Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सियासी दुकानदारी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 15, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सियासी दुकानदारी

गुरूचरण सिंह

एक अरसे तक कांग्रेस ने किया वोटबैंक की तरह उनका इस्तेमाल और फिर एक दिन उसका ही यह दाव संघ-भाजपा ने उसी पर उलट दिया. तब से लेकर आज तक मुसलमानों के खिलाफ नफरत की यही फसल काट रही है वह. यह दूसरी बात है नागरिकता कानून के चलते एक कड़ी चुनौती उसके सामने पेश आई है. विरोध सिर्फ एक क़ौम का दिखाने की सत्तारूढ़ दल की तमाम कोशिशों के बावजूद जुबान, इलाके और मजहब और इनके बूते ही सियासी रोटी सेकने वाली सियासी पार्टियों से अलग छात्रों का यह आंदोलन जंगल की आग की तरह फैलने लगा है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

अंधविश्वास, अशिक्षा और अवैज्ञानिक सोच को न केवल कायम रखना चाहती हैं ये अंधेरे की ताकतें बल्कि उसकी हर मुमकिन मदद भी करती हैं क्योंकि इन्हीं की बुनियाद पर ही उनकी हकूमत की बुलंद इमारत खड़ी है. किसी के भी हाथ में शिक्षा का दीपक दिखाई देते ही सावधान की मुद्रा में आ जाती हैं, हाथ तत्काल पहुंच जाता है ‘राजदंड’ पर, क्योंकि व्यवस्था कायम रखने का एकमात्र तरीका डर ही तो है उसके पास. दलील दे कर अपनी बात किसी को समझाना तो कभी सीखा नहीं उसने.

अभिव्यक्ति का अधिकार भले ही संविधान ने देश के सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित कर रखा हो, लेकिन संविधान की सुनी कब है इन लोगों ने, खाली इस्तेमाल ही तो किया है. सच तो यही है कि रोटी के बाद सबसे जरूरी इसी अधिकार की अवहेलना तो करती आई है अंधेरी ताकतों की पक्षधर यह सरकार. भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उत्तर प्रदेश में 1100 मुठभेड़ों को गंभीर माने जाना तो इसी सिलसिले की एक महज़ एक कड़ी है. खैर, इस काली सोच का पहला वार होता है वैज्ञानिक सोच पैदा करने के लिए कटिबद्ध उच्च शैक्षणिक संस्थानों पर जैसे जेएनयू , एएमयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद युनिवर्सिटी आदि पर. कभी तो ये हमले स्टूडेंट यूनियन के गुर्गों के जरिए होते हैं, कभी पढ़ाने वाले स्टाफ के एक हिस्से को संरक्षण दे कर तो कभी एकदम सीधी कार्रवाई करके.

तीन साल पहले जेएनयू में आतंकी अफज़ल गुरू पर पहले से निर्धारित कार्यक्रम में कथित देश विरोधी नारों के चलते कुछ छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया गया था. आज उसी अफज़ल गुरू को पकड़ने वाले पुलिस DSP दविन्द्र सिंह की आतंकियों से संबंध रखने के चलते पूछताछ हो रही है. अफजल गुरु कितना कहता रहा कि असल क़सूरवार तो ये पुलिस वाले ही हैं लेकिन उसकी सुनी ही नहीं किसी ने. महज़ शक की या रंजिश की वजह से आतंकवादी बना दिए लोग 20-25 साल कैद में रहने के बाद बेकसूर बता कर अदालत में छूट भी जाते हैं, लेकिन उन्होंने या उनके परिवार ने जो जिल्लत झेली है, झेल रहे हैं उसकी भरपाई कैसे हो सकती है ? जिंदा लाश की तरह जिंदगी जीते हैं ऐसे लोग.

