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क्या माओवादी प्रवक्ता अभय का सरेंडर वाला बयान माओवादी पार्टी को विभाजन की ओर ले जायेगी ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 20, 2025
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क्या माओवादी प्रवक्ता अभय का सरेंडर वाला बयान माओवादी पार्टी को विभाजन की ओर ले जायेगी ?
क्या माओवादी प्रवक्ता अभय का सरेंडर वाला बयान माओवादी पार्टी को विभाजन की ओर ले जायेगी ?

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति, जो 15 अगस्त, 2025 को लिखा गया था, लेकिन पत्रकारों के लिए एक महीने बाद जारी किया था, जिसके सामने आने के साथ ही भारत की सत्ता को सांप सूंघ गया है. पिछले 6 दशक से हथियारबंद संघर्ष चला रही भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी ने अचानक घोषणा कर दी है कि वह ‘हथियारबंद संघर्ष को अस्थाई रूप से त्याग कर भारत की उत्पीडित जनता के समस्याओं का निराकरण के लिए जन संघर्षों में भागी बनेंगे.’

चूंकि यह जारी प्रेस विज्ञप्ति सीपीआई-माओवादी के प्रवक्ता अभय ने अद्यतन तस्वीर और हस्ताक्षर के साथ जारी हुआ है और वे पूर्व शहीद महासचिव बासवराज का हवाला देते हुए जारी किया गया है, इतना ही नहीं इसमें मौजूदा महासचिव देव जी की सहमति या उनका उल्लेख कहीं नहीं है, इसलिए राजनीतिक हलकों में एक ओर जहां अचम्भे के तौर पर देखा जा रहा है तो वहीं एक और सवाल तैर रहा है कि क्या सीपीआई-माओवादी विभाजन के दौर से गुजर रहा है ?

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कुछ राजनीतिक हल्कों में यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या देव जी के महासचिव बनने से मोस्ट सीनियर अभय की पार्टी से बगावत कर दिये हैं ? क्या वे देव जी को महासचिव बनने से नाखुश हैं ? क्या वे स्वयं को महासचिव के तौर पर देखना चाहते थे, जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने बगावत का रास्ता अपनाया ? सवाल कई सारे हैं, जवाब भविष्य में ही मिलेगा.  बहरहाल यहां हम माओवादी प्रवक्ता अभय के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति को अपने पाठकों के लिए यहां प्रकाशित कर रहे हैं.

भारत के माननीय प्रधानमंत्री; गृहमंत्री; माओवादी आंदोलन से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री; शांति वार्ता के प्रति सानुकूल रवैया अपनाने वाले सत्ता एवं तमाम विपक्ष पार्टियों के नेतागण, शांति कमेटी के साथियों, पत्रकारों एवं जनता के सामने बदली हुई हमारी पार्टी के रूख को इस प्रेस विज्ञप्ति द्वारा हम स्पष्ट कर रहे हैं.

2025 मार्च आखरी सप्ताह से हमारी पार्टी सरकार के साथ ‘शांति वार्ता’ के लिए गंभीर एवं ईमानदारी के साथ प्रयास कर रही है. हमारी पार्टी के केंद्रीय कमेटी का प्रवक्ता कामरेड अभय के नाम पर मई 10 को स्वयम हमारी पार्टी के माननीय महासचिव एक प्रेस बयान जारी किया था. उसमें उन्होंने हमारी पार्टी हथियार छोडने के बारे मे उल्लेख करते हुए इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर हमारी पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्वकारी कामरेडों के साथ सलाह मशविरा करने के लिए एक माह के समय की मांग करते हुए सरकार के सामने सीज फायर का प्रस्ताव रखा था. लेकिन, दुर्भाग्यवश उस पर केंद्र सरकार अपनी सानुकूल रूख को जाहिर नही किया था. बल्कि जनवरी 2024 से जारी अपनी घेराव और उन्मुलन सैनिक हमलों को और तेज किये हैं.

