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ड्रग्स का कारोबार : मोदी सरकार के निजीकरण का भयावह चेहरा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 22, 2021
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ड्रग्स का कारोबार : मोदी सरकार के निजीकरण का भयावह चेहरा

सुबह का समय था. पटना के एक सड़क पर खड़ा होकर चाय पी रहा था, तभी देखता हूं कि सामने के रास्ते से एक ठेला चला आ रहा है. उस ठेले पर एक सालह वर्षीय लड़का लेटा हुआ था और उसके पीछे एक स्त्री और एक पुरूष आ रहा था. थोड़ा नजदीक आने पर पता चला कि उस लड़के की मृत्यु हो चुकी है और पीछे आने वाले स्त्री-पुरूष उसके माता और पिता हैं. लड़के की मृत्यु का कारण पूछने पर पता चला कि वह लड़का ड्रग का नशा करता था, संभवतः हेरोइन. बीती रात वह नाली में गिरा पड़ा मिला. उसके परिजनों ने उसे पटना के पीएमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया था और डॉक्टर ने बाद में उसे मृत घोषित कर दिया, जिसके शव को अहले सुबह उसके माता-पिता लेकर घर जा रहे हैं.

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एक जवान बेटे की ड्रग्स से हुई मौत के बाद भी उसके माता-पिता रो नहीं पा रहे थे, वजह यह बताया गया था कि अगर वह रोयेगे तो पुलिस आ जायेगी, फिर उसे गिरफ्तार कर लिया जायेगा. पुलिस केस के डर से वह माता-पिता आनन-फानन में चुपचाप शव को ले जाकर अंतिम संस्कार कराया. न कहीं शोर, न कहीं चिल्लाहट. चुपचाप शांति से निपट गया वह लड़का.

पटना के एक मुहल्ले के एक दुकानदार अपनी किस्मत को रोते हुए बता रहा था कि ‘सर, सुबह से रात तक दुकान खोल कर रखता हूं, लेकिन कमाई ही नहीं हो पा रही है.’ बरसाती पानी में आधी डुबी सामने खड़ी एक कार को दिखाते हुए वह दुकानदार आगे कहता है, ‘वह कार देख रहे हैं न, एक ड्रग्स माफिया का कार है. वह जमीन भी उसी की है. उसके आगे जो चार मंजिला मकान आपको दीख रहा है, वह उसी का है. मात्र चार साल में उसने यह घर बनाया है. कई गाड़ियां है उसके पास. यह सब उसने ड्रग्स को बेचकर बनाया है.’

मैंने सोचा बिहार की राजधानी पटना होने के कारण यह हो सकता है. कुछ दिन बाद पटना से 170 किलोमीटर दूर एक जिला में जाना हुआ था. वहां एक चाय दुकान पर चाय पीने बैठा तो लोगों ने बातचीत के दौरान बताया कि 10 से 18 वर्ष के बच्चों में नशा की जबरदस्त लत लगी हुई है. मैंने पूछा यह सब उसे मिलता कैसे हैं ? उन्होंने बताया कि अनेक ड्रग्स डीलर (उसने माफिया को डीलर बताया) इस धंधे में लगे हुए हैं. डेढ़ सौ से दो सौ रूपये में चुटकी भर ड्रग्स बेचता है, और यह छोटे-छोटे बच्चे उसे खरीदते हैं और सेवन करते हैं. मैंने पूछा ये बच्चे तो कमाते नहीं हैं, फिर वह इतना पैसा वह लाता कहां से है ? उन्होंने बताया कि बच्चे पहले तो घर से चोरी कर पैसे लाते हैं, बाद में बाहर चोरी-छितनई का काम करते हैं.’

संयोग की बात है एक ड्रग्स माफिया से भेंट हुई. मुझे पहले नहीं पता था कि वह ड्रग माफिया है. साधारण का युवक था. उसने बताया कि पिछले तीन महीने में दो बीघा जमीन खेती का और एक कट्ठा जमीन शहर में लिया है. मैंने पूछा कौन सा काम करते हो भाई ? इतनी भारी कमाई कैसे हो जाती है ? उसने बताया कि मैं ड्रग्स बेचता हूं. बस एक बार ही तो ड्रग का लत लगाना है, उसके बाद तो वह ड्रग का इतना लती हो जाता है कि उसे रोज खरीदना उसकी मजबूरी बन जाती है. एक व्यक्ति जिसका बाप मर चुका था, वह भी इस ड्रग का लती था. करीब 15-20 हजार रूपये का ड्रग उधार पी चुका था. उस उधारी को चुकाने के लिए उसने अपना एक कट्ठा जमीन शहर का मेरे नाम लिख दिया. इसी तरह दो और आदमी ने अपना खेती का दो बीघा जमीन मेरे नाम लिख दिया.

