सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं
1. बुझी चिमनी बुझी चिमनी की कालिख़ बंट रही है जिसे लेना है अंजुरी भर ले जाओ इकहत्तर लाशों की...
Read moreDetails1. बुझी चिमनी बुझी चिमनी की कालिख़ बंट रही है जिसे लेना है अंजुरी भर ले जाओ इकहत्तर लाशों की...
Read moreDetailsहर तसवीर, हर शब्द सच है लेकिन सारी तसवीर, सारे शब्द मिलाकर एक झूठ बनता है फोर्स्ड एक्सोडस ऑफ कश्मीरी...
Read moreDetailsकॉरपोरेटपरस्त भारत सरकार के साथ युद्ध में माओवादी ‘माओ’ की शिक्षा भूल गए ? भारत में संघी सरकार और जनताना...
Read moreDetailsइंदिरा गांधी की बगावत : PM रहते इंदिरा गांधी को कांग्रेस से निकाला गया था आर. के. जैन इंदिरा गांधी...
Read moreDetailsआयरलैंड का एजुकेशन सिस्टम ब्रिटिश साम्रज्य्वाद ने जो जुल्मों सितम कत्लो-गारत आयरलैंड में मचाई थी, वो शायद किसी भी और...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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