फलस्वरूप, हजारों की संख्या में सशस्त्र पुलिस बल की तैनात कर घेराव एवं उन्मूलन हमले को अंजाम दिया गया. माड के गुंडेकोट के पास 21 मई को हुई भीषण हमलें में साहसिक रूप से प्रतिरोध करते हुए हमारी पार्टी के महासचिव कामरेड बसवाराजू सहित केन्द्रीय कमटी के स्टाफ एवं उनके सुरक्षा गार्ड के 28 साथी शहीद हुए.

उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, उनसे पहले किये गए शांति वार्ता की प्रक्रिया को बीच में आधा अधूरा न छोड़कर उनके विचारों के अनुरूप शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए हम यह निर्णय लिये और उस पर इस प्रेस बयान को जारी कर रहे हैं.

हमारी पार्टी के माननीय महासचिव के पहलकदमी पर शुरू हुए शांति वार्ता के प्रक्रिया को आगे ले जाने के तहत हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि, बदले हुए विश्व एवं देश के परिस्थितियों के अलावा लगातार देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक हम हथियार छोडकर, मुख्य धारा में शामिल होने के लिए किये जा रहे अनुराधों के मद्देनजर हम हथियार छोडने का निर्णय लिए हैं. हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से विराम घोषित करने का निर्णय लिए हैं. हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि, भविष्य में, हम जन समस्याओं पर तमाम राजनीतिक पार्टियां एवं संघर्षरत संस्थाओं से जहां तक संभव हो कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे.

इस विषय पर केंद्र के गृहमंत्री या उनसे नियुक्त व्यक्तियों से अथवा प्रतिनिधि मण्डल से वार्ता के लिए हम तैयार हैं. लेकिन हमारी इस बदले हुए विचार से पार्टी को अवगत कराना पडेगा. यह हमारी दायित्व बनेगी. बाद में पार्टी के अंदर इस पर सहमति जताने वाले या विरोध करने वाले स्पष्ट होकर, सहमत जताने वाले साथियों से एक प्रतिनिधि मण्डल तैयार कर शांति वार्ता में हम शिरकत करेंगे.

वर्तमान में हमारे संपर्क में रहे सीमित कैडर एवं कुछ नेतृत्वकारी साथी इस नयी रूख पर अपनी पूरी सहमति जता रहे हैं. इसलिए केंद्र सरकार से हमारी अनुरोध यह है कि समूचे देश भर के अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे और जेल में बंद साथियों से सलाह मशविरा करने के लिए हमें एक माह की समय देना है.

इस विषय पर प्राथमिक रूप से सरकार के साथ वीडियो कॉल के जरिये विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए भी हम तैयार हैं. इसलिए और एक बार हम स्पष्ट कर रहे हैं कि फौरन एक माह समय के लिए औपचारिक रूप से सीजफायर की घोषणा करें, खोजी अभियानों को रूकवाकर शांति वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व खून से बह रहे जंगलों को शांति वनों में तब्दील करना आपके लिए जाने वाली सनुकूल रूख पर ही निर्भर करेगी.

हम देश के तमाम मेहनतकश जनता, दलित, आदिवासी, महिला एवं धार्मिक अल्पसंख्यको और बुद्धिजीवी, मानव अधिकार कार्यकार्ता, शांति कमेटी के मित्रगण, लेखक, कलाकारों से यह अपील कर रहा हैं कि बदले हुए परिस्थितियों में पार्टी एवं देश के क्रांतिकारी आंदोलन सामना कर रही बहुत बुरी परिस्थितियों में हम से लिए गए इस निर्णय को समझना है.

हम आपसे यह उम्मीद कर रहे है कि तहे दिल से आप इसे समझ कर हमें आपका पूर्ण सहयोग देते हुए इस प्रक्रिया को आगे ले जाओगे. आज हम सब मिलकर, हमारी पार्टी पर एवं समूचे देश के तमाम माओवादी आंदोलनस्थ इलाकों पर जारी भीषण सैनिक हमलों को सरकार से रूकवाकर खून बह रही जंगलों में शांतिपूर्ण वातावरण को कायम करना है.

