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Home गेस्ट ब्लॉग

रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 13, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

कोई भी देश कितना सफल है और वहां के लोग कैसे हैं, इसे आसानी से समझने के लिये उस देश के लोगों का महिलाओं और बच्चियों के प्रति उनका व्यवहार देखना चाहिये. रेप और गैंगरेप जैसे अपराध को खत्म करने के लिये पुरुषों की मानसिकता में बदलाव कितना आवश्यक है, कुछ शर्मनाक बयानों से जान लीजिये.

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तेलंगाना के कानून मंत्री हैदराबाद की डाॅक्टर के गैंगरेप और हत्या के बाद कहते हैं, ‘पीड़िता को अपनी बहन को फ़ोन करने के बजाय 100 पर कॉल करना चाहिए था.’

फ़िल्ममेकर डेनियल श्रवण कहते हैं कि प्रत्येक महिला को 100 डायल करने की जगह अपने साथ कंडोम लेकर चलना चाहिये ताकि अगर कोई रेप करना चाहे तो वह उस समय इसका इस्‍तेमाल कर सके. इससे रेप करने वाले की Sexual Desires पूरी हो जायेगी और वह महिला की हत्या नहीं करेगा.

इन्होंने तो सरकार को नसीहत भी दे डाली कि सरकार को ‘हिंसा के बिना बलात्कार’ योजना के बारे में सोचना चाहिये. इनके दिमाग की गंदगी लगभग पूरे पुरुष समाज को अभिव्यक्त करती है. इन्होंने जो सिलसिलेवार कहा वो एक वेबपेज से मैंने कॉपी किया है, उसे आप भी पढ़िये ! यथा –

  • 18 साल से ऊपर की महिलाओं को बलात्कार पर शिक्षित किया जाना चाहिये और उन्हें बताना चाहिये कि वो पुरुषों की यौन इच्छाओं को नकार नहीं सकतीं.
  • महिलाओं को अपने साथ कंडोम लेकर चलना चाहिये ताकि अगर कोई रेप करना चाहे तो वह उस समय उसका इस्‍तेमाल कर सकें.
  • रेप के दौरान पुरुष की इच्छायें पूरी नहीं होती इसलिये वह हत्‍या का विकल्प चुनता है. सरकार को ‘हिंसा के बिना बलात्कार’ योजना लानी चाहिये.
  • रेप को अपराध न मानकर पुलिस और महिला अधिकारों के संगठनों द्वारा नजरअंदाज़ किया जाना चाहिये ताकि बलात्कार करने वाला पीड़िता को मौत न दे.
  • बलात्कार गंभीर बात नहीं लेकिन हत्या अक्षम्य है. अतः रेप के बाद हत्या को रोकना ज़्यादा ज़रूरी है.
  • महिलाओं की सुरक्षा केवल कंडोम के साथ ही संभव है निर्भया एक्ट के ज़रिये नहीं.

इससे पहले भी मुलायम सिंह से लेकर तमाम बड़े नेताओं के ऐसे बयां अलग-अलग रेप केसों में आ चुके हैं, जिससे पुरुष समाज की मानसिकता की झलक स्पष्ट ही मिलती है. और इसीलिये पुरुष समाज की मानसिकता में बदलाव होना जरूरी है और इसके लिये लड़की को गाय और लड़के को आवारा सांड वाले नियम से अलग करना होगा और दोनों के लिये एक ही मानक बनाने होंगे.

स्त्रियों को अपनी सुरक्षा के लिये पेपर स्प्रे, चाकू, लाल मिर्च पाउडर और संभव हो रिवॉल्वर साथ रखना चाहिये तथा हरेक माँ बाप को अपनी बेटी को मार्शल-आर्ट (जुडो-कराटे, कुंग-फु, किक बॉक्सिंग इत्यादि) की ट्रेनिंग बचपन से ही दिलवानी चाहिये बल्कि मेरे हिसाब से हर लड़की और महिला को जरूरी तौर पर (चाहे वो किसी भी उम्र की हो) सरकार द्वारा उन्हें जरूरी तौर पर अपनी सुरक्षा के लिये मुहल्ला ट्रेनिंग कैंप के जरिये फ्री ट्रेनिंग देनी चाहिये.

मैं देश की बेटियों को इतना बर्बर बनाना चाहता हूंं कि वो हर उस आदमी को जान से मार डालें जो उनका नागरिक या प्राकृतिक अधिकार छीनना चाहे. उसमें वो ताकत हो कि वो किसी मर्द के भरोसे ना रहें और खुद फैसला करे और उसमें इतना विवेक भी हो कि वो पुरूष के लिये संजने-संवरनेवाला एक शरीर बनकर न जिये बल्कि उसमें हर उस ऐसी जबान को काटने की क्षमता रखती हो जो उसके बारे में अनाप-शनाप अनर्गल बयानबाजी करता हो.

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