Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

धन का अर्थशास्त्र : मेहनतकशों के मेहनत की लूट

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 3, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

धन का अर्थशास्त्र : मेहनतकशों के मेहनत की लूट

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ता
मैं इस पैसे से नेता अफसर और पुलिस को खरीद लूंगा. मैं इस पैसे से अपना कारखाना लगाने के लिए किसान की ज़मीन पुलिस के दम पर छीन लूंगा. अब मेरे पास बिना काम किये रोज़ करोड़ों रूपये आते जायेंगे. अब सरकार पुलिस और जेल अदालत मेरे बिना मेहनत से कमाए हुए धन की सुरक्षा करेगी.

‘धन’ शब्द ‘धान’ से बना है. पहले जो किसान मेहनत करके ज़्यादा धान उगा लेता था, उसे धनवान कहते थे. बाद में मुद्रा अर्थात पैसे का अविष्कार हुआ. पैसे को वस्तुओं या सेवा के बदले लिया दिया जाने लगा. तब से माना जाने लगा कि पैसा वस्तुओं का प्रतिनिधि है. वस्तुओं की कीमत पैसे से नापी जाती है. जैसे पहले एक रूपये में दस किलो अनाज आता था. अब डेढ़ सौ रूपये में दस किलो अनाज आता है. तो अनाज की कीमत बढ़ गयी या कहिये कि पैसे की कीमत गिर गयी. तो असल में पैसे की कीमत गिरने से अनाज की कीमत बढ़ गयी.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

किसी चीज़ की कीमत तब घटती है, जब उसकी मात्रा ज़्यादा बढ़ जाती है. जैसे पैसे की मात्रा ज़्यादा हो गयी तो पैसे की कीमत घट गयी. परिणामस्वरूप वस्तुओं का मोल बढ़ गया, इसे ही आप महंगाई कहते हैं. इसे अर्थशास्त्र में मुद्रास्फीति कहा जाता हैं अर्थात वस्तुओं और सेवाओं के मुकाबले मुद्रा का ज़्यादा हो जाना. मान लीजिए मेरे पास सौ करोड़ रूपये हैं. मैंने सुबह बैंक में फोन करके सौ करोड़ रुपयों के शेयर्स खरीद लिए. शाम को मैंने दस प्रतिशत बढ़े हुए रेट पर वो शेयर बेच दिए. शाम तक मेरे पास दस करोड़ रूपये का मुनाफा आ गया. इस मामले में मैंने ना तो किसी वस्तु का उत्पादन किया, ना ही किसी सेवा का उत्पादन किया लेकिन मेरे पास दस करोड़ रूपये बढ़ गए.




पैसे मेरे बैंक में ही हैं. अब मैं चेक से उन पैसों से अनाज भी खरीद सकता हूं. मैं अनाज मंडी में खरीदे गए सारे अनाज को खरीद लेता हूं. बाजार में बिक्री के लिए अनाज नहीं जाने देता, इससे अनाज की मांग बढ़ जाती है. इससे अनाज की कीमत बढ़ जाती है. अनाज की कीमत दस करोड़ एक दिन में कमाने वाले के लिए नुकसानदायक नहीं है लेकिन सौ रुपया रोज़ कमाने वाले मजदूर के लिए नुकसानदायक होगी. अनाज उगाने वाले किसान को ज़्यादा पैसा मिलेगा. लेकिन चूंकि पैसे की कीमत तो गिर ही चुकी है इसलिए उसे उस पैसे की बदले में कम सामान मिलेगा. तो पूंजी बैठे-बैठे पैसे को बढ़ाने की ताकत किसी के हाथ में दे देती है. उसका पैसा तेज़ी से बढ़ता जाता है लेकिन मेहनत करने वाले मजदूर या मेहनत से उत्पादन करने वाले किसान का पैसा तेज़ी से नहीं बढ़ता. इसलिए यह तबका इस अर्थव्यवस्था में गरीब बन जाता है.

शेयर खरीदने के लिए मुझे बैंक क़र्ज़ देता है. मैं चाहूं कितनी ही कंपनियां बना सकता हूं. मैं चाहूं तो अपनी ही कम्पनी के शेयर भी खरीद सकता हूं. बैंक में किसान और मजदूर का भी पैसा जमा है. किसान और मजदूर के बैंक में जमा पैसे से मैं अपनी ही कंपनी के शेयर खरीदता हूं. खुद ही उनके रेट बढाता हूं. खुद ही मुनाफ़ा कमाता हूं और मेरे पास पैसा बढ़ता जाता है.

