Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘जब बच्चे घर से बाहर निकलने में डरें’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 5, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
1
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

‘जब बच्चे घर से बाहर निकलने में डरें’ हर्षमंदर का लेख ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ दिनांक 4 मई, 2019 के अंक में प्रकाशित ‘When children walk with fear‘ का हिन्दी अनुवाद है. हर्ष मंदर, चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी हैं. हम हिन्दी के अपने पाठकों के लिए विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित महत्वपूर्ण आलेखों का अनुवाद प्रकाशित करते हैं, ताकि गोदी मीडिया खासकर हिन्दी मीडिया के द्वारा फैलाये जा रहे अंधकार के बीच रोशनी की मशाल जलाये रखा जा सके. प्रस्तुत आलेख का हिन्दी अनुवाद किया है वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक विनय ओसवाल ने.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

पांच साल में, बीजेपी ने लगातार मुसलमानों को हाशिए पर लाने की कोशिश की है.

वर्ष 1947 में एक सांप्रदायिक दंगे में अपने पति को खोने के बाद अनीस किदवई गांंधीजी के पास गई और कहा कि ‘वह दंगा की पीड़ाओं को झेलने के बावजूद भी जो लोग भारत छोड़ कर नहींं गए मैं उनके बीच चलाये जा रहे आपके राहत कार्यों में हाथ बटाना चाहती हूंं.’

गांधी जी ने बड़े दुःख के साथ कहा कि ‘चारों ओर घृणा की आग जल रही है. वह भी तब तक दिल्ली नहीं छोड़ सकते जब तक माहौल मुसलमान के हर बच्चे के लिए सड़कों पर निर्भय होकर निकलने लायक न बन जाय.’ गांधी के लिए देश के माहौल के सामान्य होने की जांच का यही मापदण्ड था कि हर मुसलमान बच्चा यहांं सड़कों पर निर्भय होकर घूम सके. हर्ष मंदर इसी आधार पर 2019 मेें देश केे अंदर बने माहौल की जांच करते हैं.




भाजपा के चुनाव अभियान से यह स्पष्ट तौर पर जाहिर होता है कि उसने अपने ही देश के खास नागरिकों के समूह को दुश्मन मान उसके विरुद्ध युद्धोन्माद जैसा माहौल बना दिया है. चूंकि भारत का संविधान देश के सभी नागरिकों को समान नागरिक अधिकार देता है, इसलिए यह माहौल संविधान की भावनाओं का भी अपमान और उसके प्रति भी एक युद्ध है. यह स्वतंत्रता संग्राम के चरित्र के खिलाफ और भारत की सभ्यता की विरासत के बेहतरीन मूल्यों, इसकी बहुलता, विविधता के समायोजन की प्रकृति के खिलाफ भी एक युद्ध ही है.

भारत में रह रहे मुसलमानों को भारतीय राजनीति में अप्रसांगिक बनाने के लिए वर्ष 2014 के चुनावों से ही भाजपा ने मुसलमानों और मुसलमान प्रत्याशियों के खिलाफ विशेषाधिकार प्राप्त जातियों, वंचित हिंदू जातियों और भारत के पूर्वोत्तर में ईसाईयों को इस आधार पर संगठित करने की पुरजोर कोशिश की कि मुसलमान उनका  दुश्मन हैं.

इस राजनैतिक हथकण्डे से भाजपा विरोधी पार्टियों को हिन्दू मतदाताओं के छिटक जाने का भय सताने लगा और मुसलमानों की चिंता से जुड़े मुद्दों को उठाने से अपने हाथ खींचने पर मजबूर कर दिया.




केरल में ईसाई और मुसलमान अल्पसंख्यक बाहुल्य सीट जिस पर हिंदुओं के वोट 48 प्रतिशत ही है, से भी राहुल गांधी के चुनाव लड़ने पर यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इस सीट से उन्होंने यह सोच कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है कि सिर्फ मुसलमान और ईसाइयों से वोट मांग कर वे चुनाव जीत सकते हैं. इसे इशारे ही इशारे में राहुल गांधी द्वारा हिंदुओं का और राष्ट्र का अपमान बता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राहुल गांधी पर तंज कस रहे हैं.

राहुल गांधी के इस निर्णय को किस बिना पर गैर-कानूनी ठहराया जा सकता है ? जब तक की कानूनन अल्पसंख्यकों के वोट के वजन को अन्य के मुकाबले हल्का न ठहरा दिया जाय.

अमित शाह ने वर्तमान में असम तक सीमित नागरिक रजिस्टर का दायरा बढ़ाने की बात उठाकर इसी बात को और ज्यादा स्पष्ट कर दिया है. असम में ही अकेले 40 लाख लोगों की नागरिकता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. विश्व में इतनी बड़ी संख्या में कहीं भी लोगों के सामने किसी भी देश का नागरिक न होने की समस्या खड़ी नहीं है.




अमित शाह की यह मुहिम विदेशी हिंदुओं, सिखों और बौद्धों आदि को भारतीय नागरिक मानने का भी वादा करती है. वह पीढ़ियों से वहां बसे मुसलमानों और ईसाइयों को ‘घुसपैठिया’ और ‘दीमक’  बताते हैं. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनको ‘हरा वायरस’ बताते हुए इस मुहिम का तापमान बढाते हुए ‘बजरंग बली’ को ‘अली’ के खिलाफ खड़ा कर देते हैं.

पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में अभद्र और लांछन वाली भाषा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. एनडीटीवी ने सर्वेक्षणों और अध्ययन के आधार पर यह पाया कि यूपीए के पांच साल के शासन की तुलना में मोदी सरकार के कार्यकाल में अभद्र भाषा के इस्तेमाल में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और नफरत फैलाने वाले भाषणों का 88 प्रतिशत भाजपा नेताओं द्वारा दिया गया है.




इस अवधि में बिना मुकदमों के घृणात्मक माहौल बनाकर मार डालने की घटनाओं में मुसलमानों और दलितों को सर्वाधिक निशाना बनाया गया. इंडियास्पेंड ने पाया कि वर्ष 2010 से 2017 की अवधि के बीच में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद 97 फीसदी गाय से जुड़ी हिंसा हुई और 86 फीसदी हिंसात्मक हमले मुसलमानों पर हुए हैं.

घृणात्मक हमलों के शिकार परिवारों का पुरसाहाल लेने के सफर के दौरान कारवां-ऐ- मोहब्बत ने पाया कि वे अलग-थलग और डरे हुए हैं, राज्य के प्रशासन से उन्हें कोई मदद नही मिलती, उल्टा उन्हें ही आपराधिक मामलों की कार्यवाहियों में फंसा दिया जाता है. हमला कर जिंदा मार डालने वाले अपराधियों को सिर्फ संरक्षण ही नहीं, उन्हें नायक बता उनकी वीरता का गुणगान किया जाता है.

एक केन्द्रीय मंत्री ने लॉन्चिंग के आरोपी का माल्यार्पण कर सम्मानित किया और एक अन्य मंत्री ने जेल में मरे लॉन्चिंग के एक आरोपी के शव पर तिरंगा ओढ़ाया.
ऐसा लगता है कि भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को लंबे समय से एक सांप्रदायिक पूर्वाग्रह ने जकड़ लिया है.




इस प्रणाली का मोदी काल में तेजी से क्षरण हुआ है. मायाबेन कोडनानी पहली महिला राजनेता है जो वर्ष 2002 में गुजरात में हुए नरसंहार में हिंसा भड़काने और हिंसात्मक भीड़ का नेतृत्व करने की दोषी पाया गईं और उनकी जमानत मोदी के सत्ता में लौटने बाद, तुरंत हो गयी तथा सभी मामलों में बरी भी कर दिया गया.

अमित शाह जो आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष है और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जिनको सरकारी पदों पर रहते हुए हत्या जैसे संगीन अपराधों में लिप्त और दोषी पाया गया था, सभी को आज पूरी तरह दोष मुक्त कर दिया गया है. यही नहीं भयाक्रांत करने के अपराधी संघ परिवार के दोषियों को एक-एक करके सभी को इस आधार पर बरी कर दिया कि अभियोजन ने उनके खिलाफ साक्ष्यों को न्यायालय में प्रस्तुत ही नहीं किया.

श्रृंखलाबद्ध आतंकी हमलों के षड्यंत्र की मुख्य साजिशकर्ता और दोषी (जिन्हें अभी न्यायालय ने दोष मुक्त नहीं किया है) प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारना मुसलमानों के खिलाफ छेड़े गए इस युद्ध का स्पष्ट संकेत है.




गुरुग्राम में क्रिकेट खेल रहे एक मुस्लिम बच्चे पर हमला किया जाता है, उसी समय एक भीड़ उसके घर पर हमला करती है, खिड़कियों को तोड़ती है और घर में सभी की पिटाई करती है. अपने परिवार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराने के बाद, उन्हें गुरुग्राम में रहने और काम करने की अनुमति इसी शर्त पर देने की बात कही गई कि वे थाने में जाकर आत्मसमर्पण करें और संकल्प लें कि वे हमलावरों के खिलाफ मामले को आगे नहीं बढ़ाएंगे.

मुझे लगता है कि गांधीजी की लालसा एक ऐसे भारत के निर्माण की थी, जिसमें एक मुस्लिम बच्चा भी बिना किसी डर के चल सकता है,  क्या हम गांधीजी की कल्पना से उलट भारत का निर्माण करना चाहते हैं ?




Read Also –

आतंकवादी प्रज्ञा के पक्ष में सुमित्रा महाजन
कैसा राष्ट्रवाद ? जो अपने देश के युवाओं को आतंकवादी बनने को प्रेरित करे
स्युडो साईंस या छद्म विज्ञान : फासीवाद का एक महत्वपूर्ण मददगार
राष्ट्र का विवेक’ क्या मृत्यु-शैय्या पर पड़ा है ?




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Previous Post

अल-क़ायदा के कारण प्रतिबंधित हुआ अज़हर, भारत में आतंकी गतिविधियों का ज़िक्र नहीं

Next Post

मोदी है तो मोतियाबिंद हैः देश से 200 टन सोना चोरी ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

मोदी है तो मोतियाबिंद हैः देश से 200 टन सोना चोरी ?

Comments 1

  1. नीतू कुमारी says:
    7 years ago

    फासिज़्म इसी तरह आता है •

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वक़्त की ऐनक पर आदमी

September 10, 2020

सौदा

November 1, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.