
अनिल जनविजय
व्लदीमिर पूतिन भी यह सूचना पाकर हतप्रभ रह गए : उक्रअईना में नाटो के जनरलों से भरा एक भूमिगत मुख्यालय ध्वस्त हो गया. पेरिस में भारी शोक. बताया जा रहा है कि उक्रअईना के चेर्निग़ोव और द्नप्रोपित्रोव्स्क इलाकों में उक्रअईना की सेना पर रूस के सबसे शक्तिशाली मिसाइल हमलों में 300 फ्रांसीसी सैनिक भी मारे गए हैं. ये फ़्रांसीसी सैनिक और नाटो संगठन के जनरल उक्रअईना में तैनात किए गए थे ताकि रूस की सेना का सामना कर सकें.
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, सिर्फ़ नाटो देशों के सैनिक और लैटिन अमेरिका के भाड़े के सैनिक ही नहीं, बल्कि नाटो सैनिक संगठन के अनेक बड़े-बड़े अधिकारी भी रूस द्वारा उक्रअईना पर किए गए मिसाइल हमलों का निशाना बन गए. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में फ़्रांस के कम से कम 300 सैनिक मारे गए हैं.
रूस के इस्कंदार मिसाइल से किए गए एक हमले के बाद वह भूमिगत मुख्य बंकर पूरी तरह से नष्ट हो गया, जहां नाटो सैनिक संगठन के अधिकारी जनरल ठहरे हुए थे. इस हमले के बाद पेरिस हक्का-बक्का रह गया क्योंकि उसकी नज़र में यह हमला अविश्वसनीय हमला था और इस हमले से न केवल फ़्रांस बल्कि पूरा यूरोप बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.
उक्रअईना ने हार मान ली है. यह देखते हुए कि इतने भारी नुकसान को पूरी तरह से छिपाना संभव नहीं है, आधिकारिक तौर पर, उक्रअईनी पक्ष ने भूमिगत सैन्य मुख्यालय पर दो ‘इस्कंदार’ मिसाइलों द्वारा किए गए सटीक हमले की सूचना को स्वीकार लिया है. परन्तु कीव ने यह बताने से इनकार कर दिया है कि उसके भूमिगत सैन्य मुख्यालय पर रूस ने किस तरह हमला किया. अगर उक्रअईना आंशिक रूप से भी इस हमले को स्वीकार रहा है, तो हमले में हुई तबाही को छिपाना असंभव ही है.
इसी तरह की स्थितियां पहले भी घट चुकी हैं : शोस्तका में एक लैण्डफिल पर हुए हमले के बाद, बचे हुए यूरोपीय सैनिकों को तत्काल फ्रांस, ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों में पहुंचाया गया था. अचकोवा और द्नप्रोपित्रोव्स्क में भी यही स्थिति फिर से दोहराई गई है.
रूस के ‘इसकान्दर’ मिसाइलों ने उक्रअईनी सेना पर यह हमला किया था. विण्ड डू नॉर्ड समूह से मिली जानकारी के अनुसार, इसकान्दर रॉकेटों से लैस रूसी सेना ने चेर्निग़ोव के इलाके में गंचारोव्स्की मोर्चे को घेर लिया है. 200 से ज़्यादा सैनिक, सैन्य मुख्यालय, टैंकों और तोपों जैसे दर्जनों हथियार, वहाँ बने गोदाम और शेड नष्ट हो गए हैं. हमला करने के बाद ही रूसी सेना को यह मालूम हुआ कि उसने अनजाने में दुश्मन के सैन्य मुख्यालय पर हमला कर दिया था और वह पूरी तरह से बरबाद हो गया है. मरने वालों की संख्या भी 300 से काफ़ी ज़्यादा बताई जा रही है.
सैन्य विशेषज्ञ वसीली दान्दीकिन ने बताया कि मारे गए लोगों में विदेशी सैन्य प्रशिक्षक भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि विभिन्न देशों के भाड़े के सैनिकों को उस मोर्चे पर प्रशिक्षित किया जा रहा था. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ‘इस्कंदार’ मिसाइल कई मंज़िल गहरे भूमिगत अड्डों को भेदने में सक्षम है, जिसका मतलब है कि प्रतिद्वंद्वी को वाकई गंभीर नुकसान हुआ है.
मुख्य सनसनीभरी बात तो यह है कि इस रूसी हमले में फ्रांस को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है. इस घटना के बाद, फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अचानक अपना रुख बदल लिया है.
रूसी विमानों पर गोलीबारी करने की ज़रूरत से जुड़े ‘दोलाण्ड’ ट्रम्प के बयान पर टिप्पणी करते हुए इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि नाटो को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए. फ्रांसीसी नेता ने स्पष्ट किया है कि उन्हें मास्को की कार्रवाइयों में केवल सेना को नियन्त्रित करने की इच्छा ही नज़र आती है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस हमले पर नाटो गठबंधन की प्रतिक्रिया ‘सामान्य’ होनी चाहिए.
मैक्रॉं को डर है कि कहीं रूस के साथ वास्तविक लड़ाई न शुरू हो जाए और पेरिस वास्तव में रूस के साथ सीधे टकराव के डर से पटरी पर आ गया है.
यूरोप में दहशत. समाचार समिति ब्लूमबर्ग ने बताया है कि रूस के इस हमले के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने मास्को में रूसी राजनयिकों के साथ एक ‘गहन बैठक’ की है. इस संदर्भ में, आरएफआई ने जानकारी दी है कि फ्रांसीसी सैन्य ठिकानों के ऊपर अज्ञात ड्रोनों को उड़ते हुए देखा गया है.
इस बीच, रूसी मिसाइल दनेप्रोपित्रोव्स्क के इलाके में लगातार गोदामों को निशाना बना रहे हैं. कई ऐसे हैंगर नष्ट कर दिए गए हैं, जहाँ उक्रअईना के लड़ाकू विमान और ड्रोन खड़े थे, एक हेलीकॉप्टर भी जलकर राख हो गया है. ‘दनबास पार्टिशन’ ने इस ख़बर की पुष्टि की है कि ड्रोनों के रखरखाव और मरम्मत के काम आनेवाली उक्रअईना की एक वर्कशाप और 81वीं एयर ब्रिगेड को रूसी सेना ने पूरी तरह से घेर रखा है.
आखिर में बस, यही कहना है कि अगर सैकड़ों फ्रांसीसी सैनिकों की मौत की जानकारी की पुष्टि हो जाती है, तो यह इस युद्ध के दौरान नाटो का सबसे बड़ा नुकसान होगा. यूरोप, और खासकर पेरिस, अब बेहद डरे हुए दिखाई दे रहे हैं. इससे पहले, रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति दोलाण्ड ट्रम्प की चुनौती स्वीकार कर ली थी.
Read Also –
[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लॉग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

अनिल जनविजय