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2021 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 27, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
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2021 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन
2021 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन

आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी में 22 वर्षों से कार्यरत. विज्ञान पर शौकिया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग ‘विज्ञान विश्व’ तथा खगोल शास्त्र को समर्पित ‘अंतरिक्ष.’ एक संशयवादी (Skeptic) व्यक्तित्व.

वर्ष 2021 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कारों का ऐलान सोमवार 4 अक्टूबर 2021 को किया गया है. इस बार यह पुरस्कार डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन को मिला है. यह पुरस्कार उन्हें ऊष्मा और स्पर्श के संवेदकों (receptors) की खोज के लिए दिया गया है.

ऊष्मा, शीत और स्पर्श संबधित हमारी संवेदनायें हमारे जीवन के लिए अत्यावश्यक है. इन्हीं के द्वारा हम अपने आसपास के विश्व को महसूस करते हैं. अपने रोजमर्रा के जीवन में हम इन संवेदनाओं को हम बहुत आसानी से लेते हैं लेकिन हमारा तंत्रिका तंत्र इन को किस तरह से समझता है ? वह तापमान और दबाव को किस तरह से महसूस करता है ? इस वर्ष के चिकित्सा नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने इस प्रश्न का उत्तर दिया है.

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डेविड जूलियस ने मिर्च में पाए जाने वाले एक रसायन कैप्साइसीन का प्रयोग किया, कैप्साइसीन त्वचा में जलन उत्पन्न करता है. इस रसायन के प्रयोग से डेविड ने हमारी त्वचा में एक ऊष्मा महसूस करने वाले तंत्रिका तंत्र के सिरे का पता लगाया. अरडेम पेटापुटीन ने दबाव कोशिकाओं के प्रयोग से त्वचा में यांत्रिकी दबाव महसूस करने वाली एक नई तरह की तंत्रिकाओं का पता लगाया.

इन क्रांतिकारी खोजों से हमारी तंत्रिका तंत्र द्वारा ऊष्मा, शीत और यांत्रिकी दबाव के महसूस करने की प्रक्रिया को समझने में मदद की है. इन वैज्ञानिकों ने हमारी संवेदना और आसपास के वातावरण के मध्य चल रही जटिल प्रक्रियाओं को समझने में बिखरी कडियों को जोड़ा है.

हम अपने वातावरण को किस तरह से महसूस करते हैं ?

मानव शरीर विज्ञान में यह एक बड़ा रहस्य रहा है कि हम अपने वातावरण को किस तरह से महसूस करते हैं. इसके पीछे जो प्रक्रियाएं काम करती है वह हमारे लिए हजारों वर्षों से कुतूहल का विषय रहा है. उदाहरण के लिए हमारी आंखें किस तरह से प्रकाश को देखती है, हमारे आंतरिक कान किस तरह से ध्वनि तरंगों को महसूस करते हैं, किस तरह से हमारी नाक भिन्न तरह के रसायनों की सुगंध का पता लगाती है, किस तरह हमारी जीभ भिन्न तरह के स्वाद को पहचानती है.

हमारे पास वातावरण को महसूस करने के अन्य तरीके भी हैं, जैसे जब आप गर्मी के दिनों घास मे नंगे पांव चहलकदमी करते हैं, तब आप सूरज की गर्मी, हवा के झोंके और अपने पैरों के नीचे घास के हर तिनके को महसूस कर सकते हैं.

हम जानते है कि हमारा मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र द्वारा भेजे गए विद्युत संकेतों के रूप में इन सभी संवेदनाओं को महसूस करता है लेकिन हमारी त्वचा तापमान, दबाव जैसे कारकों को किस तरह से विद्युत संकेतों में बदलती है ?

17 वी सदी मे दार्शनिक रेने देशकारतेस (René Descartes) ने त्वचा के भिन्न भागों से मस्तिष्क को जोड़ने वाले ढेर सारे धागों की कल्पना की थी. इस तरह से जलते अंगारे के ऊपर रखा नंगा पांव दिमाग को भिन्न यांत्रिकी संकेत भेजेगा. इसके बाद की खोजों में हमारे वातावरण में होने वाले हर बदलाव को महसूस करने के लिए विशिष्ट तरह की संवेदी कोशिका (न्यूरान) के अस्तित्व के बारे मे बताया.

