Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मनीष सिसोदिया प्रकरण : न समझोगे तो मिट जाओगे ओ विपक्ष वालों !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 1, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मनीष सिसोदिया प्रकरण : न समझोगे तो मिट जाओगे ओ विपक्ष वालों !
मनीष सिसोदिया प्रकरण : न समझोगे तो मिट जाओगे ओ विपक्ष वालों !
शकील अख्तर

मुद्दा मनीष सिसोदिया नहीं हैं. आम आदमी पार्टी भी नहीं है. सवाल संवैधानिक ऐजेन्सियों का दुरुपयोग है. अल्लामा इकबाल के साथ थोड़ी सी रियायत लेते हुए –

‘न समझोगे तो मिट जाओगे ओ विपक्ष वालों
तुम्हारी दास्तां तक न होगी दास्तानों में !’

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

2014 में सरकार बदलते ही मनमोहन सिंह के यहां सीबीआई पहुंचना कांग्रेसी शायद भूल गए हैं. मगर अभी केन्द्रीय गृहमंत्री रहे पी. चिदम्बरम की गिरफ्तारी और उनके साथ दुर्व्यवहार करने को भी क्या कांग्रेसी भूल गए ? सुबह कांग्रेस के नेता जश्न में डूबे थे. मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का समर्थन कर रहे थे. मगर शाम होते-होते कांग्रेस को समझ में आ गया कि यह किसी पार्टी या व्यक्ति पर हमला नहीं है, यह टेस्ट केस है कि विपक्ष में कितनी हिम्मत बची है ? कितना प्रतिरोध कर सकती है ?

कांग्रेस के महासचिव और कम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट के इन्चार्ज जयराम रमेश ने गिरफ्तारी का विरोध करके अपने रायपुर महाधिवेशन की उस भावना को व्यक्त कर दिया कि विपक्षी एकता आज की सबसे बड़ी जरूरत है. कांग्रेस में हमेशा दुविधा की भरमार होती है. आज जब उसे विपक्षी एकता की सबसे ज्यादा जरूरत है तो उसे एकला चलो की और धकेला जा रहा था. और 2004 से 14 तक जब अकेले मजबूत होने का समय था तब उसे मिलजुल कर काम करने के जाल में फंसा रखा था.

कांग्रेस में आज इन्दिरा गांधी के समय की तरह कोई दृढ़ निश्चयी केन्द्रीय नेतृत्व नहीं है जो सही, समयानुकूल एक फैसला लेने के बाद उसे नीचे तक पहुंचा दे. राहुल के अति उदार और अनिश्चित रवैये की वजह से कई बार गलत मैसेज सर्कुलेटेड हो जाता है.

मनीष सिसोदिया दिल्ली के उप मुख्यमंत्री हैं. उनसे लगातार महीनों पूछताछ हुई. अगर सीबाआई चाहती तो आगे भी कर सकती थी, मगर उन्हें गिरफ्तार करना और फिर रिमांड पर लेने का क्या मतलब है ? देश की राजधानी के उप मुख्यमंत्री से थाने में पूछताछ !

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पत्रकार रहे अनुराग ढांडा का यह कहना सही है कि अगर आबकारी का मामला होता तो हरियाणा में दिन रात ठेके खुलते हैं वहां जांच होती. गुजरात में सैंकड़ों लोग जहरीली शराब से मर गए वहां जांच होती. अनुराग का दावा है कि यह शिक्षा का नया और सफल मॉडल है, जिससे भाजपा डर गई. हर मां बाप और बच्चे भी अब शानदार सरकारी स्कूल की बात करने लगे हैं. यह भाजपा के शिक्षा, चिकित्सा के निजीकरण पर बड़ी चोट है.

अनुराग ढांडा इसका एक राजनीतिक पक्ष भी बताते हैं कि एमसीडी में हमारा मेयर और डिप्टी मेयर नहीं बनता तो यह गिरफ्तारी नहीं होती. पहले पंजाब में हम भाजपा और अकालियों का विकल्प बन कर आए और फिर दिल्ली में हमारे एक भी पार्षद को बीजेपी वाले डरा और तोड़ नहीं पाए. उसी की खीझ और बदला है मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी.

अनुराग कहते हैं कि हरियाणा में हमने भाजपा सरकार की चूलें हिला दी हैं. वह हमें डराना चाहती है. और आम आदमी पार्टी को ही नहीं सारे विपक्ष को. हर जगह जांच ऐजेन्सियों का दुरुपयोग हो रहा है. विपक्षी नेताओं के यहां छापे पड़ रहे हैं. उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है. इसके खिलाफ लड़ना होगा. किसी के भी चुप रहने और डरने से काम नहीं चलेगा.

बात सही है. आज प्रधानमंत्री मोदी इतने ताकतवर हो गए हैं कि कोई भी पार्टी या तीसरा मोर्चा उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में नहीं हरा सकता. केवल संयुक्त विपक्ष ही आगामी लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला कर सकता है. वह जैसा कि कहते हैं कि खेल में कौन किसी का गुइंया ! वैसे ही राजनीति में कौन किसके साथ परमानेंट दोस्ती या विरोध. कोई कभी सोच सकता था कि कांग्रेस शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाएगी ? या भाजपा कश्मीर में महबूबा मुफ्ती के साथ मिलकर सरकार चलाएगी ?