मैंने पूछा इस तरह किसी को ड्रग बेचना और उससे पैसे कमाना गलत नहीं लगता आपको ? उसने नाराज होते हुए कहा कि मैं और क्या करता ? नौकरी तो मिलने से रहा. व्यापार या दुकान खोलने पर कितना कमा लेंगे. अभी देखिये मात्र 3 – 4 साल में दो-दो कार खरीदा और अच्छा सा घर भी बना लिया.

ये कुछ उदाहरण यह बताने के लिए पर्याप्त है कि देश ड्रग्स का बहुत बड़ा बाजार बन गया है. क्या गांव, क्या शहर, क्या राजधानी. सभी जगह यह कारोबार फल-फूल रहा है. पर कौन जानता था कि भारत सरकार स्वयं इस ड्रग्स के धंधे में लिप्त है और देश भर में युवाओं को नशे में धुत कर देने का अभियान चला रखा है. भारत सरकार के सबसे बड़े मालिक अडानी के गुजरात के कच्छ स्थित निजी मुंद्रा पोर्ट पर 3 हजार किलोग्राम हेरोइन के बरामदगी हुई है, जिसे राजस्व खुफिया निदेशालय ने पकड़ा है. खबरों के अनुसार इस बरामद हेरोइन की कीमत 21 हजार करोड़ रूपये की है.

पिछले साल सुशांत सिंह के मामले में रिया चक्रवर्ती ओर उसके भाई का जब ड्रग्स एंगल सामने आया था तो आपको याद होगा कि कुछ गांजे की पुड़िया पकड़े जाने पर मीडिया में कितना बड़ा हंगामा खड़ा हो गया था. एक एंकर तो लाइव स्क्रीन पर इतने पागल हो गए थे कि ‘मुझे ड्रग्स दो’ ‘मुझे ड्रग्स दो’ चिल्लाने लगे. हफ्ते भर तक सुबह शाम बॉलीवुड का ड्रग्स कनेक्शन ही चला था.

लेकिन वही आप देखिए कि गुजरात मे तीन हजार किलो हेरोइन की खेप पकड़ाई है जिसकी कीमत 9 हजार करोड़ बताई जा रही है, यह देश की एक जगह से पकड़ी गयी सिंगल लार्जेस्ट खेप है. दुनिया की टॉप टेन ड्रग्स की जब्ती में यह शामिल होने जा रही है. भारत मे कभी भी आजतक इतनी बड़ी क्वांटिटी में एक जगह से ड्रग्स नही जब्त की गयी है लेकिन इतनी बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ पर टीवी के न्यूज़ चैनल खामोश है बल्कि खबर दबाई जा रही हैं क्योंकि यह यह सारा माल अडानी जी के निजी पोर्ट मुंद्रा से पकड़ाया है. अब बार बार मुंद्रा पोर्ट बोलेंगे तो बताना तो पड़ेगा न कि यह पोर्ट अडानी का है इसलिए सब मुंह मे दही जमा कर बैठे हैं.

डेक्कन क्रॉनिकल का कहना है कि अडानी के मुंद्रा पोर्ट से जिस फर्म की 3 टन हेरोइन पकड़ाई है, वह फर्म इससे पहले जून में ऐसा ही 25 टन माल बुला चुका है. 25 टन माल की अनुमानित कीमत गिरी से गिरी हालत में 72 हजार करोड़ रुपये की होती है. देश के नोजवानो की नसों में यह जहर इंजेक्ट किया जा रहा है, इसकी जिम्मेदारी किसकी है ? क्या राहुल गाँधी की है ?

