Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अल-क़ायदा के कारण प्रतिबंधित हुआ अज़हर, भारत में आतंकी गतिविधियों का ज़िक्र नहीं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 4, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पाकिस्तान स्थित आतंकवादी सरगना मसूद अजहर जिसे भाजपाई प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने ससम्मान भारत की जेल से निकाल कर कंधार पहुंचाया था, अब उसी भाजपा के 56 इंची सीना होने का ढ़िढ़ोरा पीटने वाले मोदी जिसके 5 साल के लंबे कार्यकाल के बाद भी उसके खाते में जनता को दिखाने हेतु एक भी काम नहीं है. ऐसे में वह कभी पुलवामा में मारे गये सीआरपीएफ के 44 जवानों की नृशंश हत्या के नाम पर वोट मांगते हैं तो कभी बालाकोट जैसे फर्जी हमले (एयर स्ट्राइक) नाम पर, जिसकी न केवल पोल ही खुल गई है बल्कि भाजपा के ही पक्के दलाल चुनाव आयोग तक ने उसे नोटिस थमा दिया है. अब जब मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया गया है तब एक बार फिर मोदी निर्लज्जतापूर्वक अपनी कामयाबी का छाती ठोक रहा है और वोट मांगता फिर रहा है. प्रस्तुत आलेख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी कैसे घोषित किया गया और उसमें मोदी की क्या भूमिका रही है, इसी सवाल पर केन्द्रित है, जिसे रविश कुमार ने लिखा है और हम यह रविश कुमार के ब्लॉग से इसे साभारस्वरूप यहां प्रकाशित कर रहे हैं. ]

अल-क़ायदा के कारण प्रतिबंधित हुआ अज़हर, भारत में आतंकी गतिविधियों का ज़िक्र नहीं

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

मसूद अज़हर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा चिन्हित, प्रतिबंधित और सूचित ग्लोबल आतंकवादी हो गया है. भारत ने लंबे समय तक कूटनीतिक धीरज का पालन करते हुए उसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अज़हर को ग्लोबल आतंकी की सूची में डलवाया है जहां से उसे 2009, 2016, 2017 और मार्च 2019 में पहले सफलता नहीं मिली. पांचवी बार में मिली यह सफलता कूटनीतिक धीरज का मिसाल बनेगी. 1 मई को जब 9 बजे तक चीन की तरफ से कोई आपत्ति नहीं आई तब ऐलान हो गया कि संयुक्त राष्ट्र की अल कायदा कमेटी मसूद अज़हर को अल-कायदा से संबंध रखने के आरोप में ग्लोबल आतंकी की सूची में डालती है.भारत ने पुलवामा हमले के बाद मसूद अज़हर को आतंकी सूची में डलवाने की कवायद की थी मगर चीन भारत की दलीलों से सहमत नहीं हुआ. इस बार चीन सहमत नहीं होता तो इस पर संयुक्त राष्ट्र में खुला मतदान होता, तब चीन के लिए मुश्किल हो जाती. 27 फरवरी को अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने साझा रूप से मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ प्रस्ताव रखा था. उसमें यह आधार था कि जैश ए मोहम्मद ने घटना की ज़िम्मेदारी ली है. 13 मार्च को चीन ने आपत्ति लगा दी थी.




इस बार 23 अप्रैल को फिर से इस प्रस्ताव को खोला गया. 1 मई तक आपत्ति दर्ज कराने की समय सीमा रखी गई थी. मसूद अज़हर को आतंकी सूची में इसलिए रखा गया है क्योंकि कमेटी ने पाया है कि मसूद अज़हर ने जैश-ए मोहम्मद को सपोर्ट किया है. जिस जैश ए मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र की इसी 1267 कमेटी ने 2001 को प्रतिबंधित किया था. जैश ए मोहम्मद पर आरोप था कि अल कायदा से उसके वित्तीय और अन्य संबंध आतंकी संगठन अल-क़ायदा से रहे हैं. इस संगठन ने अफगानिस्तान में आतंक बहाल करने का काम किया था. मसूद अज़हर जमात-उद-दावा का प्रमुख है. संगठन बदल-बदल कर काम करता रहा है.

पुलवामा हमले के बाद जैश ए मोहम्मद ने घटना की ज़िम्मेदारी ली थी. भारत ने इस आधार पर मसूद अज़हर को घेरा था. लेकिन इस बार के प्रस्ताव से पुलवामा हमले को हटा दिया गया. पाकिस्तान और चीन चाहते थे कि पुलवामा का ज़िक्र हटा दिया जाए. इसलिए 1267 के प्रस्ताव में पुलवामा और 2008 के मुंबई हमले का ज़िक्र नहीं है. संसद पर हुए हमले का ज़िक्र नहीं है. IC 814 की घटना का ज़िक्र है.

भारत मांग करता रहा है कि मुंबई हमले के मामले में उस पर मुकदमा चले और सज़ा हो. अच्छा होता कि मसूद अज़हर भारत में हुई आतंकी गतिविधियों के कारण प्रतिबंधित होता. इससे भारत को अपने भौगोलिक क्षेत्र में पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों को भी मान्यता मिलती. मसूद अज़हर हमारा दुश्मन है क्योंकि वह भारत की ज़मीन पर हुए आतंकी हमलों का अपराधी है. जो भी हो उसे दूसरे कारणों से सज़ा तो मिली है. यह खुशी की बात है.