उधर किसान का अनाज नहीं बढ़ रहा इसलिए उसके पास पैसा भी नहीं बढ़ेगा. मैं इस पैसे से नेता अफसर और पुलिस को खरीद लूंगा. मैं इस पैसे से अपना कारखाना लगाने के लिए किसान की ज़मीन पुलिस के दम पर छीन लूंगा. अब मेरे पास बिना काम किये रोज़ करोड़ों रूपये आते जायेंगे. अब सरकार पुलिस और जेल अदालत मेरे बिना मेहनत से कमाए हुए धन की सुरक्षा करेगी.

जो गरीब इस तरह से मेरे धन कमाने को गलत मानेगा, उसे सरकार जेल में डाल देगी. अब नौजवानों को रोज़गार मेरे ही कारखाने या दफ्तर में मिलेगा. अब कालेज में नौजवानों को वही पढ़ाया जाएगा, जिसकी मुझे ज़रूरत होगी. अब नौजवान मेरी सेवा करने के लिए पढेंगे. अब बच्चों की शिक्षा मेरे कहे अनुसार चलेगी. मैं टीवी के चैनल भी खरीद लूंगा. अब टीवी आपको मेरा सामान खरीदने के लिए प्रेरित करेंगे.




मैं शापिंग-मॉल भी खरीद लूंगा. मैं छोटी दुकाने बंद करवा दूंगा. अब आप मेरे ही कारखाने या दफ्तर में काम करेंगे. और मेरे ही शापिंग मॉल में जाकर खरीदारी करेंगे. मैं ही एक हाथ से आपको पैसे दूंगा और दूसरे हाथ से पैसे ले लूंगा. आप दिन भर मेरे लिए काम करेंगे. अब आप मेरे गुलाम हो जायेंगे. अब मैं आपकी जिंदगी का मालिक बन जाऊंगा. अब मैं करोड़ों लोगों की जिंदगी का मालिक बन जाऊंगा. अब आपको वहां रहना पड़ेगा, जहां मेरा ऑफिस या कारखाना है. आपके रहने की जगह मैं निर्धारित करूंगा. आपको मैं उतनी ही तनख्वाह दूंगा जिसमे आपका परिवार जी सके.

आप अपनी बेसहारा बुआ-मौसी या माता-पिता को अपने साथ नहीं रख पायेंगे. तो आपके परिवार का साइज़ भी मैं तय करूंगा. अब आप मेरे लिए काम करते हैं. आपके बच्चे मेरे लिए पढते हैं. आप मेरी पसंद की जगह पर रहते हैं. अब मैं जिस पार्टी को चाहे टीवी की मदद से आपके सामने महान पार्टी के रूप में पेश कर देता हूं, आप उसे वोट भी दे देते हैं.

मैं साम्प्रदायिकता का इस्तेमाल करके आपको मेरे लिए फायदेमंद पार्टी को वोट देने के लिए मजबूर करता हूं. मैं अफ्रीका में अलग-अलग कबीलों को आपस में लड़वाता हूं. मैं भारत में अलग-अलग संप्रदायों को लड़वाता हूं. और फिर बड़े कबीले की तरफ मिल कर सत्ता पर कब्ज़ा कर लेता हूं. भारत में अभी बड़ा कबीला हिंदू है इसलिए मैं हिंदुओं की साम्प्रदायिकता को भड़का कर अपने गुलाम नेता को सत्ता में बैठा देता हूं. पाकिस्तान में मैं मुसलमान साम्प्रदायिकता को भडकाता हूं क्योंकि पाकिस्तान में बड़ा कबीला मुसलमान हैं. ये रही हकीकत आपकी राजनीति, साम्प्रदायिकता, अर्थव्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, और विकास की.




Read Also –

अस्थाई गौशालाओं की स्थाई समस्या, कैसे हो समाधान ?
सेना अमीरों के मुनाफे के लिए युद्ध लड़ती है
नियमगिरी में ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं पर पुलिस के हमले
भाजपा के विधायक भीमा मंडावी की हत्या और उसका संदेश
वीडियोकॉन घोटाला : इस देश का अब भगवान ही मालिक है …
अज्ञानता के साथ जब ताकत मिल जाती है तो न्याय के लिए सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो जाता है 




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Previous Post

सवालों के घेरे में लोकतंत्र

Next Post

अल-क़ायदा के कारण प्रतिबंधित हुआ अज़हर, भारत में आतंकी गतिविधियों का ज़िक्र नहीं

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

अल-क़ायदा के कारण प्रतिबंधित हुआ अज़हर, भारत में आतंकी गतिविधियों का ज़िक्र नहीं

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

एसबीआई : पापों का प्रायश्चित

January 4, 2020

मोदी संग किसिंजर यानी नीच संग कीच

October 25, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.