Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

ब्राह्मणवाद का नया चोला हिन्दू धर्म ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 6, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ब्राह्मणवाद का नया चोला हिन्दू धर्म ?

जो ब्राह्मण अपने आप को आर्य कहते थे, उन्हीं ब्राह्मणों ने 1922 में हिन्दू महासभा की स्थापना की और 1925 में आरएसएस की स्थापना की. 1922 तक जो ब्राह्मण अपने आप को आर्य कहते थे, उन्होंने अपने आप को हिंदू कहना शुरू कर दिया.

ब्राह्मणों का धर्म हिन्दू है और अब उन शूद्रों (ओबीसी) का धर्म भी हिन्दू हो गया है. गुलामों का धर्म और गुलाम बनाने वालों का धर्म एक नहीं हो सकता परन्तु आज ऐसा है और यही गम्भीर समस्या है, इसका समाधान करना होगा. हिन्दू शब्द ब्राह्मणों के किसी भी धर्म ग्रन्थों में उपलब्ध नहीं है. वेद, शास्त्र, स्मृति, पुराण उपनिषद इनमें कहीं पर भी हिन्दू शब्द नहीं है. हिन्दू शब्द आक्रमणकारी मुसलमानों का दिया हुआ शब्द है. ब्राह्मण लोग बाबर, हुमायूं को गाली देकर मस्जिद गिराते हैं इसलिए उन लोगों का दिया हुआ नाम पवित्र कैसे हो सकता है ? अगर बाबरी मस्जिद कलंक है तो मुसलमानों का दिया हुआ, हिन्दू नाम भी कलंक है. उसे क्यों स्वीकार किया जाता है ?




गीता में भी हिन्दू शब्द नहीं है. गीता में कहा गया है, यदा-यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत, इसके भारत शब्द को पूजने के बजाय आक्रमणकारी मुसलमानों के दिए हुए शब्द को क्यों पूजते हैं ? (भारत में आज 99 % मुसलमान आक्रणकारी मुसलमान नहीं है, वे एससी, एसटी, ओबीसी के धर्मान्तरित हुए हैं, इसलिए एससी, एसटी, ओबीसी, और धर्मान्तिरित अल्पसंख्यक एक ही खून के भाई भाई है). ब्राह्मण कहता है कि हिन्दू शब्द सिन्धू से बना है, इसका समर्थन करने के लिए कहते हैं कि पार्शियन भाषा में ‘स’ का उच्चारण ‘ह’ होता है इसलिए सिन्धू का हिन्दू उच्चारण हुआ. अगर बारहवीं शताब्दी में मुसलमानों ने यह शब्द दिया था तो ब्राह्मणों ने उस वक्त हिन्दू शब्द को क्यों नहीं स्वीकार किया ?

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

मुसलमान शासकों ने जब जजिया कर लगाया था, तब ब्राह्मणों पर जजिया कर लागू नहीं था, तो सिद्ध हो जाता है कि उस समय के ब्राह्मण हिन्दू शब्द को नहीं मानते थे, जो पहले अपने आप को हिन्दू नहीं मानते थे, वे आज अपने आप को हिन्दू क्यों मानते हैं ? ब्राह्मण उस समय हिन्दू शब्द को अस्वीकार इसलिए करते थे क्योंकि आक्रमणकारी मुसलमानों ने यह नाम दिया हुआ था और अरबी भाषा में इसका अर्थ है – पराजित, गुलाम, चोर, काला, लुटेरा इसलिए अपने आप को हिन्दू मानने से इन्कार कर दिया परन्तु वह अब अपने आप को हिन्दू क्यों मानते हैं ? यह अहम् सवाल है.

