
कोई आदमी अपनी डिग्री दो कारणों से नहीं दिखाता है- पहला, या तो वह फेल हो और पास होने का हल्ला कर रखा हो. दूसरा, या तो वह सिर्फ पासिंग नम्बर पाया हो, मने खिंच खांच कर ग्रेस मार्क से पास हो गया हो…!! बाकी बढ़िया नम्बरों से पास लड़के, लड़कों के परिजन यहां सोशल मीडिया पर दस बार डिग्री पब्लिक करके बधाईयां बटोरते है.
लंबी लड़ाई के बाद कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने जनता को जानने का अधिकार दिया था. उस अधिकार के तहत गटरगैस के अनुसंधानकर्ता, रॉकेट विज्ञानी प्रधानमन्त्री की डिग्री किसी नीरज नामक व्यक्ति ने मांग लिया. चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को आदेश दिया कि रॉकेट विज्ञानी की डिग्री दिखाई जाए. रॉकेट विज्ञानी को यह बात बड़ी नागवार लगी, उन्होंने आनन फानन में जनता को मिले इस अधिकार पर फावड़ा चला दिया.
खैर फावड़ा बाद में चला ऑर्डर पहले हो गया था, अब मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास था. उसकी कॉलर राकेट विज्ञानी के गुंडों ने पकड़ा और कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट जाओ और फैसले को चैलेंज करो. फैसला चैलेंज हुआ, कोर्ट ने स्थगन आदेश दिया कि अभी डीग्री नहीं दिखाई जाएगी, पहले सुनवाई होगी…!
फिर यहां के न्याय का जो राष्ट्रीय चरित्तर है, उसके अनुसार तारीख पर तारीख चलता रहा, लेकिन सूचना मांगने वाला भी जिद्दी नागरिक ठहरा, लड़ता रहा, कोर्ट में चप्पल घसीटते रहा.
दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से अटॉर्नी तुषार ने राकेट विज्ञानी को नंगा होने से बचाने के लिए दलीलें दी कि जो आदमी प्रधानमन्त्री पद पर बैठा है, उसकी डीग्री थर्ड आदमी को दिखाने से निजता का उल्लंघन होगा ! यह ठीक वैसे ही था जैसे पोलिंग का वीडियो फुटेज देने से चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार नंगा हो जाता. तो उसने खुद को नंगा होने से बचाने के लिए वोटर की निजता का हवाला देकर वीडियो फुटेज देने से इंकार कर दिया.
खैर लंबी सुनवाई के बाद कल फैसले का टाइम आया, तो जज साहेब फैसला देने से भाग गए. शायद कोई डील अबतक न हुई हो या उनको भी लोया बनने का डर सता रहा हो. अब अगली तारीख 25 अगस्त को नियत की गई है, देखिए जज साहेब आते हैं कि फिर छुट्टी पर चले जाते हैं ?
प्रधानमन्त्री के डीग्री विवाद पर मेरा तो यह कहना है कि जज साहब को डरने की जरूरत नहीं है. उनको फैसला सुनाना चाहिए और उसमें फाइंडिंग देना चाहिए कि- महामानव, नॉन बायोलॉजिक, परमेश्वर के दूत की डिग्री मांगना राष्ट्रद्रोह है इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है और सूचना मांगने वाले को तत्काल फांसी पर लटकाया जाता है ताकि भविष्य में कोई भी नागरिक महामानव की डिग्री मांगने की भयंकर भूल न कर सके…!!
और वैसे भी डीग्री की क्या जरूरत है जब वो बिना डीग्री के ही, मीडिया के प्रचार और खुद के नाच नौटंकी, जोकरई से असंख्य उच्च शिक्षा प्राप्त डिग्रीधारियों को विगत दस साल से लल्लू बनाकर झोला थमाए पीछे पीछे घुमा ही रहे हैं.
खैर, कोर्ट ने 25 अगस्त का डेट लगा दिया है तो फेवरेवल आदेश का इंतज़ार कीजिये बाकी तथाकथित मिस्टर ईमानदार खुद के भ्रष्ट आचरण और भ्रष्टाचार पर उंगली किये जाने से बचने के लिए हमसे/आपसे राईट टू इनफार्मेशन का अधिकार छिनने की नीचता तो दिखा चुके हैं.
- शारदेंदु कुमार पांडेय
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