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पदलोलुप विश्वास का आम आदमी के साथ विश्वासघात करने की तैयारी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 7, 2018
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कुमार विश्वास की पदलोलुपता और आम आदमी

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देश, सेना, पार्टी और व्यक्ति का राग अलापने वाले आम आदमी पार्टी के सदस्य कुमार विश्वास पदलोलुपता में इतने ज्यादा अंधे हो गये हैं कि उन्हें सही-गलत का भी फर्क नजर नहीं आ रहा है. दरअसल वे देश, सेना, पार्टी और व्यक्ति की आड़ में आम आदमी पार्टी को ही खत्म करने पर उतारू हो गये हैं.

आम आदमी पार्टी ही देश की एकमात्र ऐसी पार्टी है जिस पर देश की गरीब आम जनता का आशा-भरोसा टिका हुआ है. यही कारण है कि गरीब आदमी के हित में काम करने वाली आम आदमी पार्टी को यह शासक वर्ग किसी भी हालत में खत्म कर डालना चाहती है. शासक वर्ग का प्रतिनिघित्व करने वाली वर्तमान सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्ष में बैठे कांग्रेस व अन्य शासक वर्गीय पार्टी इसके लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. एक ओर तो आम आदमी पार्टी पर तमाम जांच एजेंसियों और पुलिस तक को हुला रखा है तो दूसरी ओर आम जनता में इसे बदनाम करने के लिए अपने दलाल एलजी के माध्यम से उसके हर काम में अड़ंगा डाल रहा है. इसके बावजूद देश की जनता जब आम आदमी पार्टी को खत्म नहीं होने दे रही है तब भाजपा के नेतृत्व में शासक वर्ग आम आदमी पार्टी को अंदर से तोड़ डालने और अरविन्द केजरीवाल को अलगाव में डालकर खत्म कर देने के लिए नये-नये कुचक्र अपना रहा है. आम आदमी पार्टी के ही अन्दर के ही लोगों को खरीदकर या तोड़कर अरविन्द केजरीवाल के गरीब-गुरबों के हित में कार्यरत् कुशल नेतृत्व के खिलाफ खड़ा कर रही है.

अब जब कुमार विश्वास के रूप में एक ढुलमुल सत्तालोलुप तत्व सामने आया है तब भाजपा की बांछें खिल गई है. कपिल मिश्रा जैसे स्लीपर सेल के औचित्यहीन हो जाने के बाद कुमार विश्वास अब खुलकर अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ उतर आये हैं. आम गरीब जनता के शिक्षित-प्रशिक्षित करने पर जोर देकर काम कर रही आम आदमी पार्टी की नीतियों के खिलाफ शासकों ने कुमार विश्वास को पूरी तरह से साध लिया है. आम आदमी पार्टी के जनपक्षी नीतियों से भयाक्रांत शासक वर्ग जानता है कि शिक्षित-प्रशिक्षित आम जनता शासकों के जनविरोधी नीतियों को आसानी से हजम नहीं कर पायेंगे. वे सवाल उठायेंगे और विरोध करेंगे.

शासक वर्ग इस खतरे को देखते हुए कुमार विश्वास के नेतृत्व में देश, सेना, पार्टी और व्यक्ति, मानवता आदि जैसे जुमलों का इस्तेमाल करते हुए आम आदमी पार्टी के खिलाफ खड़ा किया है. भाजपा की ओर से दिये जा रहे ऐसे देश, सेना, पार्टी और व्यक्ति, मानवता आदि जैसे जुमलों की पोल पिछले 4 सालों में पूरी तरह खुल चुकी है. यह जुमले असल में शासकों के हित साधने और उसके हित के खातिर आम आदमी का खून निचोड़ने वाली शोषण की मानसिकता का द्योतक है, जिसका नया प्रतिनिधि आम आदमी पार्टी के अन्दर कुमार विश्वास हैं.

भाजपा के साथ कुमार विश्वास की निकटता किसी से छिपी हुई नहीं है. कुमार विश्वास भाजपा जैसी जनविरोधी पार्टी के रूप में बदनाम हो चुकी शासकीय पार्टी के साथ ही पतित हो चुके हैं. वह आम आदमी पार्टी के साथ रहकर उसे अन्दर से तोड़कर अब नया शासक वर्गीय पार्टियों के रूप में आम आदमी पार्टी को ढालना चाहते हैं और इसकी पहली कड़ी के रूप में राज्यसभा की सदस्यता चाहते हैं.

अगर सत्तालोलुप कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा के सांसद के तौर पर भेजा जाता है तब यह देश की गरीब आम जनता के साथ विश्वासघात होगा. शासक वर्ग हमेशा ही ऐसे जनप्रिय व्यक्तियों, समूहों, पार्टियों को लालच, डर दिखाकर खुद में मिला लेती है और आम आदमी ठगा रह जाता है. सदियों से यही होता चला आ रहा है, खासकर आजादी के आंदोलन के बाद से. तमाम ऐसे लोकप्रिय चेहरों, पार्टियों को शासकों ने अपने में मिला लिया है. देश की जनता को जब तक इसका अहसास होता है, सब कुछ खत्म हो चुका होता है. फिर से यह शासक नये चेहरे की तालाश में जुट जाता है. आज जब आम गरीब आदमी, अरविन्द केजरीवाल के कुशल नेतृत्व में आम आदमी पार्टी में अपना चेहरा देखती है, तब भयाक्रांत यह शासक वर्ग इसे खत्म कर डालने पर बुरी तरह तुला हुआ है.

ऐसे में यह जरूरी है पदलोलुप कुमार विश्वास को किसी भी हालत में राज्य सभा के सांसद के बतौर नहीं भेजा जाना चाहिए. कुमार विश्वास को राज्यसभा भेजना दरअसल भाजपा जैसी जनविरोधी पार्टी को वोट देकर भेजने के बराबर है. उन्हें लोकसभा में चुनाव के माध्यम से जाना चाहिए. अगर वे इसके लिए तैयार नहीं होते हैं तो बेशक उनके लिए पलकें पांवरे बिछाये भाजपा के साथ उन्हें चले जाना चाहिए ताकि आम आदमी पार्टी की जनहितैषी नीतियों को आगे बढ़ाया जा सके, और शासक वर्गों के नये साजिशों से आम जनता को बचाया जा सके.

हालांकि यह ज्यादा बेहतर होता अगर कुमार विश्वास भाजपा के हाथों का खिलौना बनने के बजाय आम आदमी के लिए काम करते और आम आदमी का हित साधते क्योंकि शासकों और अमीरों के हित साधने के लिए तो हजारों पार्टियां हैं पर गरीबों-असहायों के लिए एकमात्र आम आदमी पार्टी ही है, जिसका नेतृत्व अरविन्द केजरीवाल कर रहे हैं.

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