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परजीवी प्रधानमन्त्री की उत्तरजीविता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 11, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
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परजीवी प्रधानमन्त्री की उत्तरजीविता

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, चिंतक
जब भाजपा विपक्ष में थी तब भाजपा के लोग प्याज की माला पहन कर कमीजें उतार कर बैलगाड़ी पर बैठ कर आन्दोलन करते थे इसलिए हमें यह समझना होगा कि समाज को आगे बढ़ाने वाला आन्दोलन जरूर होने चाहिए लेकिन भाजपा जैसे आन्दोलन समाज को नुकसान पहुंचाते हैं.

प्रधानमन्त्री ने आन्दोलन करने वाले किसान नेताओं को आन्दोलनजीवी कहा है. उनका मानना है कि आन्दोलन करना कुछ लोगों का धंधा है. यह बयान उनकी नासमझी दर्शाता है. असल में इंसानी समाज आन्दोलन से ही आगे बढ़ा है.

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रोम के गुलामों ने अपनी गुलामी के खिलाफ स्पार्टकस के नेतृत्व में ईसा के जन्म से पहले विद्रोह किया था. अमेरिका में काले गुलामों ने अपनी गुलामी के खिलाफ आन्दोलन किया जिसके कारण अमेरिका में गृह युद्ध हुआ. गुलामी प्रथा खत्म हुई लेकिन गुलामी का समर्थन करने वालों ने अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को गोली मार दी.

बाद में अमेरिका में कालों के साथ गोरों द्वारा किये जाने वाले भेदभाव के खिलाफ बड़ा आन्दोलन हुआ, इसे सिविल राइट्स मूवमेंट कहा जाता है, जिसके नेता मार्टिन लूथर किंग थे जो गाँधी से प्रभावित थे मार्टिन लूथर किंग को भी भेदभाव समर्थकों ने गोली मार दी. हम होंगे कामयाब ‘इसी आन्दोलन में गाया जाने वाला गीत का हिंदी अनुवाद है.

पहले मजदूरों से अट्ठारह घंटे काम लिया जाता था. अमेरिका में ही आठ घंटे की शिफ्ट होनी चाहिए, इस मांग को लेकर मजदूरों ने बड़ी हडताल की. इस प्रदर्शन पर पुलिस ने गोली चलाई. इसमें बहने वाले मजदूरों के खून से झंडे को रंगा गया. तब से लाल झंडा क्रांति का प्रतीक माना जाता है, जिसे देख कर संघी बिदकते हैं.

रूस में मजदूरों ने जारशाही के खिलाफ आन्दोलन किया और मशहूर रूसी क्रांति की. चीन में माओत्से तुंग के नेतृत्व में किसानों ने क्रांति की. यूरोप में महिलाओं से बराबरी की मांग करने वाले आन्दोलन किये तथा अपने लिए वोट देने के अधिकार के आन्दोलन किये.

भारत में समाज की कुरीतियों पर प्रहार करने वाले कवियों और संतों के काम को भक्ति आन्दोलन कहा जाता है. भारत में 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ आन्दोलन हुआ, जिसमें फांसी चढ़ने वाले साठ प्रतिशत लोग मुसलमान थे. उससे पहले मानगढ़ में हजारों आदिवासी आन्दोलन करते हुए मार डाले गये. बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जोरदार उलगुलान आन्दोलन किया.

बस्तर में आदिवासियों ने भूमकाल आन्दोलन किया, जो इतिहास में अमर है. इसके अलावा भारत में अंग्रेजों ने जब बिहार में किसानों को मजबूर किया कि वे ‘अनाज की बजाय अंग्रेजों के लिए सिर्फ नील उगायें’ तो किसानों ने आन्दोलन किया, जिसमें गांधी जी शामिल हुए. जो चंपारण आन्दोलन के नाम से मशहूर है. जिसमें गांधी जी को गिरफ्तार किया गया और बाद में अंग्रेजों को झुकना पड़ा.

अंग्रेजों के समय भारत में महिलाओं ने शराब के खिलाफ आन्दोलन शुरू किया और आज भी महिलाएं शराब के खिलाफ आन्दोलन का नेतृत्व करती हैं और शराबबंदी लागू करने के लिए सरकार को मजबूर करती हैं. अंग्रेजों द्वारा भारत की लूट को रोकने के लिए विदेशी वस्त्रों को जलाने का आन्दोलन हुआ.