इनसाइड स्टोरी ऑफ 21 थाउजंड करोड़ हेरोइन सीजिंग

पत्रकार गिरीश मालवीय लिखते हैं  – यह घटनाक्रम शुरू होता है 15 सितंबर को. गुजरात के तट के पास से एक ईरानी नौका समुन्दर में देखी जाती है ‘जुम्मा’ नामक नौका. इस बड़ी नाव में सात लोग ड्रग्स की तस्करी करते हुए गुजरात राज्य के एटीएस और तटरक्षक द्वारा चलाए एक संयुक्त अभियान अभियान में पकड़े जाते है. बीच समुद्र में 30 किलोग्राम हेरोइन की खेप को पकड़ा जाता है और बोट व सात तस्‍करों को गिरफ्तार कर लिया जाता है. नाव से कुल डेढ़ सौ करोड़ की हेरोइन जब्त की जाती है. वाहवाही के लिए तत्काल उसी दिन प्रेस के लिए यह सूचना रिलीज कर दी जाती है.

अब यही से कहानी में ट्विस्ट आता है. चूंकि नाव की जब्ती का ऑपरेशन देर रात तक चलता है, सातों लोगों से सख्ती से पूछताछ करने पर वह बताते है कि माल तो और भी है जो पोर्ट पर पुहंच चुका है. पर उस वक्त तक प्रेस रिलीज जा चुकी होती है और यह बात भी उसमें चली जाती है कि ड्रग्स की सही मात्रा एक बार नाव के पास के बंदरगाह पर लंगर डालने और तलाशी लेने के बाद पता चलेगी.

तटरक्षकों को भी लगता है कि बहुत ज्यादा माल नही होगा लेकिन जब अगली सच्चाई का पता चलता है कि नाव से पकड़ा गया माल मुंद्रा पोर्ट पर रखे गए माल का केवल एक परसेंट है और पोर्ट पर रखा हुआ माल का पैकेज कुल 3000 किलो है, जिसकी कीमत 21 हजार करोड़ है तो सब हैरान रह जाते हैं. चूंकि प्रेस में वह बता चुके थे कि और माल पकड़ा जाना है इसलिए यह खुलासा करना ही पड़ता है कि माल अडानी के निजी पोर्ट मुंद्रा से पकड़ाया है.

जब पुलिस जांच होती है तो पता लगता है कि यह माल दिल्ली की तरफ जाने वाला था. यह भी पता लगता है कि जिस विजयवाड़ा के आशी ट्रेडिंग कंपनी के आयात किए गए टेल्कम पाउडर पैकेज की शक्ल में यह 3 टन माल आया है, वैसा ही 25 टन माल जून में भी आ चुका है. गिरी से गिरी हालात में भी इस 25 टन तथाकथित ‘टेल्कम पावडर’ का मूल्य 72 हजार करोड़ होना चाहिए

यहां ये खबर भी बता देना समीचीन है कि जुलाई 2021 के पहले हफ्ते में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2500 करोड़ रुपए की 354 किलो हेरोइन जब्त की थी. ड्रग्स अफगानिस्तान से आई थी. उन्हें छिपे हुए कंटेनरों में समुद्र के रास्ते मुंबई से दिल्ली ले जाया गया. इसके पहले मई महीने में भी दिल्ली पुलिस ने हेरोइन की बड़ी खेप बरामद की थी. करीब 125 किलो हेरोइन के साथ दो अफगानिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था.

जिस आशी ट्रेडर्स के आयात निर्यात के लाइसेंस पर यह माल मंगाया जा रहा था उनके मालिक पति पत्नी की तो कोई औकात ही नहीं है कि वह इतनी बड़ी डील करने की हिम्मत भी करे. यानी एक पूरा ड्रग कार्टेल है जो यह माल मंगा रहा है, डिस्ट्रीब्यूशन कर रहा है. दिल्ली पुलिस की जुलाई में की गई कार्यवाही से यह स्पष्ट है कि यह सिलसिला काफी महीनों से चल रहा है. बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी ड्रग डील के पीछे कौन लोग हैं, क्या वे कभी सामने आएंगे ?

इतनी बड़ी ड्रग डील के सामने आने पर ओर एक बड़ा सवाल उठता है कि जैसे लैटिन अमेरिका के देशों में ड्रग लार्ड वहां की राजनीति पर हावी हो चुके हैं, वैसे ही कही अंदरखाने में यहां भी तो नहीं हो गया है ?

