Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 15 आदिवासियों की हत्या

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 9, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में नक्सल के नाम पर 15 आदिवासियों को मार कर आदिवासियों को भेंट किया हैं. देश के तमाम आदिवासी सरकार  की भेंट स्वीकार करें और 9 अगस्त धूमधाम से मनाये.

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 15 आदिवासियों की हत्या

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

यह वास्तविक जानकारी हैं. मैं परिजनों से मिला और लिख रहा हूं. कल जो लिखा था वह जानकारी सूत्रों से लिया गया था.

अभी 2018/9/ अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पुरे विश्व में मनाने वाले हैं. वाह रे मेरे विश्व के आदिवासी, तुम मनाने चले हो अपना दिवस, पूरे विश्व में मुलनिवासी खतरे में हैं. पूरे विश्व भर में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक भारत देश को कहा जाता हैं. भारत में एक राज्य हैं जिसे छत्तीसगढ़ राज्य कहते हैं. इस राज्य में बस्तर संभाग हैं जहांं मुलनिवासी यानी आदिवासी, माड़िया, मुरिया, गोंड, जंगलों में रहकर जीवन यापन करते हैं. इन मूलनिवासियों को भारत सरकार पुलिस प्रशासन के द्वारा नक्सली कहती हैं और आये दिन मारती है. कल सुबह 15 आदिवसियों को जिला सुकमा के मेहता पंचायत के चार गांव –

1) नुलकातोग से सात आदिवासी नाबालिक बच्चे थे. 1. हिड़मा मुचाकी/ लखमा 2. देवा मुचाकी/हुर्रा 3. मुका मुचाकी/ मुका 4. मड़कम हुंगा / हुंगा 5. मड़कम टींकू / लखमा 6. सोढ़ी प्रभू / भीमा 7. मड़कम आयता / सुक्का। इन सभी नाबालिकों की उम्र लगभग 14, 15, 16, 17 (परिजनों के बताए अनुसार) वर्ष हैं.

2)ग्राम गोमपाड़ से 1. मड़कम हुंगा / हुंगा 2.कड़ती हड़मा / देवा 3.सोयम सीता /रामा 4.मड़कम हुंगा / सुक्का 5. वंजाम गंगा / हुंगा 6. कवासी बामी / हड़मा.

3) ग्राम किनद्रमपाड़ से 1. माड़वी हुंगा / हिंगा.

4) ग्राम वेलपोच्चा से 1.वंजाम हुंगा / नंदा. ग्राम नुलकातोग से मड़कम बुधरी / रामा इस महिला को पैर में गोली मारे हैं, व ग्राम वेलपोच्चा से वंजाम हुंगा / नंदा को पुलिस ने पकड़ा हैं और इनामी नक्सली कह रही हैं.

इनके अलावा और तीन युवकों को पकड़ा हैं. कई गांव वालों को पुलिसकर्मियों ने दौड़ा-दौड़ा कर मारा हैं, जिनमें प्रेग्नेंट महिलाएं भी हैं. यह बात हमेंं तब पता चली जब मैं और सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी, रामदेव बघेल परिजनों से मिले. परिजनों ने अपनी पूरी व्यथा सोनी सोरी को सुनाई. चारों गांंव के ग्रामीणों का कहना है कि यह सारे ग्रामीण हैं कोई मुठभेड़ नहीं हुआ हैं. गांंव मेंं कोई नक्सली था ही नहीं. आप सब से मेरा अपील हैं कि आपको और सच्चाई जाननी हैं तो आप मेहता पंचायत के गोमपाड़ गांव में जा सकते हैं, और चारों गांव के ग्रामीणों से मिल सकते हैं.

यह वही ग्राम पंचायत मेहता हैं जहांं ग्राम गोमपाड़ हैं. 14/6/2016 जहांं मड़कम हिड़मे/ कोसा की पुत्री का बलात्कार कर नक्सल के नाम पर मार दिया गया. इस घटना के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी द्वारा 9 अगस्त क्रान्ति पर 15 अगस्त तक गोमपाड़ ग्राम तक देश के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर पदयात्रा किया गया और गोमपाड़ ग्राम में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया. इस गांंव के ग्रामीण आज भी मड़कम हिड़मे के न्याय के इंतजार में हैं, प्रकरण हाई कोर्ट बिलासपुर में हैं, पता नहीं जज फैसला सुना नहीं रहे हैं. दुबारा इस गांंव में सात ग्रामीणों को पुलिस ने मार दिया. हम गांंव के ग्रामीणों को कैसे विश्वास दिलाये की भारत देश में आदिवासियों के लिए लोकतंत्र, संविधान, कानून और मूलनिवासियों के रक्षक हैं ?

आज उन आदिवासियों की लाशें डॉक्टर शव परीक्षण के नाम पर चिकन, मटन की तरह काटेंगे और पालीथिन में बंद कर गांंव वालों को दे देंगे. गांव वाले कल से आये हुए हैं. कोन्टा के सड़कों में सोए हैं. आज भी शव लेने के लिए परिजन भटक रहे हैं. कब तक शव दिया जायेगा पता नहीं.

कल 15 आदिवासियों को मार कर पालीथिन में लाया गया है. आज छोटे – बड़े अखबारों में बड़े- बड़े अक्षरों में सुकमा पुलिस प्रशासन को शाबाशी मिल रही हैं कि जिला सुकमा की पुलिस ने 15 नक्सलियों को मारकर बहुत ही गौरवपूर्ण कार्य किया है. जिला सुकमा S.P. अभिषेक मीणा, डी. एम. अवस्थी, ए.डी.जे. नक्सल ऑपरेशन, इन सभी पुलिस अधिकारियों को माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह शाबाशी दे रहे हैं. कुछ दिन बाद इन पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जायेगा. शायद मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को यह नहीं पता कि मरने वाले नक्सली नहीं बल्कि मासूम आदिवासी युवा, युवती हैं.

