Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कल्याण सिंह : सांप्रदायिक राजनीति इसकी उपलब्धि जिसकी क़ीमत कल्याण सिंह नहीं, आपके बच्चे चुकाएंगे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 23, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कल्याण सिंह : सांप्रदायिक राजनीति इसकी उपलब्धि जिसकी क़ीमत कल्याण सिंह नहीं, आपके बच्चे चुकाएंगे
15 अगस्त के दिन भाजपा कार्यालय पर भाजपा का झंडा, राष्ट्रीय ध्वज से भी ऊपर लगाया गया. जिस पर तमाम लोगों ने आपत्ति जताई. आज और भी अधिक आगे बढ़ते हुए भाजपा ने तिरंगे के ऊपर अपना झंडा रख दिया है. आख़िर भाजपा के झंडे की यहां ज़रूरत ही क्या थी ? और वो भी तिरंगे के ऊपर रखा गया. According to flag code of India ‘No other flag should be placed higher than or above or side by side with the National Flag.’ हिंदी में कहें तो ‘किसी दूसरे ध्वज या पताका को राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाएगा.’ ये ऐसी चीज़ है जो देखते ही अजीब और आपत्तिजनक लग रही है. लेकिन PM मोदी से लेकर CM योगी तक ने इसे नज़रअन्दाज़ किया. भाजपा को इस बात को कान में डाल लेना चाहिए कि भाजपा के झंडे की इतनी औक़ात नहीं है कि वो राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर रखा जाए.
Shyam Mira Singhश्याम मीरा सिंह

कल्याण सिंह को उनके समर्थक इस तरह याद कर रहे हैं :

  • हिंदू हृदय सम्राट
  • राम मंदिर के लिए अपनी गद्दी त्यागने वाले
  • बाबरी मस्जिद ढहाने वाले

संविधान कहता है – राज्य किसी भी धर्म के साथ भेदभाव नहीं करेगा. ऊपर की चीजों से पता चलता है कि उन्होंने संविधान और देश के मूल्यों से ग़द्दारी की. कल्याण सिंह बाबरी विध्वंस के गुनहगार थे, ये गुनाह उन्होंने खुद क़बूल किया. मुझे अफ़सोस है कि इस देश की अदालतें इतनी कमजोर रही कि उन्हें जीते जी इसकी सजा नहीं मिली. वे अपने अंतिम समय में राज्यपाल को मिलने वाले ‘राजभवन’ में रहे जबकि वे एक अपराधी को मिलने वाली ‘जेल’ में रहना डिज़र्व करते थे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

कल्याण सिंह नहीं रहे, उनके परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं हैं. भगवान से प्रार्थना है कि कुछ बड़प्पन दिखाए और उनके किए के लिए उन्हें माफ़ कर दे. उनकी राजनीति ने हज़ारों निर्दोष हिंदू-मुसलमानों को दंगों में धकेला, परिणामतः तीस साल बाद आज भी भारत जैसा गरीब मुल्क अस्पताल, स्वास्थ्य, शिक्षा से भटककर ‘मंदिर’ नफ़रत और सांप्रदायिकता में उलझा हुआ है.

भगवान राम पर मेरी पूरी श्रद्धा है. उनके नाम पर दंगे करने वाली, उनके नारे लगाकर हत्या करने वाली भीड़ और उसके नेताओं को वे माफ़ कर देंगे. हालांकि आपत्ति भी उन्हें ही होनी चाहिए. जो गुण भगवान राम के हमें बताए गए, उनके नाम पर राजनीति करने वालों ने उन सब गुणों की धज्जियां उड़ाईं.

मुझे मालूम है ये वक्त उनके परिवार के लिए मुश्किल वक्त है, लेकिन मुझे ये भी मालूम है कि ये बताया जाए कि सांप्रदायिक राजनीति की पगडंडियों पर चढ़कर आप मुख्यमंत्री बन सकते हैं मगर सदा के लिए नहीं जी सकते. एक न एक दिन आप इस दुनिया से विदा लेते ही हैं. अंततः यही गिना जाएगा कि आपके होने से कितनों को मुस्कुराने का मौक़ा दिया. आपके होने से कितनों ने अपने आंसू पोंछे.

