दस हज़ार का कर्ज़
किसान से
आत्महत्या करवाता है
एक हज़ार रुपए का कर्ज़
आदिवासी का
परिवार बिकवाता है
दस हज़ार करोड़
और उससे अधिक का कर्ज़
पूंजीपति
माफ़ करवाता है
या देश छोड़कर
अय्याशी करता है
लोकतंत्र में
किसान और आदिवासी
लोक हैं
और पूंजीपति तंत्र है
यही आज का मंत्र है
- हूबनाथ
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