Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

जी.एस.टी. बिल: काली रात, काले कारनामें

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 29, 2017
in ब्लॉग
1
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter


काली रात में चोर, डाकू और हैवानों का साम्राज्य होता है. डरावनी चलचित्रों में भी रात के अंधेरे में ही भूत-पिशाच और शैतान बाहर निकलता है और जनमाल का भारी नुकसान पहुंचाता है. शैतानों की आत्मा रात के अंधेरों में ही क्यों मंडराती है, इसका तो जबाव नहीं मिलता पर हमारी सरकार अपने तमाम जनविरोधी फैसले रात के अंधेरे में ही करती है. सुबह होते ही लोगों को पता चलता है कि सरकार ने फलाना फैसला लिया है और वो अब लागू हो जायेगा. आखिर ऐसा हो क्यों नहीं ? हमारी आजादी भी तो रात के अंधेरे में ही चुपके से आ गई थी. गुलामी में सोने गये लोग सुबह की आजादी में अपनी आंखें खोली. सवाल उठता है आखिर रात के अंधेरे में ऐसी क्या खासियत होती है कि सरकार चोरों और डाकुओं की तरह रात के अंधेरे में फैसला लेती है.

बात शुरू करते हैं हमारी आजादी की खौफनाक रात से. अंग्रेजों के बनाये नियमों के अनुसार जब हमारे पूर्वज सुबह अपनी आंखें खोले तो मालूम हुआ कि आजाद हो गये. अचानक से यह कैसे हो गया ? सवाल उठाने वालों इससे पहले कि समझ पाते साम्प्रदायिक दंगों ने धरती को रंगना शुरू कर दिया.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

चलिए यह तो हुई पुरानी बातें. नई बात यह हुई कि आधी रात को हमारी बहादुर भारत सरकार ने जी0एस0टी0 बिल को पारित कर दिया. अब ऐसी क्या बला आ गई कि इसे आधी रात को पारित करना पड़ा ? जबकि अगली सुबह अनेक सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा कि हम इस बिल को पढ़े तक नहीं है, तो फिर पारित कैसे हो गया ? सवाल को थैली की नीचे दबा दी जायेगी या दबा दी गई है. पर हम सवाल उठाने के लिए स्वतंत्र हैं, जैसा ही हमारी सरकार कहती है. तो सवाल है कि रात के अंधेरे में आखिर क्या जरूरत पड़ गयी इस जी0एस0टी0 बिल को पारित कराने की ?

जबाव यह है कि यह बिल भी शैतानों की ही तरह जनविरोधी है. जनता के जान-माल को नुकसान पहुंचाने, आम आदमी का खून पीने और काॅरपोरेट घरानों का और ज्यादा थैली भरने के लिए यह बिल लाया गया है.

जानकार बतातें हैं कि यह बिल अंग्रेजों और जमींन्दारों के द्वारा लोगों से लगान वसूलने के लिए अपनायी गई जुल्म की मध्ययुगीन दास्तान याद दिला जायेगी कि किस तरह जमीन्दार लोगों की पूरी की पूरी जमीन और मकान हड़प लेते थे, उसके बावजूद उसका कर्जा बकाया रहता था. इसकी कहानी हम विभिन्न माध्यमों से जानते हैं. तो अब उसी तर्ज पर नया जमींदार हमारा यह वित्तमंत्री अरूण जेटली ने सोमवार की आधी रात को यह जी0एस0टी0 (केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर) बिल लाया है.

इस प्रावधानों के अनुसार जेटली ने व्यवस्था दी है कि जिस कारोबारी के यहां जी0एस0टी0 बकाया रहेगा, उसके रूपये, पैसे, जमीन, जायदाद, धन-दौलत यहां तक कि उसके घर-बार तक पर पहला हक सरकार के वसूली विभाग का होगा. दूसरे अर्थ में कहा जाये तो अगर उसे किसी को उधार देने हैं या बैंक का कर्ज जमा करना है तो भी वो जी0एस0टी0 चुकाने के बाद अगर कुछ पैसे बच गये तो ही जमा करेगा. अगर उस कारोबारी को कहीं से कोई आय आने वाली भी है तो वह भी जी0एस0टी0 आॅथरिटी जब्त कर लेगी. यही नहीं उसकी बीमा राशि पर भी जी0एस0टी0 आॅथरिटी का ही कब्जा होगा.

जमींदार वित्तमंत्री जेटली के द्वारा पेश किये गये जी0एस0टी0 विधेयक, 2017 में जी0एस0टी0 वसूली के संबंध में ऐसे ही कड़े प्रावधान जोड़े गये हैं. केन्द्रीय जी0एस0टी0 की धारा 79 के अनुसार अगर किसी कारोबारी पर जी0एस0टी0 बकाया है तो उस कारोबारी के पोस्ट-आॅफिस और बैंकों के खाते सहित बीमा कंपनी आदि से मिलने वाली राशि से जी0एस0टी0 वसूला जायेगा. इसके अलावे जिस व्यक्ति पर जी0एस0टी0 बकाया है अगर वह अपनी संपत्ति बेच भी देता है तो केन्द्रीय जी0एस0टी0 के प्रावधान की धारा 81 की तहत वह बिक्री खारिज मानी जायेगी और सम्पत्ति पर सरकार का कब्जा हो जायेगा.

एक जुलाई से जी0एस0टी0 लागू होने पर अन्य अनेकों प्रकार की सेवाओं पर जी0एस0टी0 लागू की जायेगी. यहां तक कि मकान किराया पर देने, निर्माणाधीन मकान खरीदने के लिए चुकायी जा रही ई0एम0आई0 पर भी जी0एस0टी0 लागू होगा.

सवाल उठता है कि जी0एस0टी0 जैसे बिलों को आखिरकार अंधेरी रात में ही क्यों पारित कराया जाता है. स्वभाविक है अगर बिलों पर तय नियमानुसार बहस के टेबल पर लाया जायेगा तो काॅरपोरेट घरानों के सेवार्थ लाये जा रहे जी0एस0टी0 बिल की पोल आम जनता के बीच खुल जायेगी और संभावित कठिनाई पैदा हो जायेगी. यही कारण है कि शैतानी जनविरोधी जी0एस0टी0 बिल का भी आगमन शैतानों और भूत-प्रेतों की तरह रात के अंधेरों में हुआ है.

Previous Post

भ्रष्ट वेद प्रकाश का भाजपा में जाना

Next Post

भारतीय जनता पार्टी की निर्लज्जता, उदंडता और वहसीपन

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

भारतीय जनता पार्टी की निर्लज्जता, उदंडता और वहसीपन

Comments 1

  1. cours de theatre says:
    9 years ago

    Major thankies for the blog article.Really looking forward to read more. Great.

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘सुप्रीम’ कठघरे में मोदी और उसके दलाल एलजी

July 7, 2018

मजदूरों का लोंग मार्च राजनीतिक प्रतिरोध नहीं है

May 12, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.