दोनों ही मसलों पर कल्याण सिंह की राजनीति ने निराश किया. न केवल निराश किया बल्कि उनकी राजनीति ने लाखों लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया. किसी विश्वविद्यालय, सड़क, अस्पताल का नाम, कल्याण सिंह को याद करने पर ज़ेहन में नहीं आते, आते हैं तो एक मंदिर, एक मस्जिद. एक दूसरे के खून के लिए प्यासी भीड़. इसके सिवाय उनका कोई योगदान ज़ेहन में नहीं आता.

इसलिए ज़रूरी है कि इस बात के स्मरण के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी जाए कि उनके किए ने लाखों मासूमों की जिंदगियों को बर्बाद कर दिया. हज़ारों हिंदू और लाखों मुसलमानों की जिंदगियां उनकी राजनीति के चलते तबाह हुईं. तमाम शिकायतों, प्रश्नों, जिज्ञासाओं को कुछ वक्त के लिए स्थगित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूं. उनके अच्छे के लिए दुआ करता हूं. हमें नहीं सिखाया गया कि जाते हुए इंसान के लिए हमेशा नाराज़गी रखें. उन्हें और अधिक उम्र मिलती तो शायद अपने किए पर वे दोबारा से विचार करते.

कल्याण सिंह 10 बार MLA रहे, 2 बार CM, फिर MP बने. 2 बार राज्यपाल रहे. जवानी से लेकर बुढ़ापे तक जनता के पैसे पर ऐश की. बेटा राजवीर सिंह, MLA बने, स्वास्थ्य मंत्री बने, 2 बार से MP हैं. कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह भी विधायक बने, अब प्रदेश में मंत्री हैं. बाबा, बेटा, पोते तीनों जनता के पैसे पर मौज लिए.

कल्याण सिंह की राजनीति को ता-उम्र दंगे भड़काने की राजनीति के रूप में याद किया जाता रहा. यही योगदान उनके बेटे राजवीर ने इस समाज के लिए दिया. मैं एटा में ETV भारत के लिए एक महीने रिपोर्टर रहा था, आम जनता कासगंज दंगे में कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह की भूमिका खुले में स्वीकारती थी जबकि दंगों के बाद जेल में गए हिंदुओं के परिवारों को उनकी कोई मदद नहीं मिली.

कल्याण सिंह ने ता-उम्र सत्ता का आनंद लिया. उनके बेटे, पोते से लेकर उनके रिश्तेदार भी खुलकर सत्ता का आनंद ले रहे हैं, दिल्ली की सबसे महंगी और संवेदनशील जगह पर उनके बेटे का सांसद आवास है. उनके पोते को लखनऊ में बड़ा-सा सरकारी आवास मिला हुआ है लेकिन उनकी राजनीति से आपके बच्चों को क्या मिला ?

कल्याण सिंह को याद करने पर कोई स्कूल, अस्पताल, हाईवे, रिसर्च सेंटर याद नहीं आता. उन्हें याद करने पर सिर्फ़ एक घटना याद आती है जिसने इस देश को दो हिस्सों में बांट दिया. जिसने ऐसा सांप्रदायिक बीज बोया कि एक हिस्सा हाशिए पर चला गया और दूसरा हिस्सा धर्मांध हो गया. आज सारे मुद्दे भूलकर भारत की संसद को दंगाइयों, सांप्रदायिक नेताओं से भरा जा रहा है. इसकी क़ीमत कल्याण सिंह नहीं, आपके बच्चे चुकाएंगे.

लोग कह रहे हैं कल्याण सिंह के लिए आज के दिन तो ऐसा न लिखते. जबकि खुद कल्याण सिंह सांप्रदायिक राजनीति को ही अपनी उपलब्धि बताया करते थे. उनके जाने के बाद उनकी ही उपलब्धि को बताना कोई अपराध नहीं है. जो मैंने कहा उसे वे मंच पर कहते थे. जब उन्होंने करवाए ही दंगे हैं तो उसे लव स्टोरी कैसे लिख दें ?

Read Also –

सुषमा स्वराज : मृत्यु किसी को महान नहीं बनाती
कालजयी अरविन्द : जिसने अंतिम सांस तक जनता की सेवा की

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

‘मदाथी : अ अनफेयरी टेल’ : जातिवाद की रात में धकेले गए लोग जिनका दिन में दिखना अपराध है

Next Post

दुनिया में मुसलमानों के पतन के कारण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

दुनिया में मुसलमानों के पतन के कारण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

समय

November 15, 2021

कैमूर का उपेक्षित शिलालेख : भारत के इतिहास मिटाने की यह सचेतन कोशिश है

June 24, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.