Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

लाशों का व्यापारी, वोटों का तस्कर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 10, 2019
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

लाशें ले लो, लाशें ले लो
ताज़ी-ताज़ी लाशें ले लो
वोट दे दो, वोट दे दो
तीन सौ लाशें ले लो
तीन सौ सीट दे दो

सन दो ह़जार वाली पुरानी लाशों की तस्वीरों से जुडी
हमारे पराक्रम की कहानियां ले लो
हम ही असली लाशों वाले हैं
हमारे प्रतिद्वंदियों की बातों में मत आइये

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

नकलचियों से सावधान
हम ही असली लाशों वाले है
अपनों की लाशें ले लो
गैरों की लाशें ले लो

लाशें ले लो वोट दे दो
नौकरी पानी दवा के वहम में मत पड़िये
लाशें देख कर ही वोट कीजिये
लाशें ले लो, लाशें




उपरोक्त कविता हिमांशु कुमार के वाल से ली गई है. आज सत्ता पर विराजमान शासक इसी लाशों के दम पर एक बार देश की सत्ता पर विराजमान होना चाहती है क्योंकि उसके सारे जुमले और देश के अन्दर की जा रही लाशों का व्यापार ठप्प पड़ गया है. लाशों के इस व्यापारी की पोल सरेआम खुल चुकी है. गाय, गोबर, मंदिर, मुस्लिम, दलित, सवर्ण जैसे सारे मुद्दे फुस्स हो गये हैं. अब इस लाशों के व्यापारी को लाशों का बड़ा ढ़ेर चाहिए इसलिए लाशों के व्यापारी और उसके दलाल-चमचे मीडिया घराने लाशों के बड़े ढ़ेर की तालाश में निकल चुके हैं. कश्मीर से ज्यादा मुफीद जगह और कहां हो सकती है ? अब वह कश्मीर में लाशों का ढ़ेर लगाना चाहती है. अब वह पाकिस्तान की सरहदों पर लाशों का ढेर लगाना चाह रही है. पर पाकिस्तान भी परमाणु बमों से लैस है. लाशों के इस व्यापारी पर अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया की पैनी नजर है. अन्तराष्ट्रीय समुदाय का गहरा नियंत्रण है.

अब क्या किया जा सकता है ? कश्मीर के पुलवामा में पिछड़े कौम से नौकरी करने जाने वाले सीआरपीएफ के जवान मुफीद है. उनकी हत्या करायी जा सकती है. देश में थोड़े कोहराम मचेगा और इसके आड़ में पाकिस्तान पर हमला किया जा सकता है. युद्ध छेड़ी जा सकती है. लाशों के व्यापारी इसी ताक में थे पर अफसोस यह कि लाशें ज्यादा नहीं गिरी. महज 44 लाशों के सहारे पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध नहीं छेड़ी जा सकती, पर पाकिस्तान को छेड़ा जा सकता है. उस पर बम बरसाये तो जा सकते हैं. डिस्कवरी चैनल में जानवरों की शूटिंग की जाती है, अब भी क्या कोई संदेह है. सुना है लाशों के व्यापारी डिस्कवरी चैनल के जानवर बन गये हैं. लोग यूं ही नहीं कहते ‘शेर’. जानवर ही तो होता है शेर, जो मानवों की बस्ती में घुस आया है, लाशों का ढेर लगाने.



पाकिस्तान में गिराये गये घातक बमों से एक कौवा मारा गया. कुछ दरख्त ढह गये. पाकिस्तानी समझ गये, लाशों का व्यापारी को देश में एक बार फिर सत्ता चाहिए. धैर्य रखो. उसने भी धैर्य पूर्वक जवाबी कार्रवाई की और सीमा पार खुले-बंजर जगहों पर बम बरसाये. उस पाकिस्तानी बम-बर्षक को पकड़ने गये दो विमानों को पाकिस्तानियों ने मार गिराया और उसके पायलट को पकड़कर ले गये. देश में कोहराम मच गया. लाशों के व्यापारी की पोल खुल गई. उसकी असहायता और कायरता सरेआम हो गई.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को शुक्रिया, जिसने गिरफ्तार पायलट अभिनंदन को रिहा कर लाशों के इस व्यापारी के मूंह पर करारा तमाचा जड़ दिया. एक बार फिर लाशों के व्यापारी का मूंह काला हो गया. राष्ट्रीयता के उन्मादी हिस्टीरिया पर लगाम लग गया. तब लाशों के इस व्यापारी ने फर्जी खबरें उड़ानी शुरू कर दी पाकिस्तान में घुसने वाले बमवर्षक विमान के हमले में 250, 300, 350 और 400 आतंकवादी मार डाले गये. मारे जाने वाले आतंकवादियों के इस अस्थिर संख्या ने लाशों के व्यापारी पर सवालिया निशान लगा दिया.

