की खोज आसानी से हो सकती है तो घुटना चलन स्थल की खोज क्यों संभव नहीं ?यूजीसी इसके लिए शोध राशि प्रदान अवश्य करेगी. वहां भी एक मंदिर बने. एक मंदिर वहां भी हो, जहां से उन्होंने पैरों के बल खड़ा होना सीखा था. पता नहीं तब बच्चे कबड्डी खेलते थे या नहीं. कबड्डी-खो खो नहीं तो कुछ और खेलते होंगे. पहली बार क्रिकेट-कबड्डी टाइप खेल. उन्होंने जहां खेले होंगे, वहां भी एक-एक मंदिर की दरकार है. राम जी क्रिकेट भी खेलते थे, वॉलीबॉल और फुटबॉल भी.इनका संधान आज से पांच लाख या छह हजार वर्ष पहले स्वयं राम जी ने किया था, ये भी शोध का अनछुआ विषय है. इससे हमें यह सिद्ध करने में आसानी होगी कि अयोध्या से ही ये खेल पश्चिम में पहुंचे और उन बदमाशों ने हड़प लिए.

रामजी की जो तस्वीर आज हम देखते हैं, उनमें उनका चेहरा सफाचट नजर आता है. अवश्य राम जी रोज दाढ़ी बनवाते होंगे. उस स्थल को पवित्र मान एक मंदिर वहां भी हो. मतलब अंत तक उन्होंने मंदिर बनवाने योग्य बहुत कुछ किया होगा. कम से कम एक-एक मंदिर वहां भी हो. आदमी की पूरी जिंदगी राममंदिरों की यात्रा में गुजर जाए, इससे उत्तम जीवन का ध्येय और क्या हो सकता है ? तब इस देश का हर हिंदू गाय की पूंछ मजबूती से पकड़ कर उपयुक्त समय पर इस दुःखमय-मायावी संसार से मुक्ति पा सकेगा. स्वर्ग में उसका स्थान सुनिश्चित होगा. नरक में उल्लू बोला करेंगे.

कुछ खोज और कुछ निर्णय छत्तीसगढ़ सरकार ने करके काम थोड़ा आसान कर दिया हैं. उसकी खोज के अनुसार राम जी ने वनवास काल में छत्तीसगढ़ के 75 स्थलों का भ्रमण किया था और 65 जगहों पर ठहरे थे. उन सब स्थलों को तीर्थ और पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया गया है. रामवन गमन पथ का निर्माण भी करने का सुंदर कदम उसने उठाया है. इस दिशा में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड आदि सरकारों को भी अपनी प्रगति की रिपोर्ट राष्ट्र के सामने पेश करना चाहिए. देश मांगें, करोड़ों राएम मंदिर.

भारतभूमि वैसे तो तीस-चालीस लाख मंदिरों से पटी पड़ी है मगर इस देश की महानता और प्राचीनता की दृष्टि से यह कुछ भी नहीं. मेरी तो सदेच्छा है कि भारत में हर शहर, हर गांव, हर नुक्कड़, हर सड़क, हर खेत में हर सौ मीटर पर एक मंदिर हो. केवल मंदिर हो और कुछ नहीं हो और सारे के सारे राम मंदिर हों. इतने मंदिर हों कि कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर वाले रोये कि हाय कभी वह भी जमाना था, जब हम इन्हें चलाया करते थे और अब ये सब कचरा हो चुका है. हर पैदल चलने वाला खुश हो कि देखो सालों की अकड़ रामजी ने फुस्स कर दी. भूखा कहे कि रामजी ने सच्चा समाजवाद ला दिया. हमीं क्यों तुम भी अब भूखों मरो. अब बांच कर दिखाओ, हनुमान चालीसा. अब करके दिखाओ सुंदरकांड का पाठ. अब करके दिखाओ नरसंहार का आह्वान. अब कहो कि सारी दुनिया, भारत की ओर देख रही है !

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