Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘सोनी सोरी, अब तुम बस्तर माता बन गयी’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 29, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'सोनी सोरी, अब तुम बस्तर माता बन गयी'
‘सोनी सोरी, अब तुम बस्तर माता बन गयी’
हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार

हम कुछ ऐसे लोगों के बारे में इतिहास में पढ़ते हैं, जो आम लोगों से ज्यादा हिम्मत वाले थे. और जिन्होंने ऐसे काम किये उन्हें भूलना मुश्किल है. कई बार लगता है ऐसे लोग हमारे समय में क्यों नहीं होते ? मैं आजकल महसूस करता हूं कि सोनी सोरी एक ऐसा ही व्यक्तित्व है. उदहारण के लिए कल का ही वाकया ले लीजिये.

सोनी को पता चला कि पड़ोस के जिले में तीन गांवों के अनेकों आदिवासियों को अर्ध सैनिक बलों और पुलिस के सिपाहियों नें पीटा है. हालांकि सोनी सोरी को अगले दिन सुबह दिल्ली के लिए निकलना था लेकिन उन्होंने सोचा कि मैं रात तक वापिस लौट कर रायपुर के लिए निकल जाऊंगी.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दूं कि सोनी सोरी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गीदम कसबे में रहती हैं. वहां से नज़दीकी रेलवे स्टेशन रायपुर का है, जो 400 किलोमीटर दूर है.

सोनी सोरी चिंतागुफा गांव में पहुंची. वहां आदिवासियों ने सोनी को बताया कि एक हफ्ते पहले हमारे गांव से बीस लोगों को पुलिस ने पकड़ा था. इन लोगों को थाने में ले जाकर पुलिस ने बुरी तरह मारा. 20 साल की लडकी को निवस्त्र कर के सिपाहियों ने उसके ऊपर बैठ कर पीटा. वह लडकी गर्भवती है उसे रक्तस्राव शुरू हो गया है.

13 आदिवासियों को पीटने के बाद भगा दिया गया, लेकिन सात आदिवासियों को नहीं छोड़ा गया. वे सात आदिवासी अब कहां हैं किसी को नहीं पता. गांव के आदिवासियों ने सोनी से मदद के लिए कहा. आदिवासियों ने कहा – ‘आप हमें कानूनी मदद दीजिये.’

सोनी इन आदिवासियों के साथ रायपुर जाने के लिए निकली. रास्ते में पुलिस ने सोनी सोरी को रोक लिया. सोनी सोरी की गाडी में छह आदिवासी पीड़ित भी थे. पुलिस इन आदिवासियों को अदालत जाने से रोकना चाहती थी. सोनी सोरी की गाडी रोक कर इन आदिवासियों को थाने के भीतर ले जाकर पुलिस ने बहुत धमकाया.

इन पीड़ितों में दो युवतियां हैं, जिनकी उम्र बीस साल से भी कम है. एक बुज़ुर्ग महिला और भी हैं, दो बुज़ुर्ग हैं जो पचास साल से ज्यादा उम्र के हैं. रात भर पुलिस इन आदिवासियों को धमकाती रही कि ‘तुम लोग सोनी सोरी के साथ मत जाओ. तुम लोग बोल दो कि सोनी सोरी हमें ज़बरदस्ती लेकर जा रही है. बोल देना कि सोनी सोरी जंगल में नक्सलियों से मिलने गयी थी.’

आदिवासियों नें कहा कि – ‘नहीं सोनी सोरी को हमने अपनी मदद के लिए बुलाया था. सोनी जंगल में नहीं गयी बल्कि हमारे गांव में हमसे मिलने आई. हम अपनी मर्जी से सोनी के साथ जा रहे हैं.’

आदिवासी डरे नहीं. पुलिस ने सारी रात सोनी सोरी और इन छह आदिवासियों को थाने में रोक कर रखा. अभी यह सभी लोग गीदम पहुंचे हैं. मैं जब इस सब के बारे में सोचता हूं तो मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि कोई व्यक्ति इतना साहसी कैसे हो सकता है ?

आदिवासियों की मदद करने के लिए पुलिस ने चिढ कर सोनी सोरी के निर्दोष पति को पुलिस ने जेल में डाल दिया. जब अदालत ने उसे रिहा करने का आदेश दिया तो पुलिस ने सोनी के पति को पीट पीट कर मार डाला.

सोनी सोरी को पुलिस ने थाने में ले जाकर निवस्त्र करके बिजली के झटके दिए और उसके गुप्तांगों में पत्थर ठूंस दिए. पुलिस के द्वारा इतनी क्रूरता झेलने के बाद भी कोई महिला इतनी निडर हो सकती है, इसी पर मुझे आश्चर्य है.

सारी रात थाने के बाहर छह आदिवासियों के साथ बैठे रहना वो भी उस महिला के द्वारा जिसे पुलिस द्वारा इतनी क्रूरता झेलनी पड़ी हो. थानेदार ने सोनी पर नज़र रखने के लिए चार महिला कांस्टेबल की ड्यूटी लगाईं.

सोनी ने उन चारों महिला कांस्टेबल से कहा कि आप लोग बैठ जाइए पूरी रात खड़े खड़े आप थक जायेंगी. थानेदार ने गुर्रा कर कहा कि ‘नहीं, ये रात भर खडी रहेंगी. ये मेरा हुकुम है.’

सोनी सोरी ने कहा कि थानेदार साहब आप भी तो ड्यूटी पर हैं. फिर आप क्यों कुर्सी पर बैठे हुए हैं ? थानेदार सोनी को घूरता हुआ थाने के भीतर चला गया. यह सब देख कर महिला कांस्टेबल को बहुत आश्चर्य हुआ कि कोई महिला इतनी सह्दृय और हिम्मती कैसे हो सकती है ?

रात में पुलिस कांस्टेबल सोनी से पूछ रही थी – ‘क्या हम भी आपके साथ काम कर सकती हैं ?’ बस्तर में आदिवासी अब मुसीबत में सोनी को ही याद करते हैं. मैं कई बार सोनी से हंसते हुए कहता हूं – ‘भारत माता को तो मैं नहीं जानता लेकिन सोनी अब तुम बस्तर माता बन गयी हो.’

Read Also –

बीजापुर में आदिवासियों के शांतिपूर्ण आन्दोलन पर पुलिसिया हमला पर मानवाधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी से साक्षात्कार
सोनी-सोरी के 11 वर्ष कौन लौटायेगा ? उनका आत्मसम्मान कौन लौटायेगा ? 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

एक शुद्ध ‘कामरेड’ का शुद्ध गीत

Next Post

जिन्दा भगत सिंह

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

जिन्दा भगत सिंह

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

किसान आन्दोलन और उनकी मांग

December 20, 2020

भाजपा एकदम ईमानदार दल है, कैसे ?

July 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.