पूरे भारत मे राष्ट्रवाद खतरे में हैं. राष्ट्रवाद का क्या अर्थ हैं ? क्या राष्ट्रवाद में भारत देश के आदिवासी नहीं आते ? B.J.P. की सरकार पूरे भारत में राष्ट्रवाद को समाप्त करना चाहती हैं और R.S.S. का गुंडाई साम्राज्य स्थापित करना चाहती हैं. क्या पुरे भारत के बुद्धिजीवी वर्ग देश मे धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद को समाप्त करने में B.J.P. का मदद करेंगे या बदलाव के लिए सरकार बदलेंगे ?

9 अगस्त को आदिवासी दिवस भारत देश और विश्व मेंं मनाया जाएगा और सुकमा जिले के चार गांंव गोमपाड़, किन्द्रेमपाड़, नुलकातोग, वेलपोच्चा के आदिवासी 15 आदिवासी युवा-युवतियों के मरने के मातम में रहेंगे. क्या ये गांंव और नक्सल के नाम पर मारे गए आदिवासी आपके समुदाय के नहीं हैं ? क्या ये गांंव आपके नहीं हैं ? आप सब आदिवासी दिवस किसके साथ मना रहे हैं ? आप उस सरकार के साथ मना रहे हैं जो आपके समाज, समुदाय और लोगों को नक्सल के बहाने से मार रही हैं. 

आज भारत देश में आठ करोड़ से नौ करोड़ आदिवासी, मूलनिवासी जीवन-यापन कर रहे हैं. देश के छत्तीसगढ़ राज्य में मुलनिवासी दिवस राज्य सरकार के प्रतिनिधित्व में रायपुर में मनाया जा रहा हैं, जिसका प्रतिनिधित्व केबिनेट मंत्री मा. केदार कश्यप, मा. विकास मरकाम उपाध्यक्ष अनु.जनजाति आयोग, मा. नंदकुमार साय अध्यक्ष राष्ट्रीय जनजाति आयोग, इनके अलावा कई आदिवासी नेता हैं जो कि इस दिवस का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं. कुछ नेता तो B.J.P. के हैं जो आदिवासियों की दलाली करते हैं. इन सभी नेताओं को पता है कि आदिवासियों के साथ क्या हो रहा हैं लेकिन करेंगे कुछ नहीं. इन नेताओं का काम ही है सरकार के तलवे चाटना. B.J.P. और R.S.S. के गुलाम बन चुके हैं कुछ आदिवासी नेता.

आठ करोड़ आदिवासियों में कुछ तो शिक्षित आदिवासी युवा हैं. समुदाय और मूलनिवासी समाज की रक्षा के लिए सामने आए जिससे समाज में हो रहे अन्याय को रोका जा सके या मैं ये मान लूंं की भारत देश के आठ करोड़ मूलनिवासियों के पास खून नहीं बल्कि भाजपा सरकार और R.S.S. द्वारा खून को पानी बना दिया गया हैं. देखते हैं भारत के आदिवासियों में अत्याचार से लड़ने की कितनी औकात हैं. “मनुष्य जीवन अत्याचारों के खिलाफ लड़ने के लिए ही हुआ हैं.”

  • लिंगाराम कोडाप्पी

Read Also –

न्यायपालिका की देख-रेख में आदिवासियों के साथ हो रहा अन्याय
गढ़चिरौली एन्काउंटर: आदिवासियों के नरसंहार पर पुलिसिया जश्न
सुकमा के बहाने: आखिर पुलिस वाले की हत्या क्यों?
दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ सुनियोजित साजिश कर रही है भाजपा
सेना, अर्ध-सेना एवं पुलिस, काॅरपोरेट घरानों का संगठित अपराधी और हत्यारों का गिरोह मात्र है
आदिवासियों के साथ जुल्म की इंतहां आखिर कब तक?
[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

[ प्रतिभा एक डायरी ब्लॉग वेबसाईट है, जो अन्तराष्ट्रीय और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर घट रही विभिन्न राजनैतिक घटनाओं पर अपना स्टैंड लेती है. प्रतिभा एक डायरी यह मानती है कि किसी भी घटित राजनैतिक घटनाओं का स्वरूप अन्तराष्ट्रीय होता है, और उसे समझने के लिए अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देखना जरूरी है. प्रतिभा एक डायरी किसी भी रूप में निष्पक्ष साईट नहीं है. हम हमेशा ही देश की बहुतायत दुःखी, उत्पीड़ित, दलित, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के पक्ष में आवाज बुलंद करते हैं और उनकी पक्षधारिता की खुली घोषणा करते हैं. ]

Tags: आदिवासीनक्सलमूलनिवासीराष्ट्रवाद
Previous Post

नीरव मोदी और राष्ट्रीय खजाने की लूट

Next Post

भारी महंगाई और पूंजीपतियों की ‘‘कठिन” ज़िन्दगी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

भारी महंगाई और पूंजीपतियों की ‘‘कठिन” ज़िन्दगी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

खुशहाल मध्यवर्ग का विश्वासघात

November 11, 2022

बिहार एक राज्य है लेकिन आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर इसकी हैसियत एक उपनिवेश से अधिक नहीं

August 17, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.