Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हिंदू पिता के मुस्लिम बेटे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 15, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

हिंदू पिता के मुस्लिम बेटे

गुजरात का अमरेली जिला. सावरकुंडला कस्बे में एक थे भीखू कुरैशी. उनके दोस्त का नाम था भानुशंकर पांड्या. दोनों की दोस्ती आज से करीब 40 साल पहले हुई थी. जीवन की गाड़ी आगे बढ़ी. दोनों का वक्त एक जैसा नहीं रहा. भीखू का अपना परिवार हुआ, पत्नी और तीन बेटे. भानू का अपना कोई नहीं था. दोनों की दोस्ती बहुत गाढ़ी थी. बिल्कुल परिवा​रिक. आपस में निभाते निभाते दोनों दोस्तों ने उम्र काट दी.

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

कुछ साल पहले बुजुर्ग भानु का पैर टूट गया. चूंकि उनका कोई परिवार नहीं था सो भीखू ने उन्हें अपने घर बुला लिया, वरना देखभाल कौन करता ? भानुशंकर अब भीखू के घर ही रहने लगे. यहां भरा पूरा परिवार उनकी देखरेख करता था.

भीखू के तीनों बेटों का ना​म है अबू, नसीर और जुबैर कुरैशी. सभी दिहाड़ी मजदूर हैं. तीनों पांच वक्त के नमाजी और घनघोर आस्तिक जैसे आम आदमी होता है. भानु, भीखू के घर में अजनबी नहीं थे. वे तीनों बेटों के चाचा थे. करीब तो वे पहले से थे, लेकिन अब वे घर के बुजुर्ग हो गए थे. भानु के लिए दोस्त का यह परिवार ही अब उनका संसार था. जाहिर है कि भानु घर के बुजुर्ग थे तो घर के बच्चों के दादा थे. परिवार घर के बुजुर्ग का पैर छूता और दादा सबको फलने-फूलने का आशीर्वाद देते.

दोनों ही बुजुर्गों की उम्र हो चली थी तो फिर वही विधि का विधान. एक दिन भीखू मियां का टिकट कट गया और वे निकल लिए भगवान के घर. अब भानुशंकर अकेले हो गए. दोस्त के जाने के बाद भानु बुझे-बुझे से रहने लगे.

भीखू के बाद कुछ तीन साल बीते. एक दिन परवरदिगार के दरबार से भानुशंकर का भी बुलावा आ गया. वे आखिरी हिंचकियां लेने लगे. परिवार ने सुन रखा था कि हिंदुओं को अंतिम समय गंगाजल पिलाते हैं. उन्होंने भागकर पड़ोसी के यहां से गंगाजल मांगा और अंत समय भानुशंकर के मुंह में गंगाजल डाला ताकि चाचा को मुक्ति मिले.

मौत के बाद गांव वाले एकत्र हुए तो भाइयों ने कहा कि हम हिंदू विधि विधान से चाचा का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, क्योंकि वे तो हिंदू थे. इस पर गांव वालों ने कहा कि कंधा देने और दाह देने के लिए तो जनेऊ पहनना जरूरी है. तीनों भाइयों ने कहा कि आप जैसा बताएंगे, हम वैसा ही करेंगे, जैसा बेटे पिता के लिए करते हैं. पांच वक्त के नमाजी मुस्लिम का कब जनेऊ संस्कार होने लगा? लेकिन वे जनेऊ पहनने को तैयार हैं तो रोकेगा भी कौन?

तीनों भाइयों ने जनेऊ और धोती पहनी और हिंदू रीति-रिवाज से अपने ब्राह्मण चाचा का अंतिम संस्कार किया. नसीर के बेटे ने भानुशंकर को मुखाग्नि दी. पूरे 13 दिनों तक सभी पारंपरिक कर्मकांड किए गए, तीनों भाइयों ने सिर मुंडवाया, दान दिया, जो बन पड़ा, वह सब किया.

ऐसा होने में न भानुशंकर पांड्या का धरम भ्रष्ट हुआ, न ही भीखू कुरैशी का इस्लाम खतरे में आया. अब बच्चे मुतमइन हैं कि अब्बू जन्नत गए होंगे और चाचा की आत्मा को मुक्ति मिल गई होगी. नफरत, सियासत का कारोबार है. दुनिया मोहब्बत से चलती है.

  • कृष्णकांत

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

सियासी दुकानदारी

Next Post

मोदी-शाह चाहता है कि इस देश में नागरिक नहीं, सिर्फ उसके वोटर रहें

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

मोदी-शाह चाहता है कि इस देश में नागरिक नहीं, सिर्फ उसके वोटर रहें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘सीपीआई माओवादी के महासचिव बासवराज की हत्या जीवित पकड़े जाने के बाद किया है’ – विकल्प, प्रवक्ता, सीपीआई माओवादी

June 9, 2025

यदुरप्पा की डायरी से बदनाम मोदी से एलन मस्क का मिलने से इंकार

April 26, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.