कौन हैं ये लोग जिनके मन में मुस्लिम प्यार अचानक ठाठें मारने लगता है ? कभी यह ज्वार कांग्रेस के मन में उठने लगता है, कभी मुलायम अखिलेश का नाज़ुक दिल में खलबली सी उठने लगती है इन ‘बेचारो’ पर होने वाले जुल्म को देख कर और कभी मायावती का मातृत्व जाग उठता है, एक बच्चे की तरह पुचकारने लगती है, वह तो कभी उन्हें दुत्कारती है. इसका मतलब तो बस एक ही हुआ न कि कोई न कोई आदमी या तबका उनका ‘इस्तेमाल’ करने के लिए हमेशा तैयार रहता है. नेग लेने वाले को तो नेग से मतलब है, दुल्हन चाहे रास्ते में ही विधवा हो हो जाए. मरघट के गिद्ध हैं ये सब के सब. आज जब वे वजूद की लड़ाई लड़ रहें हैं, सितमागर के सामने खड़े हैं सीना तान कर तो ये सारे के सारे कौन सी गुफा में जा कर सो गए हैं ?

किन मुस्लिमों को प्यार करते हैं ये ? वे जिनमें पढ़े लिखे लोगों की फीसदी दर आजादी के वक्त हिंदुओं से कहीं ज्यादा थी ? या वे जो आज पिछड़े होने का ठप्पा लगाए बेरोजगार घूम रहे हैं ? वे जिन्हें आपने अपने घर में किसी भी पारिवारिक फंक्शन में कभी न्योता ही नहीं ? या वे जिनके हाथ का पानी पीने में आपको या आपके परिवार को आज भी एतराज है ? वे जिनकी जहालत के चुटकले आप आज भी मजे ले ले कर सुनाते रहते हैं ? या वे जिनकी जहनी काबलीयत के सामने आज भी आपका सर अदब से झुक जाता है और उनके तीखे सवालों के जवाब आपके पास होते ही नहीं ?

इन सवालों के जवाब तो देने ही होंगे आपको कभी न कभी. फिलहाल तो मेरे सामने खबर है कोई बीस दिन पहले की मेरठ में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के चलते पुलिसिया बर्बरता की. एक बूढ़े बाप मुंशी की आंखों ने बीस दिन पहले ही अपने बेटे का जनाज़ा उठते देखा है, वह बेटा जिसकी कमाई से ही घर की रोज़ी रोटी चलती थी.

ठेले पर सामान ढोने वाला वाला ज़हीर अपने पीछे अपने इसी बूढ़े पिता मुंशी, 21 साल की बेटी और पत्नी के लिए दुखों का अंबार छोड़ गया है ! 20 दिसंबर को ज़हीर काम से वक़्त निकालकर घर खाना खाने आया था. खाना खा कर अपने लिए बीड़ी लेने पास की दुकान पर गया था लेकिन फिर कभी लौट कर आया ही नहीं.

मुंशी का कहना है कि ‘पुलिस ने 10 मिनट में ही पोस्टमॉर्टम कर दिया. पुलिस वाले हमारे घर साथ आए थे और कहा दिन निकलने से पहले दफ़ना दो. सो सुबह चार बजे बेटे को मिट्टी दे दी ! अभी तक हमें पोस्टमॉर्टम की पर्ची भी नहीं दी गई. एफ़आईआर करने के लिए थाने गए थे तो हमें ही डाॅटने लगे. बोले ख़ुद मार कर लाए हो !! पहले पुलिस को मारो फिर एफ़आईआर दर्ज कराओ !”

मौत के इतने दिनों के बाद भी मुंशी जैसे ऐसे कई परिवारों को न तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली है और न ही अब तक कोई एफ़आईआर दर्ज हुई है, लिखाने की कई कोशिशों के बावजूद. ऐसे ही राम राज की बात करती है क्या योगी – मोदी की सरकारें ??

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

आतंकवादियों के सहारे दिल्ली चुनाव में भाजपा

Next Post

हिंदू पिता के मुस्लिम बेटे

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिंदू पिता के मुस्लिम बेटे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

करवाचौथ या अन्धविश्वास

November 4, 2020

रूसी क्रान्ति का विकास पथ और इसका ऐतिहासिक महत्व

November 16, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.