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Home गेस्ट ब्लॉग

वर्षा डोंगरे लाखों दलित महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 26, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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वर्षा डोंगरे लाखों दलित महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है

वर्षा डोंगरे

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वर्षा डोंगरे एक जेल अधिकारी हैं. छत्तीसगढ़ में जब भाजपा की सरकार थी तब एक बार मैंने फेसबुक पर पुलिस थाने में आदिवासी महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के बारे में लिखा था.

मैंने लिखा था कि मुझे सोनी सोरी ने बताया कि वह ऐसी महिलाओं से मिली जिनके साथ पुलिस वालों द्वारा भयानक शारीरिक दमन किया गया है. एक महिला के तो निप्पल काट दिए गये थे. पुलिस थानों में महिलाओं को बिजली के झटके दिए जाते हैं जिसके जलने के निशान उनके शरीरों पर पड़ जाते हैं

मेरी इस सोशल मीडिया के पोस्ट पर डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे ने कमेन्ट किया और लिखा कि यह बात बिलकुल सच है और उन्होंने जगदलपुर जेल में खुद ऐसी लड़कियों को देखा था, जिनके शरीर पर जलाए जाने के निशान थे.

इसके बाद पूरी भाजपा सरकार में हडबडी मच गई थी. डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे को भाजपा सरकार ने निलम्बित कर दिया. भाजपा सरकार अगला चुनाव हार गई

कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई. वर्षा डोंगरे को बहाल किया गया. वर्षा डोंगरे को कोरबा जेल में जाकर काम करने के लिए कहा गया.

वर्षा डोंगरे ने बताया कि उनकी कुछ महीने की बेटी है और उनके पति की नौकरी दुर्ग में हैं इसलिए उन्हें दुर्ग जेल में नियुक्त कर दिया जाय. इस बात को लेकर वह गृह मंत्री से मिली. बाद में उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया.

अदालत ने सरकार से पूछा कि ‘इन्हें दुर्ग जेल में अटैच करने में आपको क्या परेशानी है ?’ सरकार ने उस बात का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है. पिछले दस महीने से वर्षा डोंगरे को वेतन नहीं मिल रहा है.

वर्षा डोंगरे असल में जेल के भीतर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ पहले से ही लडती रही हैं. रायपुर जेल में जेल अधीक्षक की जानकारी में जेल की महिला डाक्टर द्वारा महिला जेल में आदिवासी दलित और उनके हिमायती कैदियों को एक्सपायरी दवाई खिलाती है ताकि यह मर जाएंं.

इस बात की शिकायत सोनी सोरी ने भी सर्वोच्च न्यायालय में की थी..वर्षा डोंगरे ने रायपुर जेलमें आपनी ड्यूटी के दौरान इस बात के सबूत जमा कर लिए थे इसलिए उन्हें सजा के तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है.

वर्षा डोंगरे पुरानी योद्धा हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर एक मुकदमा किया था, जिसमें वर्षा डोंगरे जीत गई थी. अदालत ने मुकदमा खर्च के तौर पर राज्य शासन से कहा कि वह वर्षा डोंगरे को पांच लाख रूपये का मुआवजा दे. लेकिन आज तक वर्षा डोंगरे को एक भी पैसा नहीं मिला.

वर्षा दलित महिला हैं इसलिए उनका संघर्ष लाखों दलित महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है. बाबा साहब को दलित समाज से सरकारी नौकरी में जाने वालों से शिकायत थी कि वे अपने समाज को भूल जाते हैं. लेकिन वर्षा डोंगरे ने बाबा साहब की आशाओं को जिन्दा किया है.

उन्होंने आदिवासी महिलाओं के दमन के खिलाफ अपनी नौकरी को खतरे में डाल कर जो साहस दिखाया है, उसके लिए उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए लेकिन अभी तो वह सजा भुगत रही हैं.

  • हिमांशु कुमार

Read Also –

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महिलाओं के खिलाफ हिंसा में पुलिसकर्मियों की भूमिका और आम जनों का प्रतिशोध 

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