आप लोग शायद यह नही जानते होंगें कि गुजरात के ब्राह्मण दयानन्द सरस्वती ने 1875 में मुम्बई में जाकर आर्य समाज की स्थापना की थी. ब्राह्मण 1875 तक अपने को आर्य मानते थे. बाल गंगाधर तिलक ने लिखकर यह सिद्व किया कि ब्राह्मण आर्य हैं और आर्यों ने यहां की प्रजा को पराजित किया, यह बात गर्व से सिद्ध की. अगर ब्राह्मण आज भी अपने आप को आर्य कहते तो हमारा कार्य और आसान होता. हमारे लोग बाह्मणों के झांसे में न फंसते. जो ब्राह्मण अपने आप को आर्य कहते थे, उन्हीं ब्राह्मणों ने 1922 में हिन्दू महासभा की स्थापना की और 1925 में आरएसएस की स्थापना की. 1922 तक जो ब्राह्मण अपने आप को आर्य कहते थे, उन्होंने अपने आप को हिंदू कहना शुरू कर दिया.




सभी हिंदू धर्म ग्रंथ 1875 के पहले लिखे गये हैं, इसी कारण उनमें हिंदू शब्द नहीं आया है. 1875 से 1922 तक ऐसा क्या हुआ ? ऐसा कौन सा कारण हुआ कि ब्राह्मणों ने अपने आप को आर्य कहना बन्द करके हिंदू कहना शुरू किया ? 1875 से 1925 के 50 सालों में कोई बहुत गम्भीर बदलाव हुआ होगा जिस वजह से आरएसएस ने आर्य समाज बनाने के बजाय हिंदू समाज का नारा लगाया. इसका यह मतलब हुआ कि 1875 और 1922-25 के बीच में कोई ऐतिहासिक बदलाव हुआ होगा जिस वजह से ब्राह्मणों को अपने आप को आर्य कहना छोड़ देना पडा़, ऐसा क्यों हुआ ?

इसी बीच इग्ंलैण्ड में एडल्ट फ्रचाईस (प्रौढ़ मताधिकार) का आंदोलन शुरू हुआ. इसके पहले इग्लैंड में भी प्रौढ़ मताधिकार नहीं था. वहां जब आन्दोलन शुरू हुआ तो भारत के ब्राह्मणों को यह लगा कि यदि इग्लैण्ड में प्रौढ़ मताधिकार का अधिकार मान्य हो जायेगा तो चूंकि इण्डिया-ब्रिटिश इण्डिया है, इसलिए ब्रिटेन का हर कानून आज नहीं तो कल भारत में लागू होगा ही. इस तरह से प्रौढ़ मताधिकार भी भारत में लागू होगा और भारत में लागू हुआ तो भारत के प्रत्येक 21 साल के व्यक्ति को मताधिकार मिलेगा. भारत में शूद्र और अतिशूद्रों की संख्या 85 % है.




बहुसंख्यकों को वोट का अधिकार मिलेगा और लोकतंत्र में जिनकी बहुसंख्या होगी राज भी उसी का होगा. ब्राह्मण अल्पसंख्यक होने की वजह से उनको कुछ नहीं मिलेगा और उनका वर्चस्व खत्म हो जायेगा. प्रौढ़ मताधिकार का आन्दोलन इग्लैण्ड में चला और उसकी घंटी भारत में ब्राह्मणों के घर बजने लगी कि मामला बहुत खतरनाक है. ब्राह्मण अपने आप को आर्य मानते थे और आर्य की प्रचार थ्योरी यह थी कि आर्य लोग भगवान द्वारा चुने हुए लोग है, लोगों द्वारा उनको दुबारा चुनने की जरूरत नहीं है.

  • साथी आई. जे. राय





Read Also –

1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ ‘हिन्दू-धर्म’ शब्द
1857 के विद्रोह को प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कहने का क्या अर्थ है ?
मनुस्मृति : मनुवादी व्यवस्था यानी गुलामी का घृणित संविधान (धर्मग्रंथ)
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

नकदी मुक्त लेन-देन के खतरे

Next Post

हमारी लड़ाई ब्राह्मण से नहीं ब्राह्मणवाद से है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हमारी लड़ाई ब्राह्मण से नहीं ब्राह्मणवाद से है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कार्ल मार्क्स (1853) : भारत में ब्रिटिश शासन के भावी परिणाम

September 14, 2019

बुढ़े राजनीतिक कैदियों को समर्पित एक कविता

August 21, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.