बदली हुई हमारी रूख पर समूचे देश भर के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे पार्टी के नेतृत्व व मित्रगण एवं भारत के क्रांतिकारी आंदोलन के हितैषियों और देश के जनवादी, प्रगतिशील ताकतें एवं वामपथी शक्तियों और संस्थाएं अपनी विचारों को कष्ट कर हम तक पहुंचाने से हम तहेदिल से स्वीकार कर उन पर गौर करने के लिये तैयार हैं.

नीचे दिए गये ई-मेल, फेसबुक के आइड़ी पर आपके विचारों को हम तक पहुंचाईए. हमारी प्रपोजल पर सरकार अपनी सहमति जताते हुए सहयोग करने की आश्वाशन देने के फौरन बाद से ही यह दिये ईमेल और फेसबुक अकाउंट को देख सकते हैं. सरकार से हमारी यह अनुरोध हैं कि आप अपनी निर्णय को इंटरनेट से दूर रहने वाले हमारी पार्टी के तमाम कैडरों तक पहुंचाने के लिए आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के माध्यम से जरूर प्रसार करवाईए.

इस प्रेस विज्ञप्ति के नीचे तीन प्वाइंट्स में ‘विशेष सूचना’ देते हुए दर्ज है कि हमारी पार्टी के जो भी साथी सरकार से दिए गए समय सीमा के अंदर यदि अपनी अनमोल विचारों को हम तक पहुंचाने में असमर्थ रहने से आप चिंता मत कीजिये. वार्ता प्रक्रिया के दौरान भी आप आपका विचार भेज सकते हैं.

आगे लिखते हैं – देश के अलग-अलग जेलों में बंदी साथी भी जेल अधिकारियों के अनुमति से आपके विचारों को कृपया भेजिए. और तीसरे प्वाइंट्स में राज्य कमेटी, स्पेशल एरिया कमेटी, स्पेशल जोनल कमेटी, सब जोनल ब्यूरों सहित पार्टी के अलग-अलग स्तरों में प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभा रहे साथीगण एकमत के साथ राय प्रकट होने पर प्रवक्ता के नाम से भी भेज सकते हैं.

इसके साथ ही उन्होंने एक ई-मेल और फेसबुक आईडी जारी किये हैं, जो इस प्रकार है – ईमेल: nampet(2025)@gmail.com फेसबुक – nampetalk. यह आईडी अभी एक्टिव नहीं है, जब तक सरकार की ओर से कोई अधिकृत सूचना नहीं मिलती है. सरकार की ओर से सहमति की सूचना मिलते ही यह एक्टीवेट हो जायेगा.

पत्र के अंत में नोट दर्ज करते हुए कहा गया है कि ‘कई कारणों से यह बयान लेट से जारी कर रहे हैं.’ जाहिर है पुलिस के दमन के दौर में यह संभव है. सत्ता की ओर इसकी कब प्रतिक्रिया आयेगी, यह तो वक्त की बात है, लेकिन जो महत्वपूर्ण तथ्य है वह यही कि फिलहाल लोग जहां भौचक्का है वहीं सत्ता को सांप सूंघ गया है.

राजनीतिक मामलों के जानकार बताते हैं कि माओवादी प्रवक्ता अभय की ओर से जारी यह बयान कोई अप्रत्याशित नहीं है. अभय की पत्नी ने पहले ही सरेंडर कर दिया था, तो अभी उनकी भाभी सुजाता ने भी सरेंडर कर दिया है. घटनाक्रम का प्रवाह बताता है कि जल्दी ही अभय भी सरेंडर करने वाले हैं या वे पूरी पार्टी को सरेंडर की दिशा में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं. यदि पूरी पार्टी सरेंडर नहीं करती है तो लाजिमी तौर पर पार्टी विभाजन का दंश झेलेगी.

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगर अभय पार्टी को विभाजित कर सरेंडर करते हैं तब क्या अभय के हिस्से में आई पार्टी किस तरह और किस हद तक बची हुई पार्टी पर हमले करती है. क्या सरकार की ओर से वह एकबार फिर डीआरजी के तर्ज पर हथियार उठाकर बांकी बचे माओवादियों को खत्म करने लगेंगे ? सवाल बहुत सारे हैं, जिसका जवाब सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य पर निर्भर करता है.

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