1944 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कार विजेता जोसेफ एर्लांगर (Joseph Erlanger) और हर्बर्ट गॅसर (Herbert Gasser) ने हर विशिष्ट संवेदना संबधित विशिष्ट न्यूरान का पता लगाया था. जैसे दर्द वाले स्पर्श और सहलाने वाले स्पर्श को महसूस करने वाले न्यूरान. उसके बाद से यह प्रमाणित किया जा चुका है कि विशिष्ट तरह की संवेदना वाले न्यूरान अपने काम के लिए विशेषज्ञ होते हैं, और वे हर तरह की संवेदना को अलग से पहचान सकते हैं, जिससे हम अपने परिवेश को बेहतर रूप से समझ पाते हैं. जैसे हमारी ऊंगलिओं के सिरे पर उपस्थित न्यूरान ऊष्मा और गरम दर्दनाक ताप दोनों को महसूस कर सकते हैं.

डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुटीन के खोज से पहले हम यह नहीं जानते थे कि हमारा तंत्रिका तंत्र किस तरह से तापमान और दबाव को महसूस करता है. हमारा मस्तिष्क विद्युत संकेत समझता है, लेकिन दबाव और ऊष्मा के संकेत किस तरह से विद्युत संकेत में बदलते हैं, यह एक बड़ा रहस्य था.

1990 दशक के अंतिम भाग में डेविड जूलियस ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय कैपसाइसिन रसायन पर कार्य किया. यह रसायन मिर्च में होता है और त्वचा में जलन उत्पन्न करता है. हम जानते थे कि कैपसाइसिन दर्द महसूस करनेवाले न्यूरान को उत्तेजित करता है लेकिन कैसे करता है एक रहस्य था. जूलियस और उनके साथियों ने दर्द, ऊष्मा और स्पर्श महसूस करने वाले न्यूरानों में से करोड़ों डीएनए टूकड़ों का एक संग्रह बनाया और उन्होंने यह प्रस्तावित किया कि इन डीएनए खंडों में से कोई एक कैपसाइसिन से प्रतिक्रिया करता होगा.

एक के बाद एक करके उन्होंने कैपसाइसिन से प्रतिक्रिया नहीं करने वाले डीएनए खंडों को अलग कर दिया. कड़ी और लंबी मेहनत के बाद वे कैपसाइसिन से प्रतिक्रिया करने वाले जीन (डीएनए खंड) को पहचान गए. इस जिन को TRPV1 नाम दिया गया जोकि एक आयन चैनल प्रोटीन है, और कैपसाइसिन से प्रतिक्रिया करता था. जब जूलियस ने इस संवेदी प्रोटीन की प्रतिक्रिया ऊष्मा से करवाई तो उसने जलन से दर्द महसूस करने वाली प्रतिक्रिया दी.

जूलियस ने पाया कि उन्होंने एक ऊष्मा संवेदी रिसेप्टर खोज निकाला है.

डेविड जूलियस ने मिर्च में पाए जाने वाले कैप्साइसीन के प्रयोग से TRPV1 संवेदक की खोज की जो दर्द उत्पन्न करने वाली ऊष्मा से सक्रिय हो कर न्यूरान को विद्युत संकेत भेजती है.

TRPV1 की खोज तापमान महसूस करने वाले अन्य संवेदकों को पहचनाने में एक बड़ा कदम था. डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुटीन दोनों ने स्वतंत्र रूप से मेन्थोल (ठण्डाई) के प्रयोग से TRPM8 की खोज की जोकि शीतलता महसूस करवाने वाला संवेदक है. TRPV1 और TRPM8 से संबधित अन्य आयन चैनल खोजे गए और पाया गया कि ये संवेदक तापमान की एक बड़ी रेंज में काम कर सकते हैं. डेविड जूलियस द्वारा TRP1 की खोज एक क्रांतिकारी खोज थी, जिसने हमारे शरीर द्वारा भिन्न तापमानों को समझ सकने के रहस्य से पर्दा उठाया.