ड्रग्स के इस बाजार में केन्द्र सरकार की निजीकरण की नीतियों और उसकी मिलीभगत

इतना तो तय है कि ड्रग्स (हेरोइन) का कारोबार पिछले 7 सालों में जबरदस्त तरीके से बढ़ा है. ड्रग्स के इस कारोबार से देश का हर गांव, कस्बा, शहर लगभग वाकिफ है, सिवा भारत सरकार और उसके मालिकों के. इसलिए ऐसा कहना मूर्खता है कि अदानी के पोर्ट से पकड़ा गया यह विशाल खेफ पहली बार है. दूसरे शब्दों में कहा जाये तो देश में अब तक लाखों करोड़ रूपयों का ड्रग्स खप चुका है. हजारों ड्रग माफिया अमीर बन चुके हैं, लाखों लोग (उपभोक्ता) मर चुके हैं, या बर्बाद हो चुके हैं. निश्चित तौर पर इसका डाटा भारत सरकार के पास कतई नहीं है क्योंकि वह खुद इसमें शामिल है. वगैर भारत सरकार और उसके तंत्र के मिलीभगत के यह संभव ही नहीं है कि देश में हजारों टन हेरोइन की सप्लाई हो जाये, और सरकार को पता तक न चले.

इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग का कारोबार देश में बेरोकटोक जारी होना इस बात की ओर गंभीर इशारा है कि देश को निजीकरण के हवाले करने का क्या परिणाम हो सकता है. अब तो देश में न केवल निजी बंदरगाह ही हैं बल्कि एयरपोर्ट, हवाई जहाज, रेल यानी यातायात के सभी साधन निजी हाथों में बेचा जा चुका है, ऐसे में यह कहना कि केवल अदानी के कच्छ के मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से ही ड्रग का कारोबार हो रहा है, महज भोलापन ही कहा जायेगा. निःसंदेह निजी यातायात यानी हवाई, रेल के माध्यम से भी हजारों टन ड्रग का सप्लाई विदेशों से और देश के अंदर बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जो सुदूर गांव तक अपनी पहुंच बना चुकी है.

दूसरे शब्दों में कहा जाये तो निजीकरण देश की सबसे भ्रष्टतम व्यवस्था का एक विद्रूप नमूना है. एक भ्रष्ट व्यवस्था ही निजीकरण की मांग सबसे जोर-शोर से करता है. एक भ्रष्ट व्यक्ति ही निजीकरण का सबसे बड़ा प्रवर्तक होता है. चूंकि केन्द्र की मोदी सरकार भ्रष्टाचार के नवीन कीर्तिमान गढ़ चुकी है, इसके लिए वह दुनिया के सबसे भ्रष्टतम पार्टी और देश की सूची में ला चुकी है, इसीलिए वह पूरे जोर-शोर से देश की तमाम संवैधानिक-असंवैधानिक चीजों को निजीकरण की ओर धकेल रही है. देश का इससे बुरा हस्त्र और कुछ नहीं हो सकता है कि इस तमाम कुकृत्यों में केन्द्र की मोदी सरकार और उसकी संघी ढांचा पूरी तरह इस काम जुटी हुई है.

अडानी पोर्ट पर हो रही देशविरोधी गतिविधियों पर भारत का मीडिया

बलराज कटारिया लिखते हैं – भारत का मीडिया अडानी पोर्ट पर हो रही देशविरोधी गतिविधियों को तस्करी कहकर मामला हल्का कर रहा है, तथा भ्रम फैला रहा है. तस्करी लीगल रस्तों से हटकर चोरी के रस्ते से होती है तथा तस्करी के डॉक्यूमेंट और बिल, चालान वग़ैरह नहीं होते हैं. यहां अडानी पोर्ट पर भारत के विदेश व्यापार सिस्टम ने ख़ुद धांधली की है, यहां सरकारी सिस्टम ने देशविरोधी काम किया है, इसलिए यह तस्करी का मामला क़तई नहीं है. और वैसे भी, तस्करी का लेवल बहुत कम होता है और देश के विदेशी व्यापार या डॉलर भंडार पर उसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ता है.

यह भारत के एक भेड़ चरवाहे को भी पता है कि पिछले बंगाल चुनावों में एक सिआसी पार्टी द्वारा बेशुमार बेतहाशा पैसा बहाया गया था, पर किसान-मजदूर जत्थेबंदियों ने ऐन टाईम पर बंगाल में कूदकर यह सारा पैसा बेअसर कर दिया था. अब यूपी जैसे महत्वपूर्ण सूबे में चुनाव आ रहे हैं, तो हो सकता है कि इतने पैसों का चुनावी गतिविधियों में, या आतंकी गतिविधियों में भी इस्तेमाल होता, पर यह एंग्ल तो कोई नहीं देखेगा क्योंकि हमारे देश की अदालतों में बैट्ठे आला जज या तो भेड़ चराने वाले जितनी बुद्धि भी नहीं रखते हैं, या फिर हमारी अदालतों को कीड़े खा गए हैं, या फिर ये जज लोग वाक़ई किसी दहशत में हैं.

