Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अफवाह फैलाने वाली केंद्र सरकार और भारत की बंट गई जनता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 31, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अफवाह फैलाने वाली केंद्र सरकार और भारत की बंट गई जनता

भाजपा के आईटी सेल, गोदी मीडिया और खुद अफवाह फैलाने वाली केंद्र सरकार के कारण पिछले 5 साल में भारत की जनता वाकई बिल्कुल बंट गई है और इसलिए उसका जमीर भी मर गया है. सड़क पर सिर्फ चलती फिरती लाशों को देखकर मनुष्य नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इस निर्जीव शरीर में आत्मा नहीं है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

यह लोग सरकार के कठपुतली और खिलौने बन गए हैं. सरकार इनके शरीर से जितना भी खून चूस ले, जितना भी जुल्मो सितम कर ले, यह बेहया लोग कहीं भी प्रतिकार या विरोध नहीं करेंगे. कारपोरेट घराने और सभी भाजपाई नेता जनता के इसी डर का लाभ उठा रहे हैं.

जनता का शोषण हो रहा है और कोई भी विरोध नहीं कर रहा है. धर्म, जाति के नाम पर बंटी हुई जनता लाशों के समान अपने घरों में शहरों, कस्बों में बैठी हुई है और चुपचाप गुलामों की भांति चंद हजार की नौकरी कर रही है.

पिछले 7 साल से काली अंग्रेज सरकार ने देशवासियों पर इतने जुल्म किए, दर्जनों जनविरोधी फैसले किए, फिर भी अजगर की भांति जनता निर्जीव अपने बिल में पड़ी हुई है. सब कुछ लुटा कर केंद्र की कारपोरेट सरकार ने मजदूरों के सारे 27 कानून खत्म कर दिये पर क्या मजदूरों की कोई हड़ताल दिखी ?

भारत की सर्वश्रेष्ठ तीन यूनीवर्सिटियों जेएनयू , एएमयू और जामिया के छात्रों का भीषण दमन हुआ, हर यूनीवर्सिटी मे फीस बहुत बढा दी गयी पर छात्रों का कोई बडा आंदोलन हुआ ?

एक, एक कर के सारे सार्वजनिक उपक्रम, रेलवे सहित, जिनमें कहते थे कि बहुत तगडी यूनियन हैं, बेची जा रही हैं पर कहीं कोई विरोध भी दिखाई नहीं दे रहा है.
केवल जो बिक रही हैं उन का ही छुटपुट विरोध दिखता है, बाकी सोई हुई हैं, कोई सामूहिक विरोध नहीं.

सारे स्थायी पद खत्म कर के ठेके की नौकरी आ गयी. ठेके की नौकरी केवल गुलामी का दूसरा नाम है, जिसमें नौकरी की कोई गारन्टी नहीं, कोई सुविधा नहीं, भारत के संविधान में दिये गये समान कार्य का, समान वेतन के अधिकार को हवा मे फाड़ कर उडा दिया गया.

कही किसी युवा आक्रोश की कोई खबर है ? कारण कि क्रिकेट, छोकड़ी और मोबाइल फोन, पिज़्ज़ा बर्गर के चकाचौंध में फंसे युवा अपना शोषण करवाने के लिए तैयार हैं, पर आंदोलन करने को तैयार नहीं है. मरी हुई नपुंसक जनता जातियों में बंटी हुई है और सिर्फ दहेज लेने में अपनी बहादुरी दिखाती है.

सारे सिविल कर्मचारियों की पेंशन, जीपीएफ आदि खत्म हो गये, पर सरकार बिल्कुल सामान्य रूप से चल रही है, किसी को अपने भविष्य की चिंता नही है. आज के युवा इतने लापरवाह और इतने खत्म हैं कि वह फुटपाथ पर ठेला लगाकर सामान बेचने को तैयार हैं, लेकिन सरकार के खिलाफ गोलबंद होने या सरकार की सत्ता को हटाने के लिए एकजुट नहीं हो रहे हैं.

कहीं नौकरी नहीं मांगते हैं, बस चाय बेचने का ढाबा खोल लेते हैं. ऐसे समाज और देश में किसान ने एकजुट हो कर इतने लम्बे समय से, तमाम दिक्कतों और सारे विरोधों के बाबजूद 700 से ज्यादा शहादत दी है.

किसान शब्द सुनते ही भारत के गांव याद आते हैं, एक आम पढ़ा लिखा शहरी व्यक्ति गांव के निवासियों को अनपढ़ गंवार कहता है, पर वर्तमान किसान आन्दोलन ने अच्छे अच्छे बुध्दिजीवियों की आंख खोल दी हैं. वे न केवल अपने अधिकारों के लिये बल्कि हम सब के लिये आंदोलनरत हैं.

यह एक असाधारण कार्य है. कृषि कानूनों के तीसरे कानून को देखें, जिस में जमाखोरी के कानून को ही खत्म कर दिया गया है. अब कभी प्याज, कभी दाल तो कोई अन्य चीज बाजार से गायब कर दी जाती है, केवल जमाखोरों के कारण और यह सभी जमाखोर व्यापारी ज्यादातर संघी/भाजपा वाले ही हैं.

जब यह कानून ही खत्म हो रहा है तो भविष्य की कल्पना आप कर सकते हैं. आने वाले दिनों में लोग अनाज की कमी से भूखे मर जाएंगे, लेकिन सरकारी प्रचार माध्यमों से भ्रमजाल का शिकार होकर जाति, धर्म में ऐसे बंटे हैं कि भविष्य का भयंकर अंधकार नजर नहीं आ रहा है.

उनके परिवार वाले भी अनाज के अभाव में भूखे मर जाएंगे, लेकिन वह सारे लोग सरकार के अंधभक्त बने हुए हैं. अगर अपने लिये भी नही लड़ सकते तो कम से कम आप के लिये लड़ने वालों का विरोध तो न कीजिये. मनुष्य होने का बोध जगाइए तो साथ देने की हिम्मत भी आ जाएगी.

  • तबरेज शम्स

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

सरकार पूछती है कि नुकसान क्या है तो किसान बिल में जो कांट्रैक्ट फार्मिंग है, वह यही तो है

Next Post

तालिबान से बतियाने लगा भारत, गोदी मीडिया भी जल्दी करेगा स्वागत

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

तालिबान से बतियाने लगा भारत, गोदी मीडिया भी जल्दी करेगा स्वागत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

संविधान

November 26, 2023

भारत में हर बीमारी का एक ही दवा

April 17, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.