
मनुष्य के
लिए
भूख
जितनी जरूरी है
उतना ही
जरूरी है
अवसर की
समानता
उतनी ही
ज़रूरी है
प्रत्येक की
गरिमा
उतनी ही
जरूरी है
प्रत्येक के बीच
समानता
उतनी है
जरूरी है
प्रत्येक की
स्वतंत्रता
उतनी ही ज़रूरी है
संसाधन बंटवारा में
प्रत्येक के बीच
एकरूपता
उतनी ही
जरूरी है
सबके बीच
मनुष्यता
यह कोई
जागरण नहीं
प्रत्येक की मौलिक
जरूरत है
- बुद्धिलाल पाल
[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]
