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सुप्रीम कोर्ट का जज अरुण मिश्रा पर गौतम नवलखा का हस्ताक्षर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 17, 2020
in ब्लॉग
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सुप्रीम कोर्ट का जज अरुण मिश्रा पर गौतम नवलखा का हस्ताक्षर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मारकण्डेय काटजू जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की मोदीभक्ति में गाते चारणगीत पर करारा व्यंग्य करते हुए 22 फरवरी को ट्वीट किया था कि ‘सुप्रीम कोर्ट का जज कैसा हो, अरुण मिश्रा जैसा हो’, तब उन्हें यह गुमान न रहा होगा कि जल्दी ही इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ जायेगा, वो है पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का.

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Supreme Court ka Judge kaisa ho ?
Arun Mishra jaisa ho

— Markandey Katju (@mkatju) February 22, 2020

सेक्स कांड में फंसे हुए भाजपा की चमचागिरी करने वाले लालची सर्वोच्च न्यायालय का भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई संघी-भाजपाई एजेंट निकला और देेश के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति द्वारा उसे राज्यसभा का सदस्य बना दिया गया है. सवाल है यह संघी-भाजपाई ऐजेंट सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनकर किसकी सेवा कर रहे थे ?

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश रहे. उन्होंने देश के प्रधान न्यायाधीश का पद 3 अक्टूबर 2018 से 17 नंवबर 2019 तक संभाला. करीब 13 महीने तक चीफ जस्ट‍िस रहे जस्ट‍िस गोगोई पिछले वर्ष नवंबर में रिटायर हुए हैं, और अब उन्हें भाजपा सरकार द्वारा राज्यसभा का सांसद बना कर पुरस्कृत किया गया है, तो निश्चित तौर पर अब विगत 13 महीनों में उनके द्वारा लिये गये फैसलों की समीक्षा होनी चाहिए कि अपनी लालच में उन्होंने किस किस को और किस रूप में अपने पद का लाभ पहुंचाया ?

राफ़ेल मामले में फ़ैसला देकर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराने वाले पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगई को राज्य सभा भेजकर भाजपा ने “सेवा का मेवा” दिया है।

— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) March 17, 2020

बहरहाल केन्द्र की संघी सरकार के चरणों में चारणगीत गाने वाले सुप्रीम कोर्ट के एक और संघी एजेंट जज अरुण मिश्रा ने प्रसिद्ध कोरेगांंव मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की अग्रिम ज़मानत ख़ारिज कर दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के शाख पर बट्टा लगना तब शुरू हुआ था जब मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा केन्द्र की संघी सरकार के चरणों में लोट लगाना शुरू कर दिया था. और इस पर मुहर तब लग गई जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दीपक मिश्रा की कार्यकलापों पर सवाल उठाये.

चार जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ साथ जस्टिस अरुण मिश्रा के कार्यकलापों के खिलाफ भी था. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ सुप्रीम कोर्ट के जजों की मुलाकात के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा यह कहते हुए रो पड़े कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले चारों न्यायाधीशों द्वारा उन्हें गलत तरह से निशाना बनाया जा रहा है. सवाल जस्टिस लोया की हत्या के मुकदमे को औने पौने दबाने या बरगलानेे का था.

रीढ़विहीन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा विशुद्ध संघी एजेंट है. संघी मोदी का चारणगीत गाने वाले अरुण मिश्रा ने देश के बुद्धिजीवियों पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में सरेंडर से पहले नवलखा ने देशवासियों के नाम तमाम मीडिया संस्थानों के जरिए एक खत लिखा है. जो देश की दलाल न्यायपालिका के चरित्र पर करारा हस्ताक्षर है.

मैं शुक्रगुज़ार हूँ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा और एमआर शाह का जिन्होंने मुझे एनआईए के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए 3 हफ़्ते का वक़्त दिया है. मैं उच्च वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल का भी शुक्रगुज़ार हूंं जिन्होंने हमारा पक्ष रखा. इसके साथ ही मेरे क़रीबी दोस्तों-वकीलों का भी शुक्रिया जिन्होंने अपना क़ीमती वक़्त मेरा पक्ष रखने में लगाया.