राजनीति में ऐसी उलटबांसिया बहुत होती रहती है. हमने 1989 के लोकसभा चुनाव में एक ही मंच पर भाजपा और सीपीएम दोनों के झंडे साथ लहराते देखे हैं. लेकिन 2014 के बाद तो यह चमत्कार ऐसे होने लगे हैं कि सारे समान विचार या नेचुरल एलाइंस की धारणाएं चकनाचूर हो गई हैं.

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना जो एक दूसरे को स्वाभाविक मित्र कहते थे वे दुश्मनों की तरह लड़े और पंजाब में भाजपा अकाली का सबसे पुराना गठबंधन टूट गया. कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे लोग टूटे जिनके बारे में 9 साल पहले कोई सपने में नहीं सोच सकता था.

तो राजनीति इन दिनों बहुत अलग स्टेज पर पहुंच गई है. इसे वापस जनता के साथ जोड़ने से पहले कई बाधाएं तोड़ना होंगी. राहुल बार-बार कहते हैं, अभी सोनिया गांधी ने भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर लिया गया है. झूठे सवालों को सच के मुद्दों बेरोजगारी, महंगाई, चीन के दबाव पर हावी कर दिया गया है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तो यह कहकर देश के पूरे आत्म सम्मान को दांव पर लगा दिया कि वह बड़ी इकानमी है, हम उससे कैसे लड़ सकते हैं ? मतलब डर कर ही रहना है. राहुल ने इस पर रायपुर महाधिवेशन में अच्छा प्रहार किया कि यह कौन सा राष्ट्रवाद है कि ताकतवर से डरना और कमजोर को डराना !

लेकिन यह सब मुद्दे जनता के बीच जा नहीं पा रहे हैं. मीडिया इन्हें दिखाता बताता ही नहीं है. मीडिया हर चीज वह छुपा लेता है जो भाजपा के खिलाफ जा सकती हो. मगर एक चीज वह नहीं छुपा पाता. यही विपक्ष को समझना चाहिए. वह चीज है चुनावों की जीत. उसे यह बताना पड़ता है.

अभी जैसा रायपुर में प्रियंका ने बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि केवल एक साल बचा है. कांग्रेस को खासतौर पर और विपक्ष को भी यह ध्यान में रखना चाहिए कि समय बहुत तेज गति से बीत रहा है. 2024 सिर पर खड़ा है. अगर यह हार गए तो फिर खूब आपस में लड़ते रहना, कोई पूछने वाला नहीं होगा.

कांग्रेस आज आश्चर्यजनक ढंग से पूछ रही है कि नीतीश का भाजपा से क्या संबंध रहा ? अरे संबंध ! वे तो भाजपा के पार्ट और पार्सल थे. पूरी राजनीति भाजपा के साथ की, 1977 से. वे तो उससे टूटकर तुम्हारी तरफ आए हैं. और आप उनसे पूछ रहे है कि आपकी राजनीति क्या है ?

कमाल है कांग्रेस के नेता भी. वे यह भूल गए कि 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले जब नीतीश कांग्रेस के घोर विरोधी थे तब राहुल ने उनके काम काज की प्रशंसा की थी. ठीक चुनाव से पहले राहुल ने दिल्ली के होटल अशोक में एक बड़ी प्रेस कान्फेंस की थी. उन दिनों राहुल आज की तरह इफरात में प्रेस कान्फ्रेंसे नहीं करते थे, इसलिए उसका बड़ा महत्व था. वहां वे नीतीश को फीलर दे रहे थे.

और आज जब नीतीश खुले आम एक हफ्ते में दूसरी बार कांग्रेस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं तो कांग्रेस मुंह से तो विपक्षी एकता, तीसरा मोर्चा भाजपा का मददगार बोले जा रही है मगर अपने हाथ पीछे रखकर बांधे हुए हैं.

कांग्रेस सबसे बड़ा विपक्षी दल है. इसलिए जिम्मेदारी भी उसकी सबसे ज्यादा है. उसे आगे बढ़कर विपक्षी एकता का अलख जगाना होगा. सीधा सवाल है कि अकेले लड़कर वह कितनी सीटें पर जीत लेगी ? और अगर मोदी की हैट्रिक हो गई तो फिर उसके बाद कांग्रेस और दूसरा विपक्ष कहां देखने को मिलेगा ? वह जैसे आजकल की भाषा में कहते हैं कि किस गोले पर !

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

नए जनवाद का लक्ष्य है – मलाई खाओ, मजे में रहो !

Next Post

हमारे समय में जयशंकर प्रसाद

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हमारे समय में जयशंकर प्रसाद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वर्षा डोंगरे लाखों दलित महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है

June 26, 2020

लाॅकडाउन के नाम पर भयानक बर्बरताओं को महसूस कीजिए

May 19, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.