Tuesday, July 14, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न
धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया
गैर आदिवासी समाज से भिन्न

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुओं को अधिक से अधिक, न्यूनतम तीन बच्चे पैदा करने की सलाह दी है. कुछ इस अंदाज में जैसे किसानों से कहा जाता है कि ज्यादा से ज्यादा फसल उगाओ. लेकिन यह कहते हुए कभी इस बात का ध्यान नहीं रहता कि ज्यादा से ज्यादा फसल उगाने के लिए धरती के साथ हमारा व्यवहार कैसा हो जाता है. जमीन पर लगातार खेती करना, एक के बाद दूसरी फसल लगाना, उसे ज्यादा से ज्यादा निचोड़ लेना, बिना इस बात की परवाह किये कि इससे जमीन किस कदर बेहाल हो जाती होगी. आदिवासी समाज का रवैया धरती और औरत दोनों के प्रति वैसा नहीं जैसा हिंदू समाज का है.

बच्चे ज्यादा पैदा करने की बात कुछ इस अंदाज से कही जा रही है जैसे औरत बच्चा पैदा करने की मशीन हो. भागवत जब ज्यादा बच्चे पैदा करने का आह्वान करते हैं तो क्या उनके जेहन में औरत रहती भी है कि वह क्या सोचती है? गर्भ धारण और बच्चे को जन्म देने में उसे कितनी पीड़ा होती है? वास्तविकता यही है कि जैसे धरती बेजुबान होती है, उसी तरह मनुवादी संस्कृति में औरत को बेजुबान बना दिया गया है. वह बच्चे पैदा करने की मशीन ही मानी जाती है. आदर्श स्थिति में उसका काम घर की चाहरदिवारी के भीतर रह कर बच्चे पैदा करना और उनका लालन पालन करना है.

You might also like

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

त्रासद सिथति यह है कि हमारे देश में बच्चे पैदा करने की उम्र वाली यानि, 15 से 49 वर्ष की महिलाओं की कुल आबादी का 53.7 फीसदी एनीमिया की शिकार हैं. भरपेट भोजन न मिलने या कुपोषित होने की वजह से उनके बदन में खून की बेहद कमी है. और उनको ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की बात भागवत कर रहे हैं. सरना और सनातन एक होने की बात करने वाले लोगों को इस कसौटी पर भी फर्क को देखना चाहिए.

आदिवासी समाज का रवैया धरती और औरत दोनों के प्रति वैसा नहीं जैसा हिंदू समाज का है. आदिवासी धरती का उस कदर दोहन नहीं करता जैसे, बाहर का समाज. पंजाब, हरियाणा या फिर ज्यादा से ज्यादा तथाकथित विकसित इलाकों में धान की फसल कटते ही गेहूं या किसी अन्य फसल की खेती शुरु हो जाती है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पराली जलाने की वजह ही यही है, ताकि जल्द से जल्द नई फसल लगायी जा सके. जबकि आदिवासी इलाकों में धान की एक फसल के बाद सामान्यतः धरती को परती छोड़ दिया जाता है, ताकि वह कुछ महीने विश्राम कर ले.

आदिवासी समाज में स्त्रियां सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं. वे घर के भीतर बाहर पुरुषों के साथ मिल कर काम करती हैं. सामान्यतः हिंदू समाज जब युद्ध भूमि में जाता तो स्त्रियों को जौहर के लिए घर में छोड़ जाता, लेकिन आदिवासी महिलाएं संघर्ष के मैदान में भी पुरुषों के साथ होती हैं. सार्वजनिक उत्पादन प्रणाली का हिस्सा बनती हैं. खेत खलिहानों में पुरुषों के साथ मिल कर काम करती हैं. अपने बल पर जीने का हौसला रखती हैं.

गैर आदिवासी समाज में भी निम्न तबके की महिलाएं खेतों में काम करती हैं, लेकिन सवर्ण घर की महिलाओं से तो आप यह कल्पना नहीं कर सकते. आर्थिक संपन्नता हासिल करते ही पिछड़े वर्ग में भी महिलाओं को धर के अंदर रखने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है. यह दो संस्कृतियों के नजरिये का फर्क है.

  • विनोद कुमार

Read Also –

 

[  प्रतिभा एक डायरी  स्वतंत्र ब्लॉग है। इसे नियमित रूप से पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें। आपकी प्रतिक्रिया पर प्रकाशित ब्लॉग।  प्रतिभा एक डायरी  से जुड़े नए अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए हमें  फेसबुक  और  गूगल  पर ज्वाइन करें,  ट्विटर हैंडल  पर फॉलो करें… और ‘मोबाइल ऐप’ डाउनलोड  करें  ]

दान करने के लिए बार कोड स्कैन करें

जी-पे
Previous Post

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

Next Post

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
June 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
Next Post

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी की गुंडागर्दी नोटबंदी, जीएसटी, लॉकडाऊन से तबाह आत्महत्या करते लोग

August 31, 2022

बंदूकों की गूंज के बीच दण्डकारण्य की जंगलों से प्रकाशित ‘प्रभात’ के लिए अविस्मरणीय योगदान देने वाली कॉ. आलूरी ललिता

July 15, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

June 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

June 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.