पाकिस्तान कह सकता है कि पुलवामा का ज़िक्र नहीं है. उसे राजनीतिक तौर पर बदनाम करने के लिए इसका ज़िक्र डाला गया लेकिन मसूद अज़हर है तो उसी का नागरिक. क्या अल-क़ायदा से संबंध रखने के कारण प्रतिबंधित होना कम शर्म की बात है! भारत और दुनिया की नज़र अब इस बात पर होगी कि मसूद अज़हर की गिरफ्तारी कब होती है. वह उसके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई करता है. पाकिस्तान ने कहा है कि वह प्रतिबंध को लागू करेगा. 2001 में जैश-ए-मोहम्मद पर प्रतिबंध लगा था. इसके बाद भी कई घटनाओं में इस संस्था का ज़िक्र आता है. इसके बाद भी वही अमरीका और वही चीन पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए हुए हैं.

चीन ने भी इस घटना पर बयान जारी किया है. चीन हमेशा मानता रहा है कि इस तरह का काम विस्तृत जानकारी, ठोस सबूत, पेशेवर आधार और सर्वसम्मति से होना चाहिए न कि पूर्वाग्रह के आधार पर. संबंधित पक्षों से सकारात्मक बातचीत के बाद प्रासंगिक देशों ने अपने प्रस्ताव को बदला है. चीन को एतराज़ नहीं है. यानी चीन को जिन बातों से एतराज़ से था उसे मान लिया गया है.

चीन ने अपने बयान में यह भी जोड़ा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ने में काफी योगदान का है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को इस बात का श्रेय दे. आतंक से लड़ने में पाकिस्तान को सहयोग करे.




चीन ने चंद रोज़ पहले पाकिस्तान को अपने सभी मौसमों का साथी बताया था. पाकिस्तान भी अपना स्पेस मिशन कामयाब बनाना चाहता था. मानव युक्त यान भेजना चाहता है जिसमें चीन उसकी मदद कर रहा है. भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लंबी दूरी की कामयाबी हासिल कर ली है. वो भी अपने दम पर.

पाकिस्तान और चीन अपनी बात कहेंगे. कूटनीतिक तराजू पर बटखरा रखकर नहीं तौला जाता है. सब अपने अपने हिसाब से भार बताते हैं. विश्लेषण एक तरफ. मसूद अज़हर पर प्रतिबंध एक तरफ. भारत ने जिन कारणों से प्रयास किया था वो भले न माने गए हों मगर जिस दिशा में प्रयास किया था वो सफल रहा है. माना गया है.

नोट- मैं आतंक और आंतरिक सुरक्षा के विषय पर नहीं लिखता. इस मामले में दूसरों का लिखा पढ़ता हूं जो इस क्षेत्र की घटनाओं पर निरन्तर नज़र रखते हैं. अध्ययन करते हैं. इस लेख के लिए दि हिन्दू की सुहासिनी हैदर और श्रीराम लक्ष्मण की रिपोर्ट पढ़ी. इंडियन एक्सप्रेस के सुभोजित रॉय और सौम्य अशोक की रिपोर्ट पढ़ी. मैंने पाकिस्तान के अखबार दि डॉन की वेबसाइट को भी देखा. पाकिस्तान का पक्ष है मगर हेडलाइन में मसूद अज़हर को प्रतिबंधित किए जाने की प्रमुखता मिली है. UNSC lists JeM chief as global terrorist इतना लिखा है. यानी आतंकी घोषित किए जाने को प्रमुखता दी गई है. मैं ऐसे विषयों पर व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के पोस्ट नहीं पढ़ता.




Read Also –

आतंकवादी प्रज्ञा के पक्ष में सुमित्रा महाजन
भाजपा-आरएसएस के साथ कौन से तत्व हैं, जो उसे ताकत प्रदान करती है ?
धारा 124-A को लेकर भाजपा का दुष्प्रचार और गोबर भक्तों का मानसिक दिवालियापन
मोदी के झूठे वायदे आखिर कब तक ?
पुण्य प्रसून वाजपेयी : मीडिया पर मोदी सरकार के दखल का काला सच
मोदी की ‘विनम्रता’ !




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Tags: अल कायदाआतंकी हमलोंआंतरिक सुरक्षाचीनजैश-ए-मोहम्मददि डॉनपाकिस्तानपुलवामामसूद अज़हरसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
Previous Post

धन का अर्थशास्त्र : मेहनतकशों के मेहनत की लूट

Next Post

‘जब बच्चे घर से बाहर निकलने में डरें’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

'जब बच्चे घर से बाहर निकलने में डरें'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मंदिरों में श्लोक, भजन, दानकर्ताओं के नाम उर्दू लेखन में

October 17, 2022

लू-शुन : विचारों के बीज साहित्य के हल से ही बोये जा सकते हैं

February 8, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.