नमक पर अंग्रेजों ने टैक्स लगाया तो उसके खिलाफ गांधी जी पैदल निकल पड़े, जिसे दांडी मार्च कहा जाता है. उसके बाद धरसाना की नमक फैक्ट्री के बाहर सत्याग्रह हुआ, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज किया. एक जत्था गिरता था तो दूसरा जत्था आगे आता था. लोगों के सर फटते गए और लोग आगे बढ़ते ही रहे. यह दृश्य देख कर बीबीसी के पत्रकार ने लिखा ‘अंग्रेजों का जो इक़बाल था, आज भारत में वो खत्म हो गया. अब भारत की आत्मा आजाद है इसे अब कोई गुलाम बना कर नहीं रख सकता.’

चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारी अपने तरीके से अंग्रेजों के खिलाफ आन्दोलन कर रहे थे. गोलियां खा रहे थे. फांसी चढ़ रहे थे. सुभाष चन्द्र बोस अंग्रेजों के खिलाफ आजाद हिन्द फ़ौज बना कर आन्दोलित हुए. भारत की आजादी के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में आन्दोलन चला जिसमें नेहरु पटेल मौलाना आजाद खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे सैंकड़ों नेता शामिल थे.

आजादी के बाद भी आंदोलनों का सिलसिला चलता रहा. किसानों के आन्दोलन हुए, मजदूरों के आन्दोलन हुए. जयप्रकाश नारायण की अगुआई में सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ भी शामिल था. मृणाल गोरे के नेतृत्व में पानी के लिए आन्दोलन हुआ जिसके बाद वे पानी वाली बाई के नाम से मशहूर हुई.

नर्मदा घाटी में लोगों ने मशहूर नर्मदा आन्दोलन किया. सूचना के अधिकार के लिए आन्दोलन हुआ, जिसके बाद कानून बना. पेंशन के लिए आन्दोलन हुआ, जिसके बाद विधवा पेंशन और बुजुर्गों के लिए पेंशन का कानून बना.
भोजन के अधिकार के लिए बड़ा आन्दोलन हुआ, जिसके बाद सरकारों को बहुत से नए कानून बनाने पड़े.

एक साल पहले मुस्लिम महिलाओं की अगुआई में सीएए-एनआरसी कानूनों के खिलाफ आन्दोलन हुआ. अब किसान आन्दोलन कर रहे हैं. भाजपा की सरकारें आन्दोलन करने वालों पर गुंडा एक्ट लगा रही है उन्हें युएपीए में फंसा कर जेल में डाल रही है. लोकतंत्र आंदोलनों से ही जिन्दा रहता है. लोकतंत्र का यह मतलब नहीं होता कि आप पांच साल के बाद वोट डालिए और बस हो गया लोकतंत्र.

सरकार की गलत नीतियों गलत कानूनों समाज में चलने वाली गलत बातों के खिलाफ जनता हमेशा आन्दोलन करती रहेगी लेकिन आंदोलनों को विदेशियों का षड्यंत्र, आतंकवाद और धंधा बताना किसी व्यक्ति का अज्ञान या चालाकी ही हो सकती है. जो समाज जिन्दा है वह हमेशा आन्दोलनरत रहेगा.

भाजपा यह भूल जाती है कि उसने भी हमेशा आन्दोलन किये हैं.  इन्होनें भारत की आजादी की लड़ाई के विरोध में आन्दोलन के रूप में आरएसएस का गठन किया. इन्होनें अंग्रेजों का साथ दिया. इन्होनें भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, गांधी और भारत छोडो आन्दोलन का विरोध किया. इन्होनें भारत में हिन्दू मुस्लिम एकता को खत्म करने के लिए बाबरी मस्जिद तोड़ने का आन्दोलन किया और सत्ता हसिल करने में सफल हुए.

जब भाजपा विपक्ष में थी तब भाजपा के लोग प्याज की माला पहन कर कमीजें उतार कर बैलगाड़ी पर बैठ कर आन्दोलन करते थे इसलिए हमें यह समझना होगा कि समाज को आगे बढ़ाने वाला आन्दोलन जरूर होने चाहिए लेकिन भाजपा जैसे आन्दोलन समाज को नुकसान पहुंचाते हैं.

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