कब्रों की पुरानी फोटोग्राफ्स आदि जोर-शोर से उछाले गये, पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रायटर ने सेटेलाइट से तस्वीरें जारी यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान में कोई हाताहात नहीं हुआ. पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो ने ग्रांउड रिपोर्ट कर यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय वायु सेना के हमले से एक कौआ और कुछ दरख्तों (पेड़ों) को नुकसान हुआ है, किसी भी आदमी का जान नहीं गया है. केवल एक आदमी घायल हुआ और एक मकान में दरारें पड़ गई. लाशों के इस व्यापारियों ने तब परस्पर विरोधी बयान जारी करना शुरू कर दिया. एक ने कहा ‘250 मार डाले’, तो दूसरे ने कहा ‘किसी को मारना मकसद ही नहीं था’.



लाशों के व्यापारियों के द्वारा देश में राष्ट्रवादी युद्ध उन्माद की इस हिस्टीरियाई की हवा निकल गई. एक बार फिर उसकी नाकामी उभर कर सामने आ गई. अपनी नाकामी को छिपाने की जितनी भी कोशिशें यह लाशों का व्यापारी कर रहा है, उसकी नाकामी उतनी ही ज्यादा उभर कर सामने आ रही है. लोगों ने एक बार फिर अपनी बुनियादी समस्या, बेरोजगारी, भूखमरी, अनाजों की कीमतें, बिजली, पानी, मंहगाई की ओर देखना शुरू कर दिया है क्योंकि उसे पता है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र मजबूत हो रही है, वह युद्ध नहीं चाह रहा है. उसके शांति के पैगाम को ठुकराना न केवल लाशों के इस व्यापारियों के लिए मुश्किल है, बल्कि उसे कमजोर और डरा हुआ साबित करना भी मूर्खता है.

लाशों का यह व्यापारी देश में युद्धोन्माद के सहारे एक बार फिर वोटों का तस्करी कर देश की सत्ता हासिल करना चाहता है. परन्तु, अब उसे यह एहसास हो चला है कि देश की जनता किसी भी हवाई जुमलों का शिकार नहीं हो सकती. इसलिए अब संभव है, वह अपनी संभावित पराजयता को देखकर अपने भ्रष्टाचार और काले कारनामों की सबूतों को नष्ट करने के लिए दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ या उसे आग के हवाले कर सकती है, जिसकी पूरजोर संभावना है. राफेल मामले में अटर्नी जेनरल के लगातार बदलते बयान यही कहते हैं.




Read Also –

भार‍तीय संविधान और लोकतंत्र : कितना जनतांत्रिक ?
सोशल मीडिया ही आज की सच्ची मीडिया है
बालाकोट : लफ्फाज सरकार और तलबाचाटू मीडिया
युद्ध की लालसा में सत्ता पर विराजमान युद्ध पिशाच
लाशों पर मंडराते गिद्ध ख़ुशी से चीख रहे हैं ! देशवासियो, होशियार रहो ! 




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Tags: डिस्कवरी चैनलपाकिस्तानलाशों का व्यापारीशूटिंगशेर
Previous Post

षड्यन्त्र क्यों होते हैं और कैसे रूक सकते हैं ?

Next Post

बाबरी मस्जिद बिना किसी विवाद के एक मस्जिद थी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

बाबरी मस्जिद बिना किसी विवाद के एक मस्जिद थी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भाजपा का हाथ बलात्कारियों के साथ

April 11, 2018

महिलाओं के प्रश्न पर लेनिन से एक साक्षात्कार : क्लारा जे़टकिन

January 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.