दबाव में खोज

जब तापमान महसूस करने वाले संवेदकों पर कार्य हो रहा था तब हम नहीं जानते थे कि यांत्रिक दबाव से उत्पन्न संवेदना किस तरह से स्पर्श और दबाव में महसूस की जाती है. वैज्ञानिकों ने इसके पहले बैकटेरिया में यांत्रिकी दबाव महसूस करने वाले संवेदक देखे थे लेकिन विकसित प्राणी जगत में यह किस तरह से कार्य करता है, एक रहस्य था. अरडेम पेटापुटीन ने सक्रीपस रिसर्च ला जोला कैलिफोर्निया (Scripps Research in La Jolla) में कार्य करते हुए यांत्रिकी दबाव महसूस करने वाले संवेदक की खोज में समय लगाया.

अरडेम पेटापुटीन और उनके सहयोगियों ने एक सूक्ष्म नाली द्वारा दबाव देने पर विद्युत संकेत उत्पन्न करने वाली कोशिका का पता लगाया. उन्होंने इस प्रतिक्रिया को दे सकने वाले 72 डीएनए खंडों को चिन्हित किया. इसके बाद एक के बाद एक डीएनए खंडों पर दबाव दे दे कर जांच गया. इस प्रक्रिया में उन्होंने Piezo1 आयन चैनल खोज निकाला. इसका उचारण पीसो है और दबाव के लिए ग्रीक शब्द piesi से प्रेरित है. इसी तरह का दूसरा संवेदक Piezo2 भी खोजा गया. उन्होंने पाया कि Piezo1 और Piezo2 मिलकर दबाव देने पर स्पर्श से संबधित विद्युत संकेत मस्तिष्क तक भेजते हैं.

पेटापुटीन की खोज ने एक के बाद एक नई खोज की झड़ी लगा दी और ज्ञात हुआ कि स्पर्श की संवेदना के लिए Piezo2 आयन चैनल मुख्य है. Piezo1 और Piezo2 मिलकर अन्य भौतिक प्रक्रिया जैसे रक्तचाप, श्वशन तथा मूत्रथैली के नियंत्रण के लिए भी उत्तरदाई है.

पेटापुटीन ने यांत्रिक दबाव मे सक्रिय होने वाले Piezo1 को खोज निकाला , इसके पश्चात Piezo2 भी खोजा गया।
पेटापुटीन ने यांत्रिक दबाव मे सक्रिय होने वाले Piezo1 को खोज निकाला, इसके पश्चात Piezo2 भी खोजा गया.

इस वर्ष का चिकित्सा नोबेल TRPV1, TRPM8 तथा Piezo आयन चैनल की क्रांतिकारी खोज को समर्पित है. यह खोज दर्शाती है कि हम किस तरह से ऊष्मा, शीत और स्पर्श महसूस करने के द्वारा हमारे आसपास के वातावरण को समझते हैं और उसके साथ समायोजित होते हैं. TRP चैनल हमारी ऊष्मा संवेदना के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि Piezo चैनल स्पर्श और हमारे अंगों की स्थिति जानने और उनके संचालन के लिए महत्वपूर्ण है. इन चैनलों के ऊष्मा और दबाव पर निर्भर कुछ अन्य चयापचय संबधित कार्य भी है.

वैज्ञानिक को उम्मीद है कि इन खोजों के द्वारा भिन्न तरह की बीमारी जैसे अंगों में दर्द आदि के इलाज में सहायता मिलेगी.

इस वर्ष के चिकित्सा नोबेल पुरस्कार विजेता खोजों से ऊष्मा, शीत और स्पर्श संबधित शारीरिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलेगी. आशा है कि इनसे अंगों में दर्द जैसी बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा.

कुछ अन्य तथ्य

  • 1901 से 2020 के मध्य चिकित्सा के क्षेत्र में 111 नोबेल दिए जा चुके हैं, जिनमें 12 महिलाओं का समावेश है.
  • 1923 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रेडरिक बैंटिंग (Frederick G. Banting) को सबसे कम उम्र अर्थात 32 वर्ष की उम्र में इंसुलिन की खोज के लिए दिया गया था.
  • पेटन राऊस (Peyton Rous) को 87 वर्ष की उम्र मे 1966 मे ट्यूमर विकसित करने वाले वायरस की खोज के लिए चिकित्सा नोबेल मिला था जोकि सबसे अधिक उम्र वाले चिकित्सा नोबेल पुरस्कार विजेता हैं.

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