Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

चमत्कारों से घिरा पुरूष

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 16, 2023
in कविताएं
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
चमत्कारों से घिरा पुरूष
चमत्कारों से घिरा पुरूष

चमत्कारों से घिरा पुरूष
उन दिनों पुरूष नहीं था
महज एक इंसान था
बाढ़, तूफान उसे डराते थे,
तो गुनगुनी धूप और जंगलों में उलझी हवा उसे सहलाती थी
आसमान के बदलते रंग उसे आश्चर्य से भर देते
कभी खौफ से तो कभी खुशी से

उन दिनों भी पुरूष रंगों से परिचित था
लाल रंग से भी
उसे पता था लाल रंग का महत्व
जो शरीर से ज्यादा निकल जाए तो आदमी सो जाता था
हमेशा के लिए

You might also like

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

लेकिन वह इस बात से चमत्कृत था कि
औरत नियमित अंतराल पर निकालती है गाढ़ा लाल रक्त
और उसके बाद भी कुलांचे भरती है जंगलों में
किसी हिरनी की तरह

न जाने कौन सी आदिम आग उसे औरत के करीब लाती
जिसे समझना नामुमकिन था उन दिनों

लेकिन औरत का किसी बारिश की मछली सा फूल जाना
और फिर उसके शरीर को चीरकर
एक नन्हे शरीर का बाहर आना
पुरुष के लिए किसी जादू से कम नहीं था
यह जादू औरत ने कहां से सीखा ?
यह चमत्कारी ताकत औरत में कहां से आयी?

क्या जंगल के लाल फूल रात में औरतों के अंदर समा जाते हैं ?
या औरत के रक्त से ही ये लाल फूल खिलते हैं ?

पुरुष नतमस्तक था, औरत का सहचर था

समय बदला
सभ्यता की शुरुआत हुई

औरत इस सभ्यता की पहली कैदी बनी
औरत का लाल रक्त अब लाल फूल नहीं था
बल्कि उसके ‘पहले पाप’ की स्वीकारोक्ति थी
जिसे छिपाना जरूरी था
बच्चे अब औरत के शरीर का हिस्सा नहीं थे
बल्कि वीर्य की उपज थे
जिसे बंधुआ कोख में बोया जाता था
औरत अब जंगल में कुलांचे भरने वाली हिरनी नहीं थी
बल्कि प्रकाश के इंतजार में एक अंधेरी गुफा थी

समय फिर बदला….
अचानक कुछ स्त्री-पुरुषों के स्वप्न में लाल फूल दिखने लगा
लाल फूल, लाल रक्त में और लाल रक्त, लाल फूल में बदलने लगा
पुरुष में इंसान बनने की तड़प तेज़ हो गयी
वह फिर से लाल फूलों की खुशबू, अपने फेफड़ों में भरना चाहता था
औरत फिर से कुलांचे भरना चाहती थी
अपनी गुफा में सूरज बुलाना चाहती थी
टूट कर प्यार करना चाहती थी

लेकिन अब यह किसी जादू पर निर्भर नहीं था
बल्कि सांझे सपने और सांझी बगावत पर निर्भर था
सांझी बगावत उस जादू के खिलाफ

जिसने औरत से उसका इतिहास और
पुरुष से उसका भविष्य छीना था.

  • मनीष आजाद

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

भारत में ‘लिव इन’ भी स्त्रियों के प्रति अन्यायी और क्रूर व्यवस्था!

Next Post

साम्राज्यवाद-सामंतवाद-विरोधी आन्दोलन के प्रतीक हैं अमर शहीद बिरसा मुंडा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
Next Post

साम्राज्यवाद-सामंतवाद-विरोधी आन्दोलन के प्रतीक हैं अमर शहीद बिरसा मुंडा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण पर सवाल

December 9, 2022

‘तुम मुझे जेल भेजो, मैं तुम्हें स्कूल भेजूंगा’ – अरविन्द केजरीवाल

October 29, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.