अब जबकि मुझे 3 हफ़्ते के अंदर आत्मसमर्पण करना है, मैं ख़ुद से सवाल कर रहा हूंं : क्या मैं ऐसी उम्मीद करने की हिम्मत भी कर सकता हूंं कि मैं मुलज़िम होने के बोझ से आज़ाद हो पाऊंंगा, या ये कार्यवाही भी एक साज़िश बन कर रह जाएगी और लंबित पड़े तमाम ऐसे मामलों में शामिल हो जाएगी ? क्या सह-मुलज़िम और उनके जैसे और लोगों को अपनी आज़ादी वापस मिल सकेगी ? ये सवाल इसलिए कौंधते हैं क्योंकि हम ऐसे वक़्त में जी रहे हैं जहांं सामाजिक अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है, और जहांं सिर्फ़ एक नरेटिव काम कर रहा है, जिसे सार्वजनिक ज़िंदगी के भद्देपन की शह मिली हुई है.

यूएपीए के इस भयानक क़ानून के पास यह अधिकार है कि यह किसी संगठन और उसकी विचारधारा पर प्रतिबंध लगा सकता है. लिहाज़ा, सबसे ग़ैर-हानिकारक और जायज़ बातचीत भी सरकार की नज़र में ग़ैर-क़ानूनी बन जाती है. यूएपीए ऐसा भयानक क़ानून बन गया है, जो कार्यवाही या उसके नतीजे का इंतज़ार किए बग़ैर सज़ा दे सकता है इसलिए मैं जानता हूंं कि मैं उन हज़ारों में शामिल हो गया हूँ, जिनका उनकी सोच की वजह से शोषण होता है.

मेरे हिसाब से ‘टेस्ट क्रिकेट’, क्रिकेट का सबसे अच्छा फ़ॉर्म है, जहांं सहन-शक्ति, धैर्य, फ़ेयर प्ले, साहस और खुलने (redemption) से खेल की शोभा बढ़ती है. यही वो गुण हैं, जिनकी उम्मीद मैं ज़िंदगी के इस ‘टेस्ट मैच’ में ख़ुद से करता हूंं. मेरे ऊपर सबसे ज़्यादा दबाव ख़ुद को निर्दोष साबित करने का है.

मेरे दोस्तों, साथियों और परिवार का शुक्रिया, जो इस दौरान मेरे साथ खड़े रहे. मैं आप सब का क़र्ज़दार हूंं. लियोनार्ड कोहेन की आवाज़ में गाना ‘Anthem’ सुनिएगा.

घंटी बजाओ
वो अब भी बज सकती है
भूल जाओ
अपनी बेशकीमती नेमतों को
हर चीज़ में दरार है
हर एक चीज़ में
लेकिन रोशनी वहीं से आती है!

गौतम नवलखा
16 मार्च, 2020
नई दिल्ली

गौतम नवलखा का भारतीय न्यायपालिका खासकर सुप्रीम कोर्ट के चेहरे और चरित्र पर यह हस्ताक्षर इस मायने में और भी महत्वपूर्ण बन जाता है जब इसी भ्रष्ट दलाल सुप्रीम कोर्ट के जज के आदेश पर जेल में बंद एक महिला वकील और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को हार्वर्ड लॉ स्कूल की ओर से सम्मानित किया जाता है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कॉलेज के पोर्ट्रेट एक्ज़िबिट (फोटो प्रदर्शनी) में जगह दी जाती है.

न्यायपालिका एक वाशिंग मशीन बन गई है जो पद, पैसे या खौफ के कारण भारतीय न्याय प्रणाली को कलंकित कर रही है, जो एक तड़ीपार के ईशारे पर नाच रही है और देश के बुद्धिजीवियों, कलाकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत देश की मेहनतकश जनता के खिलाफ खड़ी हो रही है. दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई, अरुण मिश्रा इसी कलंकित होती न्यायपालिका का शव है, जो अब दुर्गंध दे रही है और इस जैसे शवों को ससमय खत्म नहीं किया गया तो यह समाज, देश सड़ जायेगा.

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