Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जसवंत सिंह : दंगाइयों के जमावड़े के बीच नीलकंठ

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 27, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जसवंत सिंह : दंगाइयों के जमावड़े के बीच नीलकंठ

जी हां, दंगाइयों के जमावड़े में एक बहादुर ऐसा था, जिसने ताजिंदगी बदनामी के धब्बे को स्वीकारते हुए नीलकंठ बनना स्वीकार किया। उस तस्वीर में भारत का प्रतिनिधि बनना स्वीकार किया, जब हिंदुस्तान की सर्वसशक्तिमान सरकार चंद आतंकियों के सामने सरेंडर कर रही थी।
–
नई सहस्त्राब्दी करवट बदलने को थी, और जसवंत सिंह घर मे नए मेहमान का स्वागत कर रहे थे। पोती हुई थी, परम्परानुसार उसका मुंह मीठा कराने पहुंचे भारत के विदेशमंत्री जसवंत को खबर मिली- यात्रियों से भरा हवाई जहाज हाईजैक हो गया है।

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

IC-814 अमृतसर छोड़ते ही भारत के हाथों से निकल गया था। एक घण्टे तक सांप सूंघी हुई सरकार अब लकीर पीट रही थी। जहाज निकला तो लाहौर पहुंचा, मगर उतरने की इजाजत न मिली। दुबई की ओर मुड़ा। फ्यूल खत्म हो रहा था, भारत ने किसी तरह दुबई से इजाजत ली। दुबई के दूसरे, कम व्यस्त एयरपोर्ट पर रात को जहाज उतरा। अलग खड़ा रहा।

कुछ बरस पूर्व भारत गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि, और प्रधानसेवक के अभिन्न मित्र, शहजादे MBZ ने दुबई स्थित भारतीय अधिकारियों को न नेगोशिएट करने की इजाजत दी, न ऑपरेशन करने की। अलबत्ता CNN को इजाजत मिली, जो रातभर भारत की उतरती इज्जत लाइव दिखाता रहा। एक तिहाई यात्री और एक लाश, फ्यूल के बदले उतार दी गयी। अलसुबह जहाज ने दुबई छोड़ा, वह कन्धार पहुंच गया।

दिशाहीन नेतृत्व, दुबई की फुटेज और मिडीया की सनसनी से फैले पैनिक के बीच जसवंत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यात्रियों के रिश्तेदार घुस गए। ख्वाबों में बाबर से लड़ने वाली जनता, असलियत में तालिबान और 5 हाईजैकर्स के सामने भारत के घुटने टेक जाने में कोई बुराई नही देख रही थी। आज गोलियों से मा भारती की आरती करने का हामीदार मध्यवर्ग तब हांफते हुए गुहार लगा रहा था – ” लेट देम टेक व्हाट दे वांट” । मामला उनके घरों का जो था।

तो नेगोशियशन चले। पाकिस्तान की शह पर पाकिस्तान के हाईजैकर्स ने, कन्धार की जमीन से, भारत की जेलों में बंद 30 आतंकी मांगे। अंततः तीन पर सौदा हुआ। पाकिस्तानी मौलाना मसूद अजहर, जो कश्मीर में आपस मे झगड़ रही तंजीमो के बीच सुलह कराने भेजा गया था। उसका भाई खुद हाईजैकर था, सारा मामला उसके लिए ही बना था। उमर शेख, जो इंटनेशनल टेरेरिस्ट फिगर था। पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट में उसके परिवार के ऊंचे सम्पर्क थे।

दो पाकिस्तानी के बाद तीसरा एक कश्मीरी नाम लेना मजबूरी थी। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मुश्ताक अहमद जरगर को फाइनल किया। यह वही आदमी था, जो पहले भी रुबाइया सईद के बदले एक बार छोड़ा जा चुका था। तो तीन आतंकी और भारत की इज्जत एक हवाई जहाज में लादकर कन्धार में सरेंडर की जानी थी। यह अप्रिय काम करने वाला, जीवन भर के लिए अपमानित होने वाला था।

फैसला जाहिर है, पूरी कैबिनेट का था। मगर शर्म तारी थी। आगे चलकर लौह पुरुष, उपप्रधानमंत्री, और नम्बर 2 रहे आडवाणी भी इस फैसले की जिम्मेदारी से ही पल्ला झाड़ लेने वाले थे। इस वक्त जहर को पीने, राजस्थान का यह वीर आगे आया। दो जोड़ी कोट,एक गीता और एक रुद्राक्ष बैग में डालकर वह कन्धार पहुंचे। उन शर्मनाक तस्वीरों का हिस्सा बने। अपने किये कराए का जिम्मा औरो पर डालने वालो के दल में, यह बहादुरी रेयर है।

31 दिसम्बर को, सात दिनों बाद वह फ्लाइट अपने गंतव्य पालम एयरपोर्ट पर लौटी। जसवंत उसी जहाज में आये। सबसे पहले उतरे, और सीढियों के नीचे तब तक खड़े रहे, जब तक आखरी यात्री ने सुरक्षित भारत भूमि पर कदम न रख दिये।
—
जसवंत उस ब्रीड के नेता है, जिन्होंने अटल युग मे अटल को मजबूती दी। यशवंत और जसवंत ने विदेश और वित्त बारी बारी सम्भाला। घटिया धार्मिक राजनीति से दूर, जिम्मेदार, स्वत्रन्त्र चिंतक, डाउन टू अर्थ, सीरियस एडमिनिस्ट्रेटर थे।

कारगिल, ऑपरेशन पराक्रम, बम, बस, अमेरिकी प्रतिबन्ध, संसद पर आतंकी हमले और IC-814 के दौर में यह कुर्सियां कांटो से भरी थी। बदनामियाँ इनके खाते में गयी, उपलब्धि अटल के..।

इसलिए ये नीलकंठ हैं।
—
जसवंत के पुत्र मानवेन्द्र ने एक आर्टिकल में लिखा- 2016-17 के दौरान वे पिता के साथ NDTV की एक बहस देख रहे थे। इस दौरान अपहृत जहाज में शामिल एक महिला, स्टूडियो में दर्शकों के बीच थी। बार बार बहस में बड़ी मजबूत बातें कर रही थी। उसका कहना था कि देश ने आतंकियों को छोड़कर गलत किया। भली अंग्रेजी में उसने तालियां लूटीं।

टीवी पर बहस देखते हुए जसवंत ने मानवेन्द्र को बताया- यह लेडी उस जहाज में सबसे ज्यादा हिस्टिरिकल (बदहवास) थी। जब मैं जहाज पर पहुचा तो यह मेरे सीने से आकर लग गयी और कहा, ‘आपने इतनी देर क्यों लगा दी ?’

  • मनीष सिंह
Previous Post

हिन्दू और मुस्लिम दोनों का मूल स्वभाव है – लड़ना

Next Post

प्रकृति से प्रेम करो ना

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

प्रकृति से प्रेम करो ना

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अब वे झुंड में आयेंगे

June 25, 2020

यह परछाई आपको खा जाएगी एक दिन…

September 1, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.