और, यह भी हो सकता है कि भारत और बाक़ी सूबाई सरकारों का इसमें कोई हाथ ही ना हों, पर कुछ शातिर लोग अपना काम कर रहे हों लेकिन अगर ऐसा है, तब तो यह बात और भी भयावह है, क्योंकि इसका साफ़ मतलब है कि संघीय सरकार समेत सूबाई सरकारें भी नागरिक सुरक्षा करने में नालायक़, नाकारा और फ़िसड्डी साबित हुई हैं. जिस लेवल का पैसा इन्वोलव्ड है, उसके हिसाब से यह काम किसी अंतरराष्ट्रीय सिंडीकेट का हो सकता है, और उस सिंडीकेट में भारत के सरकारी तंत्र के बड़े लोग भी शामिल हैं, नेता ना सही कोई बड़ा जज, सैक्रेटरी, कोई भी हो सकता है. पर इस मामले की तह तक जाकर जांच करना, और असली मास्टरमाइंड को जेल भेजना बेहद ज़रूरी है, वरना तो इन प्राइवेट पोर्टों से आरडीएक्स समेत कुछ भी आ सकता है.

ख़बरों पर पूरा ग़ौर करें कि पुलवामा आतंकी वारदात में नाक़ाबिले-यक़ीन लेवल का आरडीएक्स और नाक़ाबिले-वारदात जगह पर आतंकी वारदात हुई थी, तथा उस वक़्त भी ख़बरें उड़ी थीं कि जिस बस में आरडीएक्स पुलवामा लाया जाने का शक है, उसका पहले का रजिस्ट्रेशन गुजरात का ही था. बैंक लूट, संसाधन लूट, हवाई अड्डा, खनिज, रेल, तेल लूट जैसे बहुत से काम ऐसे हो रहे हैं, जिनके तार गुजरात से जा जुड़ते हैं. देश के बुद्धिजीवियों को हर हाल में खुलकर मैदान में आकर हमारे देश को, हमारी डेमोक्रेसी को बचाना चाहिए, यही उनका फ़र्ज़ भी है.

ड्रग्स के इतनी बड़ी खेप के पकड़े जाने का संभावित परिणाम

ड्रग्स के इतनी बड़ी खेप के पकड़े जाने से एकबारगी जो राजनीतिक हलचल मची है, उसका कोई भी परिणाम सामने निकल कर आने वाला नहीं है सिवा इसके कि ड्रग्स का कारोबार अब और तेजी से फैलेगा. चूंकि ड्रग्स के इस कारोबार में खुद भारत सरकार और उसके मालिकों की संलिप्तता सामने आ चुकी है, ऐसे में यह पूरी संभावना है कि जिन अधिकारियों के द्वारा इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाया गया है, उसे दंडित किया जायेगा या उसकी बरखास्तगी सुनिश्चित किया जायेगा. यह सब कुछ ठीक उसी तर्ज पर होगा जिस प्रकार पुलवामा हमले के बाद किया गया था.

याद होगा कश्मीर में आतंकियों को सुरक्षित ले जा रहे दविन्दर सिंह को जिस प्रकार बिना किसी नुकसान या पूछताछ के छोटे-मोटे मुकदमा लगाकर जेल में बंद किया गया ताकि कुछ दिन बाद ही उसकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित हो सके. वहीं उसे गिरफ्तार करने वाले अधिकारी का क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला. ठीक उसी तरह इस मामले का भी पटाक्षेप हो जायेगा. आखिर एक भ्रष्ट सरकार ठीक इसी तर्ज पर काम करती है, जो इस ड्रग्स प्रकरण में भी दुहराई जायेगी. आखिर हो भी क्यूं नहीं, अपराध का ऐसा एक भी ऐसा पहलू नहीं बचा है जिसमें भाजपा, संघ और उसकी केन्द्र में बैठी मोदी सरकार की संलिप्ता न हो. चाहे हत्या हो, बलात्कार हो, बच्चों का व्यापार हो, आतंकी कार्रवाई हो, वेश्यावृति हो … आदि-आदि.

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