Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 13, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

कोई भी देश कितना सफल है और वहां के लोग कैसे हैं, इसे आसानी से समझने के लिये उस देश के लोगों का महिलाओं और बच्चियों के प्रति उनका व्यवहार देखना चाहिये. रेप और गैंगरेप जैसे अपराध को खत्म करने के लिये पुरुषों की मानसिकता में बदलाव कितना आवश्यक है, कुछ शर्मनाक बयानों से जान लीजिये.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

तेलंगाना के कानून मंत्री हैदराबाद की डाॅक्टर के गैंगरेप और हत्या के बाद कहते हैं, ‘पीड़िता को अपनी बहन को फ़ोन करने के बजाय 100 पर कॉल करना चाहिए था.’

फ़िल्ममेकर डेनियल श्रवण कहते हैं कि प्रत्येक महिला को 100 डायल करने की जगह अपने साथ कंडोम लेकर चलना चाहिये ताकि अगर कोई रेप करना चाहे तो वह उस समय इसका इस्‍तेमाल कर सके. इससे रेप करने वाले की Sexual Desires पूरी हो जायेगी और वह महिला की हत्या नहीं करेगा.

इन्होंने तो सरकार को नसीहत भी दे डाली कि सरकार को ‘हिंसा के बिना बलात्कार’ योजना के बारे में सोचना चाहिये. इनके दिमाग की गंदगी लगभग पूरे पुरुष समाज को अभिव्यक्त करती है. इन्होंने जो सिलसिलेवार कहा वो एक वेबपेज से मैंने कॉपी किया है, उसे आप भी पढ़िये ! यथा –

  • 18 साल से ऊपर की महिलाओं को बलात्कार पर शिक्षित किया जाना चाहिये और उन्हें बताना चाहिये कि वो पुरुषों की यौन इच्छाओं को नकार नहीं सकतीं.
  • महिलाओं को अपने साथ कंडोम लेकर चलना चाहिये ताकि अगर कोई रेप करना चाहे तो वह उस समय उसका इस्‍तेमाल कर सकें.
  • रेप के दौरान पुरुष की इच्छायें पूरी नहीं होती इसलिये वह हत्‍या का विकल्प चुनता है. सरकार को ‘हिंसा के बिना बलात्कार’ योजना लानी चाहिये.
  • रेप को अपराध न मानकर पुलिस और महिला अधिकारों के संगठनों द्वारा नजरअंदाज़ किया जाना चाहिये ताकि बलात्कार करने वाला पीड़िता को मौत न दे.
  • बलात्कार गंभीर बात नहीं लेकिन हत्या अक्षम्य है. अतः रेप के बाद हत्या को रोकना ज़्यादा ज़रूरी है.
  • महिलाओं की सुरक्षा केवल कंडोम के साथ ही संभव है निर्भया एक्ट के ज़रिये नहीं.

इससे पहले भी मुलायम सिंह से लेकर तमाम बड़े नेताओं के ऐसे बयां अलग-अलग रेप केसों में आ चुके हैं, जिससे पुरुष समाज की मानसिकता की झलक स्पष्ट ही मिलती है. और इसीलिये पुरुष समाज की मानसिकता में बदलाव होना जरूरी है और इसके लिये लड़की को गाय और लड़के को आवारा सांड वाले नियम से अलग करना होगा और दोनों के लिये एक ही मानक बनाने होंगे.

स्त्रियों को अपनी सुरक्षा के लिये पेपर स्प्रे, चाकू, लाल मिर्च पाउडर और संभव हो रिवॉल्वर साथ रखना चाहिये तथा हरेक माँ बाप को अपनी बेटी को मार्शल-आर्ट (जुडो-कराटे, कुंग-फु, किक बॉक्सिंग इत्यादि) की ट्रेनिंग बचपन से ही दिलवानी चाहिये बल्कि मेरे हिसाब से हर लड़की और महिला को जरूरी तौर पर (चाहे वो किसी भी उम्र की हो) सरकार द्वारा उन्हें जरूरी तौर पर अपनी सुरक्षा के लिये मुहल्ला ट्रेनिंग कैंप के जरिये फ्री ट्रेनिंग देनी चाहिये.

मैं देश की बेटियों को इतना बर्बर बनाना चाहता हूंं कि वो हर उस आदमी को जान से मार डालें जो उनका नागरिक या प्राकृतिक अधिकार छीनना चाहे. उसमें वो ताकत हो कि वो किसी मर्द के भरोसे ना रहें और खुद फैसला करे और उसमें इतना विवेक भी हो कि वो पुरूष के लिये संजने-संवरनेवाला एक शरीर बनकर न जिये बल्कि उसमें हर उस ऐसी जबान को काटने की क्षमता रखती हो जो उसके बारे में अनाप-शनाप अनर्गल बयानबाजी करता हो.

Read Also –

अन्त की आहटें – एक हिन्दू राष्ट्र का उदय
तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो
महिलाओं के खिलाफ हिंसा में पुलिसकर्मियों की भूमिका और आम जनों का प्रतिशोध
महिलाओं के प्रश्न पर लेनिन से एक साक्षात्कार : क्लारा जे़टकिन
बलात्कार एक सनातनी परम्परा

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

ये बहुत बुरे दौर का अंदेशा है…

Next Post

अनपढ़ शासक विशाल आबादी की नजर में संदिग्ध हो चुका है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

अनपढ़ शासक विशाल आबादी की नजर में संदिग्ध हो चुका है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

NRC संविधान की बुनियादी अवधारणा के खिलाफ

September 22, 2019

आंदोलन, आंदोलनजीवी बनाम सत्ता कब्जा की लड़ाई

February 16, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.